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AC में आग लगने से पहले मिलते हैं ये संकेत, समय रहते हो जाएं सतर्क; ऐसे रहें सुरक्षित

AC में आग लगने से पहले मिलते हैं ये संकेत, समय रहते हो जाएं सतर्क; ऐसे रहें सुरक्षित


गर्मी बढ़ने के साथ ही एसी में आग लगने की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। उचित देखभाल नहीं होने, इलेक्ट्रिकल खामियों, अत्यधिक प्रयोग, ओवरहीटिंग और पावर सप ...और पढ़ें






AC में आग लगने से पहले मिलते हैं ये संकेत, समय रहते हो जाएं सतर्क; ऐसे रहें सुरक्षित


 दिल्ली के विवेक विहार और फिर ग्रेटर नोएडा में एसी से आग लगने की घटना बीते दिनों चर्चा में रही। ऐसे में सवाल उठता है कि घरों में लगे उपकरण कैसे और किन किन कारणों से खतरनाक रूप ले लेते हैं, क्या है इन रखरखाव का सही तरीका, ताकि ऐसी दुर्घटनाएं न हों। आने वाले दिनों में तापमान बढ़ेगा, गर्मी और लू के चलते ऐसे उपकरणों के प्रयोग और बिजली की खपत में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होगी।


निस्संदेह तेज गर्मी में सबसे सुरक्षित जगह एसी युक्त कमरा ही है लेकिन यह तभी तक सुरक्षित है जब तक आप उसे सही ढंग से मेंटेन करते हैं। घरेलू उपकरणों के साथ थोड़ी सी भी लापरवाही बड़े हादसे का रूप से ले सकती है।

दिल्ली में एसी में शार्ट सर्किट होने के चलते आग लगी थी, जिससे नौ लोगों की मौत हो गई। हर साल, एसी यूनिट्स में आग लगने या उसके फटने की खबरें आती हैं। थोड़ी सी भी सतर्कता बरती जाए तो इन्हें आसानी से टाला जा सकता है। ज्यादातर मामलों में तकनीकी कारण ही जिम्मेदार होते हैं। खास बात है कि ये घटनाएं अचानक नहीं होतीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या के कारण अचानक दुर्घटना का रूप लेती हैं।

AC खराब होने के संकेत

बिजली से जुड़ीं समस्याएं : तारों के घिस जाने, कनेक्शन ढीले होने या बिजली के पुराने पुर्जों के कारण एसी ट्रिप करने लगता है। इन समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करने के कारण लोड बढ़ता है और वोल्टेज में उतार चढ़ाव होने पर चिंगारी निकलती है।


ओवरहीटिंग : एसी को आप लगातार कई घंटे तक चला सकते हैं, लेकिन इसका मतलब अनियंत्रित प्रयोग नहीं होता। बिना ब्रेक लिए लगातार एसी चलाने पर कंप्रेसर और अंदरूनी वायरिंग पर दबाव बढ़ता है। इन्हीं कारणों से एसी के फटने की जैसी दुर्घटनाएं होती हैं।




कंडेंसर काइल और फिल्टर : अगर आप धूल धुएं वाले इलाके में रहते हैं तो एसी के काइल और फिल्टर में बार बार धूल जमा होने की समस्या हो सकती है। फिल्टर के अवरुद्ध होने पर गर्मी और हवा के बहाव में रुकावट आती है। इससे एसी यूनिट पर दबाव बढ़ता है, जिससे वह गर्म हो जाता है और हादसे का कारण बन सकता है।


गैस का लीक होना : अगर एसी पर्याप्त ठंडा नहीं कर पा रहा है तो संभव है कि रेफ्रिजरेंट में लीकेज की समस्या आ रही हो। गैस के लीकेज होने के कारण कंप्रेसर का तापमान बहुत अधिक हो सकता है। एसी की गैस में थोड़ी सी चिंगारी लगी तो वह भयंकर आग का रूप ले सकती है।


पर्याप्त मरम्मत नहीं होना : एसी में कोई भी समस्या आए तो उसकी मरम्मत हमेशा प्रशिक्षित तकनीशियन से ही करानी चाहिए। इसी तरह एसी के अंदरूनी पुर्जे की क्वालिटी अगर ठीक नहीं होगी, तो उससे भी एसी का दबाव बढ़ेगा या उसके फटने की आशंका अधिक रहेगी।
आग लगने के क्या है चेतावनी संकेत?

