60 दिन में कैसे लग सकता है 50 करोड़ भारतीयों को टीका? अजीम प्रेमजी ने दिया यह आइडिया
विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी ने भारत सरकार को कोविड-19 के खिलाफ देश के मेगा टीकाकरण अभियान में प्राईवेट सेक्टर को भागीदारी की मंजूरी देने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि यदि सरकार निजी क्षेत्र के साथ जुड़ती है तो अगले 60 दिनों में करीब 50 करोड़ से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन किया जा सकता है।
भारत के टीकाकरण कार्यक्रम की सराहना
बैंगलोर चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स द्वारा आयोजित एक संवाद सत्र को संबोधित करते हुए अजीम प्रेमजी ने भारत के टीकाकरण कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि COVID-19 वैक्सीन को रिकॉर्ड समय में विकसित किया गया है और आज बड़े अनुपात में लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने की आवश्यकता है। बता दें मोदी सरकार ने बजट में 35,000 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए जनसंख्या के बड़े हिस्से के टीकाकरण का भार वहन करने का फैसला किया है। आवंटन में लगभग 50 करोड़ भारतीयों को टीका लगाने में मदद करने की उम्मीद है। सरकार ने वैक्सीन की लागत और अन्य लागत सहित प्रति व्यक्ति 700 रुपये की लागत का अनुमान लगाया है।
प्रेमजी ने वित्त मंत्री से कहा कि इस बात की संभावना है कि हम सीरम संस्थान को लगभग 300 रुपए प्रति शॉट और अस्पताल व निजी नर्सिंग होम 100 रुपए प्रति शॉट उपलब्ध करवा सकते हैं। ऐसे में 400 रुपए प्रति शॉट के साथ एक बहुत बड़ी जनसंख्या का टीकाकरण किया जा सकता है। प्रेमजी के मुताबिक, यदि सरकार निजी क्षेत्र को इसमें साथ लेती है तो देश 60 दिनों के भीतर 50 करोड़ लोगों को कवर कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह बहुत प्रैक्टिकल है और महत्वपूर्ण भी। प्रेमजी निजी क्षेत्र के सक्रिय भागीदारी के लिए टीकाकरण के प्रयासों में तेजी लाने के लिए महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा सहित अन्य उद्योग के नेताओं में शामिल हुए। उद्योग लॉबी ने भी टीकाकरण अभियान में कॉर्पोरेट क्षेत्र की "पूर्ण भागीदारी" की वकालत की।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 के चलते लागू लॉकडाउन के पहले कुछ हफ्तों में प्रौद्योगिकी उद्योग के 90 प्रतिशत लोग घर से काम करने लगे थे और आज भी 90 प्रतिशत से अधिक लोग घर से काम कर रहे हैं। प्रेमजी ने कहा कि सरकार और आईटी उद्योग ने स्थायी रूप से एक मिश्रित मॉडल के फायदों को स्वीकार किया है, जहां लोग महामारी के बाद भी कार्यालय और घर, दोनों जगह से काम करेंगे। उन्होंने कहा, आज प्रौद्योगिकी हमारे लिए जीवन रेखा बन रही है। उन्होंने लोगों से कुछ न कुछ परोपकार के कामों में शामिल रहने की अपील की और कहा कि परोपकार हमेशा भारत की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्रीय बजट 2021-22 आर्थिक विकास के लिए सरकार की तरफ से निजी क्षेत्र को सुगम बनाने के बारे में है। इसके बिना देश एक बड़ा अवसर खो देता। सीतारमण ने कहा कि यहां सबसे महत्वपूर्ण घटक या इनपुट निजी क्षेत्र की भागीदारी है। जब तक निजी क्षेत्र पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं होता है, जब तक इसे पर्याप्त रूप से सुविधाजनक नहीं बनाया जाता है, भारत बहुत बड़ा अवसर खो रहा है। वित्त मंत्री के अनुसार, कोरोनावायरस वैक्सीन सरकारी-निजी भागीदारी का एक बड़ा उदाहरण था।

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