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यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस की जेलों में कैदियों की संख्या 40% घटी, जेल प्रमुख ने मानी सेना में भर्ती की बात

यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस की जेलों में कैदियों की संख्या 40% घटी, जेल प्रमुख ने मानी सेना में भर्ती की बात


रूस में पिछले पांच वर्षों में कैदियों की संख्या में 40% की भारी गिरावट आई है, जिसे जेल प्रमुख अर्काडी गोस्तेव ने यूक्रेन युद्ध के लिए कैदियों की भर्ती ...और पढ़ें





रूस की जेलों में कैदियों की संख्या में भारी गिरावट (फाइल फोट)

 रूस में पिछले पांच वर्षों के भीतर कैदियों की संख्या में 40% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। रूस के जेल प्रमुख अर्काडी गोस्तेव ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि कैदियों की संख्या में भारी कमी के पीछे यूक्रेन युद्ध है, जिसके कारण कैदियों को सेना में भर्ती किया गया है।


दरअसल, रूस की जेलों में बंद कैदियों की संख्या । साल 2021 के अंत में कैदियों की संख्या 4,65,000 थी, वहीं अब वह घटकर 2,82,000 रह गई है, जो करीब 40 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। वर्तमान में जेल में बंद लगभग 85,000 कैदी विचाराधीन हिरासत में हैं।


कैदियों क संख्या में गिरावट की वजह

रूस की जेल सेवा के प्रमुख अर्काडी गोस्तेव ने गुरुवार को कहा, "रूस में कैदियों की संख्या में पिछले पांच वर्षों में 1,80,000 से अधिक की गिरावट आई है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि मॉस्को ने दोषियों को यूक्रेन में लड़ने के लिए भेजा था। चार वर्षों के युद्ध में रूस ने कैदियों को यूक्रेन में लड़ने के लिए सेना में भर्ती होने का ठेका दिया है और अगर वे जीवित बच जाते हैं तो उनकी सजा माफ करने का वादा भी किया है।"

सेना के काम में लगे कैदी

जेल प्रमुख गोस्तेव के अनुसार, साल 2026 तक लगभग 16,000 कैदी सैन्य विनिर्माण (जंग से जुड़े सामानों को बनाने) के काम में लगे हुए हैं। ये कैदी रूसी सेना के लिए हर साल करीब 5.5 अरब रूबल (लगभग 65 मिलियन यूरो) के सामान का उत्पादन कर रहे हैं। गोस्तेव ने कहा कि कैदियों की संख्या में यह कमी आंशिक रूप से सेना के भर्ती अभियान के कारण है, लेकिन साथ ही साथ कई सजा से बरी भी हुए हैं।
कौन से कैदी हो सकते सेना में शामिल?

2022 से, रूस में दोषी ठहराए गए लोग समय से पहले रिहाई के बदले यूक्रेन में लड़ने के लिए सैन्य अनुबंध पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। भर्ती की यह रणनीति सबसे पहले वैगनर ग्रुप नामक अर्धसैनिक संगठन द्वारा अपनाई गई थी, जिसे बाद में 2023 से रूसी सशस्त्र बलों ने भी अपना लिया।


कैदियों को स्टॉर्म जेड इकाइयों में लड़ने के लिए भेजने से पहले आमतौर पर न्यूनतम प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद उन्हें मोर्चे के सबसे खुले हिस्सों में तैनात किया जाता है और सबसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
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