'अगर सड़क पर नमाज गलत तो सभी त्योहारों के जश्न पर भी लगाओ रोक', ओवैसी ने लगाया डबल स्टैंडर्ड का आरोप
'अगर सड़क पर नमाज गलत तो सभी त्योहारों के जश्न पर भी लगाओ रोक', ओवैसी ने लगाया डबल स्टैंडर्ड का आरोप
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और अन्य धार्मिक गतिविधियों पर 'दोहरे मापदंड' का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवैसी। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को कहा कि अगर सड़कों पर नमाज पढ़ना गलत है तो सभी धर्मों की धार्मिक गतिविधियों पर भी समान रूप से पाबंदियां लागू होनी चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया, जो धर्म की स्वतंत्रता और अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और उसे मानने के अधिकार की गारंटी देता है।
'ईद मिलाप' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने तर्क दिया कि नमाज पर लोगों की आपत्तियां एक 'दोहरे मापदंड' (double standard) को दर्शाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य समुदायों द्वारा आयोजित धार्मिक जुलूसों और सभाओं पर इसी तरह की चिंताएं क्यों नहीं उठाई जातीं?
'हर धर्म के त्योहार पर सड़क पर निकलना भी गलत'
ओवैसी ने कहा, "अनुच्छेद 25 याद रखें। अगर सड़क पर नमाज पढ़ना गलत है तो हर धर्म के त्योहार के मौके पर सड़क पर निकलना भी गलत है। अगर आप कहते हैं कि किसी के त्योहार के दौरान मांस की दुकानें बंद होनी चाहिए तो रमजान के 30 दिनों के लिए शराब की दुकानें भी बंद कर दें। 30 दिनों के लिए शराब की दुकानें बंद करें।"
'यह किस तरह का कानून है?'
दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए ओवैसी ने कहा कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर कोई आपत्ति नहीं होती लेकिन वे अजान और नमाज पर आपत्ति जताते हैं। उन्होंने हिंदू त्योहारों के दौरान अंडे, मांस और चिकन की बिक्री पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा, "यह किस तरह का कानून है?"
उन्होंने कहा, "आपकी नफरत सिर्फ मुसलमानों के लिए है। और आपकी नफरत साफ दिखाती है कि आप इस धर्म को मानने वालों को दबाना और उन्हें हाशिए पर धकेलना चाहते हैं। आप उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाना चाहते हैं।"
'आखिर आप लोगों को हो क्या गया है?'
एआईएमआईएम अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब भी रमजान या बकरीद जैसे बड़े मुस्लिम त्योहार नजदीक आते हैं तो अजान और नमाज से जुड़े मुद्दे जान-बूझकर उठाए जाते हैं। उन्होंने पूछा, "अजान से दिक्कत, नमाज से दिक्कत। आखिर आप लोगों को हो क्या गया है?"
ओवैसी की ये टिप्पणी सार्वजनिक जगहों पर प्रार्थनाओं को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और कई राज्यों के अधिकारियों के हालिया निर्देशों के बीच आई है। इन निर्देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक सभाओं से ट्रैफिक या लोगों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए।
ओवैसी ने धार्मिक यात्राओं और जुलूसों से तुलना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों के दौरान अक्सर सड़कों पर कब्जा कर लिया जाता है, जबकि इस पर वैसी आपत्ति नहीं होती। सड़कों पर नमाज पढ़े जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ शुक्रवार की नमाज या ईद के लिए होता है, हर दिन नहीं।
उन्होंने कहा, "भारत में हर धर्म के त्योहार सड़कों पर ही मनाए जाते हैं, है ना? आप उन्हें नहीं देखते आप उनके प्रति आंखें मूंद लेते हैं।"
क्या है मामला?
हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नमाज एक तय तरीके से पढ़ी जानी चाहिए और अगर जरूरत हो तो लोगों को होने वाली परेशानी से बचने के लिए इसे कई शिफ्टों में किया जा सकता है।
वहीं, सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के रेड रोड पर पारंपरिक ईद की जमात की इजाजत न देने का फैसला किया और प्रार्थनाओं को सार्वजनिक सड़कों पर फैलने से रोकने के लिए जमात को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट कर दिया।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और अन्य धार्मिक गतिविधियों पर 'दोहरे मापदंड' का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवैसी। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को कहा कि अगर सड़कों पर नमाज पढ़ना गलत है तो सभी धर्मों की धार्मिक गतिविधियों पर भी समान रूप से पाबंदियां लागू होनी चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया, जो धर्म की स्वतंत्रता और अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और उसे मानने के अधिकार की गारंटी देता है।
'ईद मिलाप' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने तर्क दिया कि नमाज पर लोगों की आपत्तियां एक 'दोहरे मापदंड' (double standard) को दर्शाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य समुदायों द्वारा आयोजित धार्मिक जुलूसों और सभाओं पर इसी तरह की चिंताएं क्यों नहीं उठाई जातीं?
'हर धर्म के त्योहार पर सड़क पर निकलना भी गलत'
ओवैसी ने कहा, "अनुच्छेद 25 याद रखें। अगर सड़क पर नमाज पढ़ना गलत है तो हर धर्म के त्योहार के मौके पर सड़क पर निकलना भी गलत है। अगर आप कहते हैं कि किसी के त्योहार के दौरान मांस की दुकानें बंद होनी चाहिए तो रमजान के 30 दिनों के लिए शराब की दुकानें भी बंद कर दें। 30 दिनों के लिए शराब की दुकानें बंद करें।"
'यह किस तरह का कानून है?'
दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए ओवैसी ने कहा कि लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों पर कोई आपत्ति नहीं होती लेकिन वे अजान और नमाज पर आपत्ति जताते हैं। उन्होंने हिंदू त्योहारों के दौरान अंडे, मांस और चिकन की बिक्री पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा, "यह किस तरह का कानून है?"
उन्होंने कहा, "आपकी नफरत सिर्फ मुसलमानों के लिए है। और आपकी नफरत साफ दिखाती है कि आप इस धर्म को मानने वालों को दबाना और उन्हें हाशिए पर धकेलना चाहते हैं। आप उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाना चाहते हैं।"
'आखिर आप लोगों को हो क्या गया है?'
एआईएमआईएम अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब भी रमजान या बकरीद जैसे बड़े मुस्लिम त्योहार नजदीक आते हैं तो अजान और नमाज से जुड़े मुद्दे जान-बूझकर उठाए जाते हैं। उन्होंने पूछा, "अजान से दिक्कत, नमाज से दिक्कत। आखिर आप लोगों को हो क्या गया है?"
ओवैसी की ये टिप्पणी सार्वजनिक जगहों पर प्रार्थनाओं को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और कई राज्यों के अधिकारियों के हालिया निर्देशों के बीच आई है। इन निर्देशों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक सभाओं से ट्रैफिक या लोगों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए।
ओवैसी ने धार्मिक यात्राओं और जुलूसों से तुलना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों के दौरान अक्सर सड़कों पर कब्जा कर लिया जाता है, जबकि इस पर वैसी आपत्ति नहीं होती। सड़कों पर नमाज पढ़े जाने पर उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ शुक्रवार की नमाज या ईद के लिए होता है, हर दिन नहीं।
उन्होंने कहा, "भारत में हर धर्म के त्योहार सड़कों पर ही मनाए जाते हैं, है ना? आप उन्हें नहीं देखते आप उनके प्रति आंखें मूंद लेते हैं।"
क्या है मामला?
हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नमाज एक तय तरीके से पढ़ी जानी चाहिए और अगर जरूरत हो तो लोगों को होने वाली परेशानी से बचने के लिए इसे कई शिफ्टों में किया जा सकता है।
वहीं, सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के रेड रोड पर पारंपरिक ईद की जमात की इजाजत न देने का फैसला किया और प्रार्थनाओं को सार्वजनिक सड़कों पर फैलने से रोकने के लिए जमात को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शिफ्ट कर दिया।
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