ज्यादातर लोग नहीं जानते पहली रिकॉर्डिंग का अनोखा सच: 150 साल तक खामोश रही दुनिया की पहली आवाज
ज्यादातर लोग नहीं जानते पहली रिकॉर्डिंग का अनोखा सच: 150 साल तक खामोश रही दुनिया की पहली आवाज
डिजिटल युग में ऑडियो रिकॉर्डिंग आसान है, लेकिन पहली इंसानी आवाज की रिकॉर्डिंग 1860 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक एडवर्ड-लिऑन स्कॉट डी मार्टिनविल ने की थी। उ ...और पढ़ें

ज्यादातर लोग नहीं जानते पहली रिकॉर्डिंग का अनोखा सच: 150 साल तक खामोश रही दुनिया की पहली आवाज
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। आज जहां डिजिटल दौर में हम एक क्लिक में ऑडियो रिकॉर्डिंग कर लेते हैं, उसकी शुरुआत करीब डेढ़ सदी पहले हुई थी। आज भी ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि इंसानी आवाज की पहली रिकॉर्डिंग 19वीं सदी में ही हो गई थी, लेकिन उस वक्त इसे सुना नहीं जा सकता था। 150 साल तक दुनिया की पहली आवाज खामोश रही थी।
फ्रांसीसी साइंटिस्ट ने किया था पहला एक्सपेरिमेंट
जानकारी के मुताबिक फ्रांस के आविष्कारक एडवर्ड-लिऑन स्कॉट डी मार्टिनविल ने दुनिया में पहली बार आवाज रिकॉर्ड करने की टेक्नोलॉजी तैयार की थी। उन्होंने फोनोटोग्राफ नाम का एक डिवाइस बनाया था। इसे साउंड को रिकॉर्ड करने वाली पहली मशीन माना जाता है।
कब रिकॉर्ड हुई पहली आवाज?
9 अप्रैल 1860 को स्कॉट ने अपने इसी डिवाइस से 'Au Clair de la Lune' नाम के फ्रेंच सॉन्ग को रिकॉर्ड किया। ये इतिहास की पहली ऐसी रिकॉर्डिंग मानी जाती है, जिसमें इंसानी आवाज कैद हुई थी।

दिलचस्प बात ये है कि फोनोटोग्राफ सिर्फ आवाज की वेव्स को कागज या ग्लास पर लाइन के रूप में रिकॉर्ड करता था। उस वक्त इसे सुनने की कोई टेक्नोलॉजी नहीं थी, इसलिए ये रिकॉर्डिंग सिर्फ देखने और अध्ययन करने के ही काम आती थी।
एडिसन ने बदल दी तस्वीर
इसके बाद करीब 17 साल बाद 1877 में थॉमस एडिसन ने फोनोग्राफ का इन्वेंशन किया, जो न सिर्फ आवाज को रिकॉर्ड कर सकता था बल्कि इसके साथ-साथ उसे दोबारा भी सुना सकता था। इसी के बाद ऑडियो रिकॉर्डिंग टेक्नोलॉजी में असली क्रांति देखने को मिली।
150 साल बाद सुनी गई आवाज
आपको जानकर हैरानी होगी कि स्कॉट ने जो 1860 में रिकॉर्डिंग की थी उसे 2008 में मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मदद से डिजिटल रूप में बदला गया। इसके बाद दुनिया ने पहली बार करीब 150 साल पुरानी उस आवाज को सुना जिसे कभी सिर्फ कागज पर देखा गया था।
डिजिटल युग में ऑडियो रिकॉर्डिंग आसान है, लेकिन पहली इंसानी आवाज की रिकॉर्डिंग 1860 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक एडवर्ड-लिऑन स्कॉट डी मार्टिनविल ने की थी। उ ...और पढ़ें

ज्यादातर लोग नहीं जानते पहली रिकॉर्डिंग का अनोखा सच: 150 साल तक खामोश रही दुनिया की पहली आवाज
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। आज जहां डिजिटल दौर में हम एक क्लिक में ऑडियो रिकॉर्डिंग कर लेते हैं, उसकी शुरुआत करीब डेढ़ सदी पहले हुई थी। आज भी ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि इंसानी आवाज की पहली रिकॉर्डिंग 19वीं सदी में ही हो गई थी, लेकिन उस वक्त इसे सुना नहीं जा सकता था। 150 साल तक दुनिया की पहली आवाज खामोश रही थी।
फ्रांसीसी साइंटिस्ट ने किया था पहला एक्सपेरिमेंट
जानकारी के मुताबिक फ्रांस के आविष्कारक एडवर्ड-लिऑन स्कॉट डी मार्टिनविल ने दुनिया में पहली बार आवाज रिकॉर्ड करने की टेक्नोलॉजी तैयार की थी। उन्होंने फोनोटोग्राफ नाम का एक डिवाइस बनाया था। इसे साउंड को रिकॉर्ड करने वाली पहली मशीन माना जाता है।
कब रिकॉर्ड हुई पहली आवाज?
9 अप्रैल 1860 को स्कॉट ने अपने इसी डिवाइस से 'Au Clair de la Lune' नाम के फ्रेंच सॉन्ग को रिकॉर्ड किया। ये इतिहास की पहली ऐसी रिकॉर्डिंग मानी जाती है, जिसमें इंसानी आवाज कैद हुई थी।

दिलचस्प बात ये है कि फोनोटोग्राफ सिर्फ आवाज की वेव्स को कागज या ग्लास पर लाइन के रूप में रिकॉर्ड करता था। उस वक्त इसे सुनने की कोई टेक्नोलॉजी नहीं थी, इसलिए ये रिकॉर्डिंग सिर्फ देखने और अध्ययन करने के ही काम आती थी।
एडिसन ने बदल दी तस्वीर
इसके बाद करीब 17 साल बाद 1877 में थॉमस एडिसन ने फोनोग्राफ का इन्वेंशन किया, जो न सिर्फ आवाज को रिकॉर्ड कर सकता था बल्कि इसके साथ-साथ उसे दोबारा भी सुना सकता था। इसी के बाद ऑडियो रिकॉर्डिंग टेक्नोलॉजी में असली क्रांति देखने को मिली।
150 साल बाद सुनी गई आवाज
आपको जानकर हैरानी होगी कि स्कॉट ने जो 1860 में रिकॉर्डिंग की थी उसे 2008 में मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मदद से डिजिटल रूप में बदला गया। इसके बाद दुनिया ने पहली बार करीब 150 साल पुरानी उस आवाज को सुना जिसे कभी सिर्फ कागज पर देखा गया था।
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