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MP की वही जगह, 15 साल का गैप और राजधानी ट्रेनों में आग... रतलाम हादसे का Deja vu

MP की वही जगह, 15 साल का गैप और राजधानी ट्रेनों में आग... रतलाम हादसे का Deja vu

17 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में रतलाम के पास आग लग गई, जिसमें सभी 68 यात्री सुरक्षित रहे। ...और पढ़ें






17 मई की सुबह जब तिरुवनंतपुरम से दिल्ली जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस में आग लगी तो मध्य प्रदेश के रतलाम के लोगों ने शायद कहा होगा, "फिर से!" दरअसल, उनके पास ऐसा कहने की एक ठोस वजह भी थी।


18 अप्रैल, 2011 को भी रतलाम राजधानी एक्सप्रेस में लगी आग की वजह से सुर्खियों में था। वह ट्रेन मुंबई से दिल्ली की ओर जा रही थी। रात करीब 2 बजे पैंट्री कार में आग लग गई, जो फैलकर तीन और डिब्बों तक पहुंच गई।

आलोट और थुरिया स्टेशनों के बीच से गुजर रही थी ट्रेन

सभी 1,100 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उस समय राजधानी एक्सप्रेस रतलाम रेलवे मंडल के अंतर्गत आने वाले आलोट और थुरिया स्टेशनों के बीच थी। आलोट स्टेशन, जिसे आज विक्रमगढ़ आलोट के नाम से जाना जाता है वह मध्य प्रदेश के आलोट कस्बे को सेवा प्रदान करता है। यह रेलवे के नक्शे पर मौजूद उन छोटे-छोटे बिंदुओं में से एक है, जिनसे होकर यात्री दिल्ली-मुंबई मार्ग पर गुजरते हैं।

अब आते हैं ताजा घटना पर

अब 17 मई, 2026 की सुबह की बात करते हैं। सुबह करीब 5 बजे एक और राजधानी ट्रेन में आग लग गई। यह घटना रतलाम रेलवे डिवीजन के विक्रमगढ़ आलोट और लुनी रिछा स्टेशनों के बीच हुई। गनीमत रही कि 2011 की तरह इस आग से भी किसी की जान नहीं गई। सभी 68 यात्री सुरक्षित बाहर निकल गए। 2011 की तुलना में इस बार नुकसान सिर्फ एक ही डिब्बे तक सीमित रहा, जिसे तुरंत ही ट्रेन से अलग कर दिया गया।
राजधानी ट्रेनें कब-कब हुईं आग की घटनाओं की शिकार

राजधानी को कभी देश की सबसे बेहतरीन ट्रेनें माना जाता था वो पहले भी कई बार अलग-अलग जगहों पर आग की घटनाओं का शिकार हो चुकी हैं। 11 मई, 2019 को बालासोर के पास भुवनेश्वर जा रही एक राजधानी ट्रेन में आग लग गई थी।


22 अप्रैल, 2015 को दिल्ली के एक रेलवे यार्ड में दो राजधानी ट्रेनों एक भुवनेश्वर से और दूसरी सियालदह से, इनके छह खाली डिब्बों में आग लग गई थी। हालांकि, अब राजधानी नेटवर्क के नक्शे पर रतलाम की एक ऐसी दुर्लभ और अवांछित जगह बन गई है, जहां ट्रेनों में दो बार आग लगी। एक अच्छी बात यह है कि इसमें कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
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