रांची में करोड़ों की जमीन, गायब दस्तावेज: नामकुम अंचल में रडार पर पूर्व CO और राजस्व कर्मचार
रांची में करोड़ों की जमीन, गायब दस्तावेज: नामकुम अंचल में रडार पर पूर्व CO और राजस्व कर्मचारी
झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) नामकुम अंचल के टुंडुल में करोड़ों की जमीन के अवैध दाखिल-खारिज और दस्तावेज गायब करने के मा ...और पढ़ें

नामकुम अंचल जमीन घोटाले की जांच में तेजी।
हाई कोर्ट ने एसीबी को जांच का आदेश दिया।
पूर्व सीओ श्वेता वर्मा, कर्मचारी दीपक पर पीई।
करोड़ों की जमीन के दस्तावेज गायब करने का आरोप।
अब नामकुम अंचल के टुंडुल में भी अवैध तरीके से करोड़ों की जमीन के दस्तावेज में हेराफेरी, गलत तरीके से दाखिल खारिज करने तथा दस्तावेज गायब करने के मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) करेगी। झारखंड हाई कोर्ट ने पूरे मामले में सुनवाई के बाद एसीबी को जांच का आदेश दिया था।
एसीबी ने अदालत के आदेश के आलोक में इस मामले की जांच के लिए नामकुम के तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा व राजस्व कर्मचारी दीपक के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने के लिए मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से अनुमति मांगी है।
अनुमति मिलते ही पीई दर्ज कर एसीबी अपना अनुसंधान शुरू कर देगी। पीड़ित की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नामकुम अंचल कार्यालय से जब उसने अपनी जमीन संबंधित अभिप्रमाणित कापी की मांग की तो वहां के अधिकारी-कर्मी टालमटोल करते रहे।
अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए आशंका जताई है कि सरकारी दस्तावेज को जानबूझकर गायब किया गया है, ताकि बड़े घोटाले को छुपाया जा सके।पीई जांच के दौरान एसीबी आरोपित अधिकारियों-कर्मियों की चल-अचल संपत्ति, बैंकिंग लेन-देन से संबंधित ब्योरे आदि खंगाल सकती है।
जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि के बाद नियमित प्राथमिकी दर्ज के लिए एसीबी एक बार फिर मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से अनुमति मांगेगी और प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच करेगी।
ऐसे सामने आई नामकुम अंचल कार्यालय की मिलीभगत
शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में बताया है कि उसकी मां ने वर्ष 1978-79 में रजिस्ट्रेशन संख्या 23 आर में ग्राम डुंडू में 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। वर्षों तक शांतिपूर्वक खेती बारी होती रही।
मां की मृत्यु के बाद शिकायतकर्ता उक्त जमीन के उत्तराधिकारी बने। इसी बीच वर्ष 2016 में अचानक अंचल कार्यालय से दोहरी जमाबंदी का नोटिस मिलने पर उनके होश उड़ गए।
झारभूमि पोर्टल के जरिए पता चला कि उनकी जमीन के एक हिस्से (खाता संख्या 32, प्लॉट 776, 820, 821, 822) पर प्रकाश कामर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर जमाबंदी कर दी गई है। इसके लिए दाखिल खारिज केस नंबर 356आर27/2013-14 किया गया था।
जब शिकायतकर्ता ने उक्त दाखिल खारिज की अभिप्रमाणित कापी की मांग की तो अंचल कार्यालय ने दस्तावेज उपलब्ध कराने में टाल मटोल करना शुरू किया आँर अंतत: उपलब्ध नहीं करा सका। इस मामले में शिकायतकर्ता हाई कोर्ट पहुंचा और याचिका दाखिल कर दी।
जांच के दौरान पता चला कि अंचल कार्यालय नामकुम ने जानबूझकर दाखिल खारिज से संबंधित दस्तावेज को गायब किया है, ताकि जालसाजी पकड़ी न जा सके।
झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) नामकुम अंचल के टुंडुल में करोड़ों की जमीन के अवैध दाखिल-खारिज और दस्तावेज गायब करने के मा ...और पढ़ें

नामकुम अंचल जमीन घोटाले की जांच में तेजी।
हाई कोर्ट ने एसीबी को जांच का आदेश दिया।
पूर्व सीओ श्वेता वर्मा, कर्मचारी दीपक पर पीई।
करोड़ों की जमीन के दस्तावेज गायब करने का आरोप।
अब नामकुम अंचल के टुंडुल में भी अवैध तरीके से करोड़ों की जमीन के दस्तावेज में हेराफेरी, गलत तरीके से दाखिल खारिज करने तथा दस्तावेज गायब करने के मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) करेगी। झारखंड हाई कोर्ट ने पूरे मामले में सुनवाई के बाद एसीबी को जांच का आदेश दिया था।
एसीबी ने अदालत के आदेश के आलोक में इस मामले की जांच के लिए नामकुम के तत्कालीन सीओ श्वेता वर्मा व राजस्व कर्मचारी दीपक के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने के लिए मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से अनुमति मांगी है।
अनुमति मिलते ही पीई दर्ज कर एसीबी अपना अनुसंधान शुरू कर देगी। पीड़ित की याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नामकुम अंचल कार्यालय से जब उसने अपनी जमीन संबंधित अभिप्रमाणित कापी की मांग की तो वहां के अधिकारी-कर्मी टालमटोल करते रहे।
अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए आशंका जताई है कि सरकारी दस्तावेज को जानबूझकर गायब किया गया है, ताकि बड़े घोटाले को छुपाया जा सके।पीई जांच के दौरान एसीबी आरोपित अधिकारियों-कर्मियों की चल-अचल संपत्ति, बैंकिंग लेन-देन से संबंधित ब्योरे आदि खंगाल सकती है।
जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि के बाद नियमित प्राथमिकी दर्ज के लिए एसीबी एक बार फिर मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग से अनुमति मांगेगी और प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच करेगी।
ऐसे सामने आई नामकुम अंचल कार्यालय की मिलीभगत
शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में बताया है कि उसकी मां ने वर्ष 1978-79 में रजिस्ट्रेशन संख्या 23 आर में ग्राम डुंडू में 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। वर्षों तक शांतिपूर्वक खेती बारी होती रही।
मां की मृत्यु के बाद शिकायतकर्ता उक्त जमीन के उत्तराधिकारी बने। इसी बीच वर्ष 2016 में अचानक अंचल कार्यालय से दोहरी जमाबंदी का नोटिस मिलने पर उनके होश उड़ गए।
झारभूमि पोर्टल के जरिए पता चला कि उनकी जमीन के एक हिस्से (खाता संख्या 32, प्लॉट 776, 820, 821, 822) पर प्रकाश कामर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर जमाबंदी कर दी गई है। इसके लिए दाखिल खारिज केस नंबर 356आर27/2013-14 किया गया था।
जब शिकायतकर्ता ने उक्त दाखिल खारिज की अभिप्रमाणित कापी की मांग की तो अंचल कार्यालय ने दस्तावेज उपलब्ध कराने में टाल मटोल करना शुरू किया आँर अंतत: उपलब्ध नहीं करा सका। इस मामले में शिकायतकर्ता हाई कोर्ट पहुंचा और याचिका दाखिल कर दी।
जांच के दौरान पता चला कि अंचल कार्यालय नामकुम ने जानबूझकर दाखिल खारिज से संबंधित दस्तावेज को गायब किया है, ताकि जालसाजी पकड़ी न जा सके।
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