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रांची: ट्रेन में सिगरेट के लिए यात्रियों की जान से खिलवाड़, स्मोक डिटेक्टर पर च्युइंगम चिपका कर रहे ब्लॉक

रांची: ट्रेन में सिगरेट के लिए यात्रियों की जान से खिलवाड़, स्मोक डिटेक्टर पर च्युइंगम चिपका कर रहे ब्लॉक


यात्री ट्रेनों के एसी कोच में सिगरेट पीने के लिए स्मोक डिटेक्टरों को च्युइंगम और साबुन से ब्लॉक कर रहे हैं, जिससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ रही है ...और पढ़ें







एआई जेनरेटेड तस्वीर


ट्रेन के एसी कोच में सिगरेट के लिए डिटेक्टर ब्लॉक।


यात्री च्युइंगम और साबुन से सेंसर को कर रहे निष्क्रिय।


रांची रेल मंडल ने सुरक्षा निगरानी बढ़ाने का दिया निर्देश।


रांची। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में दो दिन पहले तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस के एक एसी कोच में आग लगने की घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि राहत की बात यह रही कि हादसे के 15 मिनट के भीतर सभी 68 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।


इस घटना के बाद रेलवे जहां एसी कोचों में लगे फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम को और प्रभावी बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर कुछ शरारती यात्री अपनी लापरवाही और नासमझी से यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

च्युइंगम और साबुन चिपकाने के मामले

रांची रेल मंडल से खुलने वाली कई ट्रेनों के एसी कोचों में फायर एंड स्मोक डिटेक्टर पर च्युइंगम और साबुन चिपकाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सबसे अधिक शिकायत हटिया-हावड़ा एक्सप्रेस और हटिया-इस्लामपुर एक्सप्रेस के कोचों से मिल रही है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार कुछ यात्री ट्रेन में चोरी-छिपे सिगरेट पीने के लिए ऐसा करते हैं, ताकि डिटेक्टर धुएं को पकड़ न सके और अलार्म सक्रिय न हो।
88 जोड़ी ट्रेनों का रांची रेल मंडल से होगा है परिचालन

रांची रेल मंडल अंतर्गत वर्तमान में 88 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन होता है, जबकि 28 ट्रेनों के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी रांची मंडल पर है। अधिकारियों के अनुसार अधिकतर मामलों का खुलासा तब होता है, जब ट्रेन यार्ड में मेंटेनेंस के लिए पहुंचती है।


जांच के दौरान सेंसर पर चिपका च्युइंगम या साबुन हटाया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर किसी अन्य कोच में वही हरकत सामने आ जाती है।
पहले एसी कोच उसके बाद स्लीपर कोच लगेगा डिवाइस

एसी कोचों में लगाया गया फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद स्लीपर कोच में इसकी व्यवस्था की जाएगी। चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों में इसकी व्यवस्था की जाती रही है। यह सिस्टम कोच के अंदर धुआं, आग या असामान्य गर्मी का शुरुआती स्तर पर पता लगाता है।


कोच की छत के पास लगाए गए सेंसर लगातार हवा की निगरानी करते रहते हैं। धुएं का संकेत मिलते ही अलार्म सक्रिय हो जाता है और ट्रेन स्टाफ को सूचना मिलती है। गंभीर स्थिति में ट्रेन को स्वतः रुक जाती है।
ऐसे काम करता है एफएसडीएस

भारतीय रेलवे के एफएसडीएस में सामान्यतः चार स्तर के अलार्म होते हैं अलर्ट, एक्शन, फायर-1 और फायर-2। यह डिवाइस गेट, शौचालय, पैंट्री कार और पावर कार के पास लगाए जाते हैं। इसके बावजूद कुछ यात्री सुरक्षा व्यवस्था को निष्क्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं।
यात्रियों को जागरूक करने के लिए लगाए गए हैं सूचना पट

ट्रेनों में आरपीएफ, टीटीई और हाउस आन बोर्डिंग स्टाफ की तैनाती रहती है, लेकिन शरारती यात्री मौका देखकर ऐसी हरकत कर देते हैं। यात्रियों को जागरूक करने के लिए ट्रेनों और स्टेशनों पर पोस्टर एवं सूचना पट लगाए गए हैं। आरपीएफ और रेलवे प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके बावजूद कुछ यात्री अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं।


हटिया-हावड़ा व हटिया इस्लामपुर एक्सप्रेस के एसी कोच में लगे एफएसडीएस के ऊपर कुछ यात्री सिगरेट पीने के चक्कर में च्युइंगम और साबुन लगा देते हैं।एक छोटी लापरवाही सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। इसे लेकर मानिटरिंग बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।- करुणा निधि सिंह, डीआरएम, रांची रेल मंडल
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