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मणिपुर हिंसा: राहत शिविरों में अब तक 731 विस्थापितों की मौत, 43 हजार लोग अभी भी बेघर

मणिपुर हिंसा: राहत शिविरों में अब तक 731 विस्थापितों की मौत, 43 हजार लोग अभी भी बेघर


मणिपुर में मई 2023 की जातीय हिंसा के बाद से राहत शिविरों और अस्थायी आवासों में 731 लोगों की मौत हो चुकी है। ...और पढ़ें







मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद से अब तक राहत शिविरों में 700 से अधिक लोगों की मौत(फाइल फोटो)


 नई दिल्ली। मणिपुर में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद से अब तक राहत शिविरों और पहले से निर्मित आवासों में शरण लिए हुए 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के गृह विभाग द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत शेयर की गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है।


यह जानकारी मणिपुर सूचना आयोग के निर्देश के बाद शुक्रवार को आरटीआई कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक हरेश्वर गोस्वामी को सौंपी गई।

गृह विभाग द्वारा विभिन्न जिला प्रशासनों से जुटाए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नौ जिलों के राहत शिविरों और अस्थायी आवासों में कम से कम 731 विस्थापितों की जान गई है। मौतों के मामले में चूराचांदपुर जिला सबसे आगे रहा है, जहां 248 लोगों की जान गई है।


इसके बाद बिष्णुपुर में 151, कांगपोकपी में 128, इंफाल वेस्ट में 94, काकचिंग में 60 और इंफाल ईस्ट में 25 मौतें दर्ज की गई हैं। वहीं, जिरीबाम में 13, थौबल में 11 और तेंगनौपाल में एक विस्थापित की मौत हुई है।


हजारों लोग अभी भी शिविरों में रहने को मजबूर

संघर्ष शुरू होने के तीन साल बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। आरटीआई से पता चला है कि राज्य भर में 43,000 से अधिक लोग अब भी राहत शिविरों और प्री-फैब्रिकेटेड घरों में रहने को मजबूर हैं।


30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कांगपोकपी जिले में सबसे अधिक 15,694 विस्थापित आबादी दर्ज की गई है। इसके अलावा बिष्णुपुर में 10,092 और चूराचांदपुर में 6,365 लोग अभी भी शिविरों में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
राहत शिविरों में मौतों की वजह?

दस्तावेजों के अनुसार, राहत शिविरों और बस्तियों में कम से कम 25 अप्राकृतिक मौतें भी दर्ज की गई हैं। चूराचांदपुर में छह अप्राकृतिक मौतें हुईं, जिनमें डूबने की चार घटनाएं, करंट लगने का एक मामला और यौन उत्पीड़न का एक मामला शामिल है। यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जिला प्रशासन ने बताया कि इन घटनाओं के बाद शिविरों में काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। दूसरी ओर, इंफाल वेस्ट में चार अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गईं, जिनमें फांसी लगाने के दो मामले, ड्रग ओवरडोज का एक मामला और गोली लगने के कारण हुई एक मौत शामिल है।
स्वास्थ्य संकट का सामना

राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को विस्थापन के साथ-साथ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। आरटीआई के आंकड़ों के अनुसार, इंफाल ईस्ट जिले के शिविरों में 217 लोग गंभीर या लाइलाज बीमारियों से पीड़ित हैं। इसी तरह, इंफाल वेस्ट में 41 और बिष्णुपुर में 26 मरीज ऐसी असाध्य बीमारियों से जूझ रहे हैं।


जिला प्रशासनों ने आरटीआई के जवाब में बताया कि प्रभावित शिविर निवासियों को विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें चिकित्सा उपचार, मानसिक काउंसलिंग, दवाएं, व्हीलचेयर, एयर गद्दे और सर्जरी के लिए वित्तीय सहायता शामिल है।

यह आरटीआई प्रकटीकरण मणिपुर में चल रहे विस्थापन संकट के मानवीय प्रभाव और जमीनी हकीकत की अब तक की सबसे व्यापक और आधिकारिक तस्वीर पेश करता है।
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