दिल्ली जाबे हवाई चोटी... खेला होबे लिखने वाले ने ही दिया था यह नारा, जानें- कौन हैं इन्हें लिखने वाले देबांग्शु
जब इस साल जनवरी में सिविल इंजीनियर से राजनेता बने 25 वर्षीय देबांग्शु भट्टाचार्य ने 'खेला होबे' गाना लिखा था, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह इतना वायरल हो जाएगा और बंगाल के विधानसभा चुनाव में गूंजता रहेगा। लिखे जाने के बाद तीन महीने बाद 'खेला होबे' रैप सॉन्ग और इसका वर्जन खासकर यह लाइन 'खेला होबे' पूरी तरह से चुनावी माहौल में छाया हुआ है और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख स्लोगन बन चुका है।
'खेला होबे' से पहले भट्टाचार्य ने टीएमसी के लिए पहले भी कई गानें लिखे हैं। उनके गाने 'ममता दी और एक बार' और 'दिल्ली जाबे हवाई चोटी' भी लोकप्रिय हो गए हैं। दिल्ली जाबे हवाई चोटी यानी चप्पल को लेकर बाद में यह कहा गया कि ममता बनर्जी चप्पल पहनना पसंद करती हैं और इसे उनकी प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा से जोड़ा गया।
भट्टाचार्य ने कहा कहा कि 'खेला होबे' ने लगभग सभी मील के पत्थर पार कर लिए हैं। मुझे इस बात की खुशी है कि भाजपा ने भी इस नारा को बुलंद किया है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस नारे का उल्लेख किया। बता दें कि 2019 चुनाव के बाद भट्टचार्य ने टीएमसी का दामन थाम लिया था।
ममता बनर्जी भी अब हर पब्लिक रैलियों में इस स्लोगन का इस्तेमाल करती दिखती हैं। रविवार को कोलकाता में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने ममता बनर्जी को चुनौती दी थी और कहा था, दीदी इसे सुनिए, टीएमसी का खेला शेष। खेल खतम, विकास शुरू। इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फरवरी में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि बंगाल विकास और शांति के खेल का गवाह बनेगा, अगर जनता वोट देकर भाजपा को सत्ता में लाती है।
मंगलवार को ही नंदीग्राम सीट से लड़ रहीं ममता बनर्जी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि 1 अप्रैल को खेला होबे। बता दें कि नंदीग्राम में एक अप्रैल को ही वोटिंग है।
भट्टाचार्य ने गीत लिखा और इसे सोशल मीडिया पर 7 जनवरी को अपलोड किया। अपलोड होने के तुरंत बाद ही इस गाने ने टीएमसी समर्थकों का ध्यान आकर्षित किया और लोकप्रिय हो गया। कुछ दिनों बाद जब टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल ने खेला होबे शब्द का इस्तेमाल किया, इसके बाद वे अधिक लोकप्रिय और वायरल हो गए।
साल 2016 में बांग्लादेश में सत्तारूढ़ अवामी लीग के विधायक शमीम उस्मान ने पहली बार एक राजनीतिक रैली में दो बहुत ही सामान्य बंगाली शब्दों (खेला होबे) का इस्तेमाल किया, हालांकि नारे के रूप में नहीं। गाना वायरल होने के बाद एक इंटरव्यू में शमीम ने कहा कि 'खेला होबे को शांति और विकास के पक्ष में इस्तेमाल किया जाना चाहिए न कि सांप्रदायिक भावनाओं के खिलाफ । मैं वास्तव में उम्मीद करूंगा कि इस खेल में कोई रक्तपात न हो और लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देखने को मिले। इसके बाद ही खेल को जीता जा सका।
भट्टाचार्य ने कहा कि स्कूल के दिनों से ही उनका राजनीति के प्रति झुकाव था। वह स्कूल में जब लड़के खेल के शख्सियतों की तस्वीरें कलेक्ट किया करते थे, भट्टाचार्य राजनीतिक शख्सियतों की तस्वीरें जमा किया करते थे।

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