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क्या गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा

क्या गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने गुपचुप तरीके से ईरान के लावान द्वीप पर स्थित एक रिफाइनरी पर हमला किया। ...और पढ़ें





संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने गुपचुप तरीके से मिडिल-ईस्ट युद्ध में एंट्री की और पिछले महीने ईरान पर हमले किए। इस बात का दावा वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से किया गया।


इससे यूएई, अमेरिका और इजरायल के साथ-साथ इस युद्ध में एक नया प्रत्यक्ष भागीदार बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ये हमले अप्रैल की शुरुआत में ईरान के लावान द्वीप पर स्थित एक रिफाइनरी को निशाना बनाकर किए गए थे। ठीक उस समय जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पांच हफ्ते तक चले हवाई हमलों के अभियान के बाद युद्ध में संघर्ष-विराम की घोषणा कर रहे थे।

अमेरिका ने किया यूएई के इस कदम का स्वागत

अमेरिका ने अमीरात के इन हमलों का और लड़ाई में शामिल होने के इच्छुक किसी भी अन्य खाड़ी देश का चुपचाप स्वागत किया। एक सूत्र ने दावा किया कि वॉशिंगटन को इस बात की कोई चिंता नहीं थी, क्योंकि संघर्ष-विराम अभी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ था।

हालांकि, 8 अप्रैल की सुबह ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने कहा, "ईरान में लावान द्वीप की तेल सुविधाओं को निशाना बनाए जाने के कुछ ही घंटों बाद अमीरात और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए।" सरकारी ब्रॉडकास्टर ने बताया कि लवान फैसिलिटी पर सुबह 10:00 बजे (0630 GMT) एक कायरतापूर्ण हमला किया गया।
यूएई ने क्या कहा?

उसी दिन सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद यूएई ने कहा कि उसे 17 ईरानी मिसाइलों और 35 ड्रोन से निशाना बनाया गया था। ईआईए के आंकड़ों के अनुसार, 2020 तक यह रिफाइनरी ईरान की 10वीं सबसे बड़ी रिफाइनरी थी, जहां हर दिन 60,000 बैरल कच्चा तेल प्रोसेस किया जाता था।


यूएई ने ईरान के अंदर हमले करने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं की है। उसके विदेश मंत्रालय ने पहले दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि देश को दुश्मन के हमलों का जवाब देने का अधिकार है, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल है।
ईरान ने यूएई को बनाया था निशाना

इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यूएई को निशाना बनाया गया और अमीराती क्षेत्र, हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचे पर 2,800 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे।

रिपोर्ट में जिन सुरक्षा विश्लेषकों का जिक्र किया गया है उनके अनुसार, यूएई के पास इस क्षेत्र की सबसे आधुनिक वायु सेनाओं में से एक है, जो फ्रांसीसी मिराज लड़ाकू विमानों, आधुनिक F-16 जेट, ड्रोन और निगरानी विमानों से लैस है।


युद्ध की शुरुआत में जब ईरान के ऊपर कुछ अज्ञात लड़ाकू विमानों को उड़ते हुए देखा गया तो यूएई की इसमें संलिप्तता को लेकर अटकलें तेज हो गईं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यूएई ने यूएन के उन प्रस्तावों के मसौदों का समर्थन किया, जिनमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की अनुमति दी गई थी। साथ ही, उसने दुबई में ईरान से जुड़े स्कूलों, क्लबों और यात्रा सुविधाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिए।
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