एसी से गर्म हवा : अगर एसी से गर्म हवा आ रही है तो इसका मतलब है कि मशीन गर्म हो गई है या फिर उसमें कोई गंभीर तकनीकी समस्या आ रही है।


स्पार्क : अगर एसी आन करने पर स्पार्क या लाइट फ्लिकरिंग होती है तो यह शार्ट सर्किट या वायरिंग की समस्या के कारण हो सकती है।

जलने की गंध : अगर एसी या आसपास जलने की गंध आ रही है तो यह ओवरहीटिंग या तकनीकी खराबी के कारण हो सकता है।

असामान्य आवाज : आन करने पर एसी से अलग-अलग तरह की आवाज आना इलेक्ट्रिक या मशीन की खराबी का संकेत है।

धुआं निकलना : एसी से धुआं निकलना सबसे गंभीर चेतावनी है। ऐसी स्थिति में एसी को तुरंत बंद कर देना चाहिए और फिर तकनीशियन को दिखाना चाहिए।

आन-आफ होना : अगर एसी बार आन या आफ हो रहा है तो यह ओवरहीटिंग या फंक्शनिंग में आ रही खराबी के कारण हो सकता है।
AC में खराबी होने पर क्या करें?सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता में रखें।
खराबी के किसी भी संकेत को नजरअंदाज न करें।
एसी को तुरंत बंद कर दें और उसे अनप्लग करें।
दोबारा प्रयोग करने से पहले तकनीशियन से जांच अवश्य कराएं।

खतरों से बचने के जरूरी उपाय

फिल्टर को साफ रखें : एसी के एयर फिल्टर को हमेशा साफ रखना चाहिए। इससे न केवल कूलिंग पर असर पड़ता है, बल्कि एसी के अधिक गर्म होने का खतरा भी बढ़ जाता है।


वेंटिलेशन का ध्यान : यह सुनिश्चित करें कि एसी की आउटडोर यूनिट में हवा आने-जाने की सही व्यवस्था हो। इसे खुली जगह पर लगाएं, जहां से गर्मी आसानी से बाहर निकल सके।

सर्विसिंग कराएं : सुरक्षित रहने का सबसे आसान और असरदार तरीका है नियमित सर्विसिंग। गर्मी से पहले और गर्मियों के दौरान अच्छे प्रोफेशनल से गैस लीक, खराब पुर्जों या खराब वायरिंग जैसी समस्याओं की जांच कराना और उसे ठीक कराना आवश्यक है।


वोल्टेज स्टेबलाइजर : यह बिजली की सप्लाई को कंट्रोल करने में मदद करता है और एसी को अचानक वोल्टेज में होने वाले बदलावों से बचाता है।

नान स्टाप प्रयोग से बचें : एसी को लगातार चलाने के बजाय हर कुछ घंटों में थोड़ी देर के लिए बंद कर दें या टाइमर का इस्तेमाल करें। इससे एसी की लाइफ भी बढ़ती है।
क्या है एसी के प्रयोग का सही तरीकाहर 2-3 हफ्ते में एसी के फिल्टर को साफ करते रहें।
एसी को बहुत कम तापमान (जैसे 16–18 डिग्री सेल्सियस) चलाने के बजाय 24-26 डिग्री सेल्सियस पर रखें। इससे ऊर्जा की भी बचत होगी।
कमरे को अच्छी तरह सील रखें। अगर ठंडी हवा बाहर निकलती रहेगी, तो एयर कंडीशनर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी।
आउटडोर यूनिट को धूल और धूप से बचाएं, क्योंकि यह पूरे सिस्टम का अहम हिस्सा होता है।

एक अच्छी तरह मेंटेन किया गया एयर कंडीशनर 10 से 15 साल तक चलता है। जैसे-जैसे मशीन पुरानी होती जाती है, उसकी एफिशिएंसी कम होती जाती है और खराब होने की आंशका बढ़ जाती है। अगर समस्याएं दिखने लगें, तो नया एयर कंडीशनर लेने पर विचार करना चाहिए।
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