फ्लाईओवर : जहां हादसे में गई 40 की जान, वहां ट्रैफिक इंजीनियरिंग, चार स्पॉट पर हो रहा निर्माण
फ्लाईओवर : जहां हादसे में गई 40 की जान, वहां ट्रैफिक इंजीनियरिंग, चार स्पॉट पर हो रहा निर्माण
ब्लैक स्पॉट को चिह्नित कर निर्माण काम शुरू कर दिया गया। जोरा में हाईवे के दोनों तरफ सर्विस रोड निर्माण के साथ सुंदर नगर टोल प्लाजा में डिवाइडर लगाया जा रहा है ।

रायपुर। शहर और आसपास ब्लैक स्पॉट में बड़े-बड़े हादसों के बाद चार जगहों पर ट्रैफिक आसान करने और हादसा रोकने के लिए निर्माण काम शुरू कर दिया गया है। मंदिर हसौद के साथ पूर्व में बनाए गए सुंदरनगर टोल प्लाजा सहित जोरा-अग्रसेन धाम मार्ग के साथ टाटीबंध- सिलतरा स्थित ब्लैक स्पॉट को ठीक करने का काम किया जा रहा है जिन ब्लैक स्पॉट को सुधार किया जा रहा है, उन चिन्हांकित स्थानों में पिछले तीन सालों में रोड एक्सीडेंट में 40 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। ये सभी नेशनल हाईवे अथारिटी के मार्ग हैं।
गौरतलब है कि राज्य के स्टेट और नेशनल हाईवे में 118 ब्लैक स्पॉट चिन्हांकित किए गए हैं, जहां सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ब्लैक स्पॉट को ठीक करने पुलिस विभाग के साथ संबंधित एजेंसी समय-समय पर बैठक आयोजित कर उपाय सोचती है। रायपुर जिले में ब्लैक स्पॉट को सुधारने तीन माह पूर्व ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन के अफसरों के साथ एनएचएआई तथा पीडब्लूडी के अफसर संबंधित ब्लैक स्पॉट पहुंचे और उसे कैसे सुधारा जाए, इस पर मंथन करने के साथ पहल की। इसी कड़ी में चार ब्लैक स्पॉट को सुधारने का काम किया जा रहा है।
मंदिर हसौद में फ्लाईओवर का निर्माण शुरू
नेशनल हाईवे से सटे मंदिर हसौद चौक को भी ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हांकित किया गया है। इस चौक पर सिग्नल ग्रीन होने के साथ रेड होने के दरमियान आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई ने मंदिर हसौद चौक के पास फ्लाईओवर निर्माण करने का काम शुरू किया है। फ्लाईओवर कंपलीट होने में दो वर्ष का समय लग सकता है, इसके बाद लोगों को सड़क दुर्घटना से राहच मिलेगी।
सर्विस रोड बनने से एक्सीडेंट पर लगाम
शहर से सटे जोरा-अग्रसेन धाम मार्ग स्थित कृषक कालोनी के पास सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। जोरा से कृषक नगर जाने के मार्ग पर सर्विस रोड नहीं होने साथ मार्ग विभाजक नहीं है। इसके कारण लोग रांग साइड वाहन चलाते हैं। इससे इस मार्ग पर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पिछले तीन वर्षों में इस मार्ग पर 18 रोड एक्सीडेंट में 19 लोगों की जानें गई हैं। रोड एक्सीडेंट पर अंकुश लगाने एनएचएआई ने इस मार्ग में सर्विस रोड बानाने का काम शुरू किया है।
यहां भी रोड डिवाइडर के साथ सर्विस रोड
शहर से सटे कुशालपुर ओवरब्रिज जहां पूर्व में टोल प्लाजा प्रस्तावित था, वर्तमान में ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हांकित है। इस ब्लैक स्पॉट में पिछले तीन वर्षों में 11 सड़क दुर्घटनाओं में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं। पूर्व में प्रस्तावित टोल प्लाजा के पास रोड डिवाइडर बनाने के साथ हाईवे से सटे सर्विस रोड को अलग किया जा रहा है। इसी तरह से टाटीबंध से सिलतरा बायपास रोड पर पठारीडीह, छत्तीसगढ़ महतारी चौक तक सर्विस रोड बनाया गया है टाटीबंध चौक पूर्व में ब्लैक स्पॉट था, फ्लाईओवर बनने के बाद टाटीबंध चौक पर से ब्लैक स्पॉट का तमगा हट गया है।
ऐसे निर्धारित करते हैं ब्लैक स्पॉट
ब्लैक स्पॉट निर्धारित करने पिछले तीन साल में किसी स्थान विशेष पर पांच सौ मीटर के दायरे में कितने सड़क हादसे हुए इसकी रिपोर्ट निकालते हैं, सड़क दुर्घटना में निर्धारित तीन वर्षों के भीतर किसी वर्ष एक वर्ष में अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में पांच या उससे ज्यादा मौतें या 10 से ज्यादा लोग घायल होते हैं, उस जगह को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हांकित किया जाता है।
