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शेख हसीना, खालिदा जिया के बिना बांग्लादेश की राजनीति में सूनापन, इस बार आम चुनाव में क्या-क्या बदला?

शेख हसीना, खालिदा जिया के बिना बांग्लादेश की राजनीति में सूनापन, इस बार आम चुनाव में क्या-क्या बदला?


बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव हो रहे हैं, जो दशकों बाद शेख हसीना और खालिदा जिया के बिना आयोजित किए जा रहे हैं। हसीना को अपदस्थ किया गया था, ...और पढ़ें





दशकों बाद हसीना और खालिदा जिया के बिना चुनाव।


अवामी लीग प्रतिबंधित, तारिक रहमान पीएम पद के दावेदार।


मतदाता राष्ट्रीय चार्टर पर जनमत संग्रह में भी वोट देंगे।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश में आज यानी 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। ये चुनाव शेख हसीना के अपदस्थ किए जाने के करीब 1.5 साल बाद हो रहे हैं। दशकों बाद देश में पहली बार शेख हसीना और खालिदा जिया जैसी राजनीतिक हस्तियों के बिना ये चुनाव कराया जा रहा है।


खालिदा जिया की मौत दिसंबर 2025 में हो गई है। वहीं खालिदा जिया प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ किए जाने के बाद भारत में रह रहीं हैं।
299 संसदीय सीटों पर होगा चुनाव

बांग्लादेशी वोटर जतीया संसद की 299 सीटों के लिए वोट डालेंगे। यानी किसी पार्टी को लिए बहुमत का आंकड़ा 150 होगा। वहीं एक कैंडिडेट की मौत के बाद शेरपुर-3 चुनाव क्षेत्र में वोटिंग कैंसिल कर दी गई है। कुल 12.77 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम से वोट डालेंगे।

वोटिंग लोकल टाइम के हिसाब से सुबह 7.30 बजे (IST सुबह 7 बजे) शुरू होगी और शाम तक नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। गौरतलब है कि जातीय संसद में और 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं और इन सदस्यों को MPs प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन के जरिए सिंगल ट्रांसफरेबल वोट से चुनते हैं।




इस तरह, ये चुनाव दशकों में देश के दो सबसे अहम राजनीतिक लोगों के बिना होने वाले पहले चुनाव होंगे। बांग्लादेश के लोग पूरी तरह से बदले हुए राजनीतिक माहौल में अपना वोट देंगे। ऐसे वक्त में खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान राजनीतिक खालीपन को भर रहे हैं।


तारिक रहमान दिसंबर में लगभग 17 साल के देश निकाला के बाद बांग्लादेश वापस लौटे हैं और अपनी मां, BNP और खुद को मिले समर्थन से प्रधानमंत्री पद की रेस में सबसे आगे निकल गए हैं।


अवामी लीग चुनाव में बैन

अगस्त 2024 में छात्र हिंसा के दौरान कार्रवाई को लेकर शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव में बैन कर दिया गया है। यानी अंतरिम सरकार का समर्थन हासिल कर बीएनपी सबसे चर्चित नजर आती है। वहीं मुख्य चुनौती जमात-ए-इस्लामी होगी। जमात कई सालों तक BNP के साथ थी, अब अपना गठबंधन चला रही है और उसे नेशनल सिटिजन पार्टी का सपोर्ट है। ये हसीना विरोधी प्रोटेस्ट से बनी एक स्टूडेंट और Gen-Z पार्टी है।


अगली सरकार चुनने के अलावा, मतदाता जुलाई के नेशनल चार्टर पर एक रेफरेंडम में भी वोट करेंगे। इस पर मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और कई राजनीतिक पार्टियों ने सहमति जताई है। चार्टर के पॉइंट्स में प्रधानमंत्री को दो टर्म (10 साल) तक लिमिट करना, पार्लियामेंट का अपर हाउस बनाना और केयरटेकर सिस्टम को फिर से शुरू करना शामिल है।
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