एक बार फिर चर्चा में 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद, अमेरिका ने क्यों रद्द किया याचिका समझौता
एक बार फिर चर्चा में 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद, अमेरिका ने क्यों रद्द किया याचिका समझौता
11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोपी तीन लोगों ने मुकदमा-पूर्व समझौता कर लिया है। खालिद शेख मोहम्मद वालिद मुहम्मद सालेह मुबारक बिन अताश और मुस्तफा अहमद आदम अल-हौसावी को क्यूबा के ग्वांतानामो बे स्थित अमेरिकी नौसेना बेस में कई वर्षों तक बिना किसी मुकदमे के रखा गया है। बदले में अभियोजन पक्ष मृत्युदंड की मांग न करने पर सहमत हो गया है।

11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोपी तीन लोगों ने मुकदमा-पूर्व समझौता कर लिया है। खालिद शेख मोहम्मद वालिद मुहम्मद सालेह मुबारक बिन अताश और मुस्तफा अहमद आदम अल-हौसावी को क्यूबा के ग्वांतानामो बे स्थित अमेरिकी नौसेना बेस में कई वर्षों तक बिना किसी मुकदमे के रखा गया है। बदले में अभियोजन पक्ष मृत्युदंड की मांग न करने पर सहमत हो गया है।

वाशिंगटन।Khalid Sheikh Mohammed: अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने शुक्रवार को 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद के साथ एक याचिका समझौते को रद्द कर दिया है। यह घटना उस समझौते की घोषणा के दो दिन बाद हुई है, जिसके तहत कथित तौर पर खालिद के मृत्युदंड को समाप्त कर दिया गया है।
बुधवार को मोहम्मद और उनके दो कथित सहयोगियों के साथ हुए इस समझौतें से 11 सितम्बर 2001 को मारे गए लोगों के कुछ रिश्तेदारों में गुस्सा भड़क गया। बता दें कि इस समय खालिद को क्यूबा के ग्वांतानामो बे सैन्य अड्डे पर नजरबंद कर रखा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस सप्ताह एक रिपोर्ट में जानकारी दी थी कि मोहम्मद, वालिद बिन अताश और मुस्तफा अल-हौसावी ने आजीवन कारावास की सजा के बदले में षडयंत्र के लिए दोषी होने की दलील देने पर सहमति व्यक्त की थी, बजाय इसके कि उन पर मुकदमा चलाया जाए, जिसके कारण उन्हें मृत्युदंड की भी सजा हो सकती थी।
इन लोगों के मामलों से संबंधित अधिकांश कानूनी बहस इस बात पर केंद्रित रही है कि क्या 9/11 के बाद के वर्षों में सीआईए के हाथों व्यवस्थित यातनाएं झेलने के बाद उन पर निष्पक्ष मुकदमा चलाया जा सकता है।
बुधवार को मोहम्मद और उनके दो कथित सहयोगियों के साथ हुए इस समझौतें से 11 सितम्बर 2001 को मारे गए लोगों के कुछ रिश्तेदारों में गुस्सा भड़क गया। बता दें कि इस समय खालिद को क्यूबा के ग्वांतानामो बे सैन्य अड्डे पर नजरबंद कर रखा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस सप्ताह एक रिपोर्ट में जानकारी दी थी कि मोहम्मद, वालिद बिन अताश और मुस्तफा अल-हौसावी ने आजीवन कारावास की सजा के बदले में षडयंत्र के लिए दोषी होने की दलील देने पर सहमति व्यक्त की थी, बजाय इसके कि उन पर मुकदमा चलाया जाए, जिसके कारण उन्हें मृत्युदंड की भी सजा हो सकती थी।
इन लोगों के मामलों से संबंधित अधिकांश कानूनी बहस इस बात पर केंद्रित रही है कि क्या 9/11 के बाद के वर्षों में सीआईए के हाथों व्यवस्थित यातनाएं झेलने के बाद उन पर निष्पक्ष मुकदमा चलाया जा सकता है।
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