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BRICS सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री, 'Minab168' विमान के जरिए दुनिया को दिया खास संदेश

BRICS सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री, 'Minab168' विमान के जरिए दुनिया को दिया खास संदेश



ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक और द्विपक्षीय वार्ता के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमे ...और पढ़ें





 ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। दो महीने से अधिक समय पहले मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से यह तेहरान की ओर से पहला उच्च स्तरीय कूटनीतिक दौरा है। अराघची मुख्य रूप से ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने भारत आए हैं।


इसके अलावा, वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसका मुख्य फोकस ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच गहराते संकट पर होगा।
क्या है Minab168 का रहस्य

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर लिखा कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नई दिल्ली आगमन पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का हार्दिक स्वागत है।

ईरानी मंत्री Minab168 नामक एक विमान से भारत पहुंचे हैं। यह नाम उन 168 लड़कियों का प्रतीकात्मक संदर्भ है, जो युद्ध शुरू होने पर ईरान के मिनाब शहर के एक स्कूल में हुए मिसाइल हमले में मारी गई थीं।


अराघची के एजेंडे में क्या है?

होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद पैदा हुए हालात पर अराघची और जयशंकर के बीच द्विपक्षीय वार्ता में प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद है। यह वह महत्वपूर्ण जलमार्ग है जहां से शांति के समय वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है।

मामले से वाकिफ लोगों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि नई दिल्ली होर्मुज के रास्ते बचे हुए व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए दबाव डाल सकती है।

गुरुवार को अराघची और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। ब्रिक्स बैठक में मध्य पूर्व में बढ़ता संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर इसके प्रभाव का मुद्दा हावी रहने की उम्मीद है।


ईरान का रुख

ब्रिक्स बैठक के लिए नई दिल्ली में मौजूद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि ब्रिक्स जैसे तंत्र में ईरान की सक्रिय उपस्थिति वास्तविक बहुपक्षवाद को मजबूत करने, समान सहयोग का विस्तार करने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक अधिक न्यायपूर्ण व्यवस्था को आकार देने के लिए एक रणनीतिक विकल्प है।


उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक ग्लोबल साउथ के सहयोग के भविष्य, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक शासन में सुधार, स्वतंत्र व्यापार विकसित करने, वित्तीय और बैंकिंग संबंधों को मजबूत करने और भेदभावपूर्ण व एकतरफा तंत्र पर देशों की निर्भरता को कम करने पर बातचीत का एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है।


गरीबाबादी ने कहा कि ईरान अपने भू-राजनीतिक, ऊर्जा, ट्रांजिट, वैज्ञानिक और मानवीय क्षमताओं के साथ संतुलित विकास, आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और स्वतंत्र देशों की आवाज को बुलंद करने के लिए ब्रिक्स के एजेंडे में एक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।


उन्होंने आगे कहा, "इस रास्ते में, अमेरिका के एकतरफा दंडात्मक उपायों और उनके अवैध व विकास-विरोधी प्रभावों का विरोध करना, आर्थिक न्याय और विकास के प्रति राष्ट्रों के अधिकारों की रक्षा करने का एक अभिन्न अंग है।"
ब्रिक्स की सबसे बड़ी चुनौती

ब्रिक्स के अध्यक्ष के रूप में भारत सितंबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध को लेकर सदस्य देशों के बीच भारी मतभेदों के कारण पिछले महीने आम सहमति बनाने के भारत के प्रयास विफल रहे थे।


बता दें कि ब्रिक्स का 2024 में विस्तार हुआ था, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई (UAE) शामिल हुए, जिसमें मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2025 में इंडोनेशिया भी इसका हिस्सा बन गया।


मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच मतभेदों के कारण संघर्ष पर कोई आम सहमति नहीं बन सकी थी। दरअसल, हाल के हफ्तों में यूएई के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के कथित हमलों को लेकर दोनों पड़ोसी देशों के बीच विवाद हुआ है।
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