Doosra Review: खेल और समाज की रूढ़िवादी सोच की कहानी 'दूसरा', हक की लड़ाई कहां रही कमजोर?
Doosra Review: खेल और समाज की रूढ़िवादी सोच की कहानी 'दूसरा', हक की लड़ाई कहां रही कमजोर?
अभिनेत्री प्लबिता बोरठाकुर की लेटेस्ट फिल्म दूसरा आज से सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। आइए जानते हैं कि ये फिल्म कैसी है।

दूसरा फिल्म समीक्षा (फोटो क्रेडिट- जागरण)
सिनेमाघरों में रिलीज हुई दूसरा
प्लबिता बोरठाकुर हैं लीड एक्ट्रेस
समाज को आईना दिखाती है फिल्म
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 24 साल पहले जब लॉर्ड्स के के मैदान में नैटवेस्ट सीरीज के फाइनल में इंग्लैंड को हारने के बाद भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली ने टी-शर्ट लहराकर टीम इंडिया के नए दौर के आगमन का शंखनाद किया था।
उसी को देखकर राजस्थान की एक लड़की क्रिकेट के जुनून के साथ-साथ समाज की रूढ़िवादी सोच के खिलाफ बगापत करने के लिए हिम्मत जुटाती है। इसी ताने-बाने को मिलाकर फिल्म दूसरा को तैयार किया है। आइए जानते हैं कि ये फिल्म कैसी है।
क्या है दूसरा की कहानी?
सबसे पहले आप ये जान लें कि दूसरा एक फुल टाइम थिएटर रिलीज नहीं बल्कि डॉक्यु-ड्रामा और फिक्शन के बेहतरीन मिश्रण से सजी एक फिल्म है। जिसमें राजस्थान में रहने वाली एक तारा (प्लबिता बोरठाकुर) नाम की लड़की की आजादी की लड़ाई को दर्शाया गया है, जो बचपन से समाज की रूढ़िवादी सोच, रीति-रिवाज और उसके परिवार के खिलाफ है।
-1792739515932.webp)
तारा भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली से काफी प्रेरित है और मूवी में 1990 से लेकर 13 जुलाई 2002 के भारत-बनाम इंग्लैंड के नैटवेस्ट सीरीज के फाइनल तक के दौर को शामिल किया गया। तारा की जिद और हर बात पर सवाल पूछने की आदत से उसका परिवार भी उसके तंग आ जाता है।
-1792739550099.webp)
जैसे-जैसे सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर आगे बढ़ता है और वैसे-वैसे तारा बड़ी हो जाती है। घरवाले उसकी मर्जी के बिना शादी कर देते थे और यहां से फिल्म की कहानी में बढ़ा ट्विस्ट आता है। तब जाकर पता चलता है कि दूसरा एक समलैंगिग लड़की की कहानी है, जो समाज में अपने हक की लड़ाई और पहचान सामने लाने के लिए संघर्ष कर रही है।
-1792739565536.webp)
थिएटर्स रिलीज के आधार पर दूसरा एक कमजोर फिल्म लगती है। क्योंकि इसकी स्टोरी टेलिंग किसी फिक्शन फिल्म से हटकर एक डॉक्युमेंट्री-सीरीज की तरह नजर आती है। इसी वजह से दूसरा भरपूर मनोरंजन के लिहाज से पीछे रह जाती है।
कैसा है डायरेक्शन?
फिल्म दूसरा निर्देशन डायरेक्टर अभिनय देव ने किया है। एक संवदेनशील मुद्दे को फिल्म का रूप देने के लिए उन्होंने एक क्रिकेट आइकॉन को सहारा लिया है। जो उनके फिल्म की कहानी को गढ़ने में सहायता करता है।
-1792738949829.webp)
हालांकि, कई मौके पर ये मूवी लीग से अलग हटकर चलती हुई नजर आती है और एक स्पोर्ट्स ड्रामा डॉक्युमेंट्री प्रेरित होने लगती है। अगर खेल और समाज के तालमेल के अलावा दूसरा को सिर्फ मुद्दे के आधार पर पेश किया जाता तो शायद तस्वीर कुछ और हो सकती थी।
संदेश देती है फिल्म
बेशक प्लबिता बोरठाकुर की दूसरा कमर्शियल तौर पर बॉक्स ऑफिस पर अपनी छाप नहीं छोड़ पाएगी। लेकिन इसकी कहानी में एक ऐसा संदेश छिपा है, जो सिर्फ एक क्रिकेट प्रेमी की कहानी को बया नहीं करता है। बल्कि ये मूवी हर उस शख्स के लिए खास है जो अपनी आवाज उठाना चाहता है।
Labels
Mirchmasala
Post A Comment
No comments :