ब्लैक स्पॉट को चिह्नित कर निर्माण काम शुरू कर दिया गया। जोरा में हाईवे के दोनों तरफ सर्विस रोड निर्माण के साथ सुंदर नगर टोल प्लाजा में डिवाइडर लगाया जा रहा है ।

रायपुर। शहर और आसपास ब्लैक स्पॉट में बड़े-बड़े हादसों के बाद चार जगहों पर ट्रैफिक आसान करने और हादसा रोकने के लिए निर्माण काम शुरू कर दिया गया है। मंदिर हसौद के साथ पूर्व में बनाए गए सुंदरनगर टोल प्लाजा सहित जोरा-अग्रसेन धाम मार्ग के साथ टाटीबंध- सिलतरा स्थित ब्लैक स्पॉट को ठीक करने का काम किया जा रहा है जिन ब्लैक स्पॉट को सुधार किया जा रहा है, उन चिन्हांकित स्थानों में पिछले तीन सालों में रोड एक्सीडेंट में 40 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। ये सभी नेशनल हाईवे अथारिटी के मार्ग हैं।
गौरतलब है कि राज्य के स्टेट और नेशनल हाईवे में 118 ब्लैक स्पॉट चिन्हांकित किए गए हैं, जहां सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ब्लैक स्पॉट को ठीक करने पुलिस विभाग के साथ संबंधित एजेंसी समय-समय पर बैठक आयोजित कर उपाय सोचती है। रायपुर जिले में ब्लैक स्पॉट को सुधारने तीन माह पूर्व ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन के अफसरों के साथ एनएचएआई तथा पीडब्लूडी के अफसर संबंधित ब्लैक स्पॉट पहुंचे और उसे कैसे सुधारा जाए, इस पर मंथन करने के साथ पहल की। इसी कड़ी में चार ब्लैक स्पॉट को सुधारने का काम किया जा रहा है।
मंदिर हसौद में फ्लाईओवर का निर्माण शुरू
नेशनल हाईवे से सटे मंदिर हसौद चौक को भी ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हांकित किया गया है। इस चौक पर सिग्नल ग्रीन होने के साथ रेड होने के दरमियान आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई ने मंदिर हसौद चौक के पास फ्लाईओवर निर्माण करने का काम शुरू किया है। फ्लाईओवर कंपलीट होने में दो वर्ष का समय लग सकता है, इसके बाद लोगों को सड़क दुर्घटना से राहच मिलेगी।
सर्विस रोड बनने से एक्सीडेंट पर लगाम
शहर से सटे जोरा-अग्रसेन धाम मार्ग स्थित कृषक कालोनी के पास सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। जोरा से कृषक नगर जाने के मार्ग पर सर्विस रोड नहीं होने साथ मार्ग विभाजक नहीं है। इसके कारण लोग रांग साइड वाहन चलाते हैं। इससे इस मार्ग पर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पिछले तीन वर्षों में इस मार्ग पर 18 रोड एक्सीडेंट में 19 लोगों की जानें गई हैं। रोड एक्सीडेंट पर अंकुश लगाने एनएचएआई ने इस मार्ग में सर्विस रोड बानाने का काम शुरू किया है।
यहां भी रोड डिवाइडर के साथ सर्विस रोड
शहर से सटे कुशालपुर ओवरब्रिज जहां पूर्व में टोल प्लाजा प्रस्तावित था, वर्तमान में ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हांकित है। इस ब्लैक स्पॉट में पिछले तीन वर्षों में 11 सड़क दुर्घटनाओं में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं। पूर्व में प्रस्तावित टोल प्लाजा के पास रोड डिवाइडर बनाने के साथ हाईवे से सटे सर्विस रोड को अलग किया जा रहा है। इसी तरह से टाटीबंध से सिलतरा बायपास रोड पर पठारीडीह, छत्तीसगढ़ महतारी चौक तक सर्विस रोड बनाया गया है टाटीबंध चौक पूर्व में ब्लैक स्पॉट था, फ्लाईओवर बनने के बाद टाटीबंध चौक पर से ब्लैक स्पॉट का तमगा हट गया है।
ऐसे निर्धारित करते हैं ब्लैक स्पॉट
ब्लैक स्पॉट निर्धारित करने पिछले तीन साल में किसी स्थान विशेष पर पांच सौ मीटर के दायरे में कितने सड़क हादसे हुए इसकी रिपोर्ट निकालते हैं, सड़क दुर्घटना में निर्धारित तीन वर्षों के भीतर किसी वर्ष एक वर्ष में अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में पांच या उससे ज्यादा मौतें या 10 से ज्यादा लोग घायल होते हैं, उस जगह को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हांकित किया जाता है।
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