इस वित्त वर्ष में चार लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM से खरीदारी
इस वित्त वर्ष में चार लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM से खरीदारी
केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM की शुरुआत नौ अगस्त 2016 को की गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक इस प्लेटफॉर्म से खरीदारी चार लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। आइए जानते हैं कि GeM ने इतने कम समय में यह उपलब्धि कैसे हासिल की।
सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM की शुरुआत नौ अगस्त 2016 को की गई थी।
मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM से खरीदारी चार लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म जीईएम की शुरुआत नौ अगस्त 2016 को की गई थी।
वित्त वर्ष 2021-22 में खरीद मूल्य 1.06 लाख करोड़ रुपये था और पिछले वित्त वर्ष में यह दो लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। सेवाओं की खरीद वित्त वर्ष 2022-23 में 66,000 करोड़ रुपये से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में अभी तक 2.05 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी तरह चालू वित्त वर्ष में 28 मार्च तक प्लेटफार्म से 1.95 लाख करोड़ रुपये की वस्तुएं खरीदी गईं।
वर्तमान में सरकारी विभागों, मंत्रालयों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, राज्य सरकारों तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को इस प्लेटफार्म के जरिये लेनदेन करने की अनुमति है। दुनियाभर में इस तरह के मंचों की सूची में दक्षिण कोरिया का KINEPS शीर्ष पर है। इसके बाद दूसरे नंबर में सिंगापुर का GEBIZ और फिर भारत का GeM तीसरे स्थान पर है।
GeM की बिक्री बढ़ने में डेढ़ लाख से सरकारी खरीदारों की भी अहम भूमिका रही। 21 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं ने अलग-अलग वस्तुओं उपलब्ध कराईं, जिससे सरकारी ई-मार्केटप्लेस के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ा।
GeM की उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए सीईओ पीके सिंह ने कहा कि हम सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता और समावेशिता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने 5.2 लाख से अधिक जन सेवा केंद्रों और 1.5 लाख भारतीय डाकघरों के साथ GeM के सहयोग पर भी रोशनी डाली, जिसने जमीनी स्तर पर आउटरीच और क्षमता निर्माण के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM की शुरुआत नौ अगस्त 2016 को की गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक इस प्लेटफॉर्म से खरीदारी चार लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। आइए जानते हैं कि GeM ने इतने कम समय में यह उपलब्धि कैसे हासिल की।
सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM की शुरुआत नौ अगस्त 2016 को की गई थी।मौजूदा वित्त वर्ष में अभी तक सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म GeM से खरीदारी चार लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए सरकारी ई-मार्केट प्लेटफार्म जीईएम की शुरुआत नौ अगस्त 2016 को की गई थी।
वित्त वर्ष 2021-22 में खरीद मूल्य 1.06 लाख करोड़ रुपये था और पिछले वित्त वर्ष में यह दो लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। सेवाओं की खरीद वित्त वर्ष 2022-23 में 66,000 करोड़ रुपये से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में अभी तक 2.05 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी तरह चालू वित्त वर्ष में 28 मार्च तक प्लेटफार्म से 1.95 लाख करोड़ रुपये की वस्तुएं खरीदी गईं।
वर्तमान में सरकारी विभागों, मंत्रालयों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, राज्य सरकारों तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को इस प्लेटफार्म के जरिये लेनदेन करने की अनुमति है। दुनियाभर में इस तरह के मंचों की सूची में दक्षिण कोरिया का KINEPS शीर्ष पर है। इसके बाद दूसरे नंबर में सिंगापुर का GEBIZ और फिर भारत का GeM तीसरे स्थान पर है।
GeM की बिक्री बढ़ने में डेढ़ लाख से सरकारी खरीदारों की भी अहम भूमिका रही। 21 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं ने अलग-अलग वस्तुओं उपलब्ध कराईं, जिससे सरकारी ई-मार्केटप्लेस के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ा।
GeM की उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए सीईओ पीके सिंह ने कहा कि हम सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता और समावेशिता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने 5.2 लाख से अधिक जन सेवा केंद्रों और 1.5 लाख भारतीय डाकघरों के साथ GeM के सहयोग पर भी रोशनी डाली, जिसने जमीनी स्तर पर आउटरीच और क्षमता निर्माण के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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