Doordarshan का कल्ट शो जिसने बच्चों को दिखाई 'जादुई दुनिया', गुलजार ने किया था डायरेक्ट; राम लीला से है कनेक्शन
Doordarshan का कल्ट शो जिसने बच्चों को दिखाई 'जादुई दुनिया', गुलजार ने किया था डायरेक्ट; राम लीला से है कनेक्शन
दूरदर्शन का 1991 में एक शो आता था जिसे गुलजार ने लिखा और डायरेक्ट किया था। बच्चों को इससे खास लगाव था।
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पोटली बाबा सीरियल का एक सीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दूरदर्शन (Doordarshan) ने हमें कई पॉपुलर टीवी सीरियल दिए हैं जिन्हें 90s के बच्चे आज भी मिस करते हैं। हर कोई दरदर्शन की आर्काइव या फिर यूट्यूब पर इन्हें खोजता रहता है।
रामायण (Ramayana), महाभारत (Mahabharat), चंद्रकांता (Chandrakanta), विक्रम बेताल (Vikram Betaal) जैसे टीवी सीरियलों को हर कोई जानता है लेकिन 35 साल पहले दूरदर्शन पर एक शो ऐसा भी आया था जिसे गुलजार (Gulzar) ने डायरेक्ट किया था।
टीवी के आगे जमा हो जाती थी भीड़
बच्चों को ये शो काफी पसंद था और पूरा परिवार उस समय टीवी सेट के आगे आकर बच्चा बन जाता था। हम बात कर रहे हैं साल 1991 में आए डी डी नेशनल के शो पोटली बाबा (Potli Baba Ki) की।
ये शो खास तौर पर एक पपेट शो था जिसमें पारंपरिक कठपुतलियों का इस्तेमाल किया गया था। प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार दादी पुदुमजी के 'इशारा पपेट थिएटर ट्रस्ट' ने इसे तैयार किया था। महान कवि और गीतकार गुलजार इसके लेखक, निर्माता और निर्देशक थे।

20 एपिसोड में प्रसारित हुई थी सीरीज
इसके कुल 20 एपिसोड टीवी पर प्रसारित हुए थे। कहानी में 'बाबा' नाम का एक बूढ़ा व्यक्ति घूंघर गांव में रहता है। उसके पास एक जादुई थैली यानी पोटली है जिसमें कई लोक कथाएं और कहानियां हैं।
बाबा की अनोखी बात यह थी कि वह हर कहानी सुनाने के साथ उम्र में छोटा मतलब कि जवान होता जा रहा था। माना जाता था कि जब उसकी सारी कहानियां खत्म हो जाएंगी, तो वह एक बच्चा बन जाएगा।
इसके साथ ही गुलजार साहब के लिखे गाने और बेहतरीन बैकग्राउंड म्यूजिक इस शो की जान थे। हर एपिसोड में संगीत का बहुत बड़ा रोल था, जो बच्चों को एक परियों की कहानी जैसी काल्पनिक दुनिया में ले जाता था। इसका टाइटल सॉन्ग 'आया आया छेनू वाली झुनू का बाबा' हर समय बच्चों की जुबान पर रहता था।
क्या है इसका राम-लीला कनेक्शन?
शो के पॉपुलर गाने 'आया रे बाबा, आया रे बाबा' की धुन इतनी सदाबहार थी कि साल 2013 में संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' के सुपरहिट गाने 'राम चाहे लीला चाहे' में इसी धुन का इस्तेमाल एक खास हिस्से के रूप में किया था।
दूरदर्शन का 1991 में एक शो आता था जिसे गुलजार ने लिखा और डायरेक्ट किया था। बच्चों को इससे खास लगाव था।
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पोटली बाबा सीरियल का एक सीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। दूरदर्शन (Doordarshan) ने हमें कई पॉपुलर टीवी सीरियल दिए हैं जिन्हें 90s के बच्चे आज भी मिस करते हैं। हर कोई दरदर्शन की आर्काइव या फिर यूट्यूब पर इन्हें खोजता रहता है।
रामायण (Ramayana), महाभारत (Mahabharat), चंद्रकांता (Chandrakanta), विक्रम बेताल (Vikram Betaal) जैसे टीवी सीरियलों को हर कोई जानता है लेकिन 35 साल पहले दूरदर्शन पर एक शो ऐसा भी आया था जिसे गुलजार (Gulzar) ने डायरेक्ट किया था।
टीवी के आगे जमा हो जाती थी भीड़
बच्चों को ये शो काफी पसंद था और पूरा परिवार उस समय टीवी सेट के आगे आकर बच्चा बन जाता था। हम बात कर रहे हैं साल 1991 में आए डी डी नेशनल के शो पोटली बाबा (Potli Baba Ki) की।
ये शो खास तौर पर एक पपेट शो था जिसमें पारंपरिक कठपुतलियों का इस्तेमाल किया गया था। प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार दादी पुदुमजी के 'इशारा पपेट थिएटर ट्रस्ट' ने इसे तैयार किया था। महान कवि और गीतकार गुलजार इसके लेखक, निर्माता और निर्देशक थे।

20 एपिसोड में प्रसारित हुई थी सीरीज
इसके कुल 20 एपिसोड टीवी पर प्रसारित हुए थे। कहानी में 'बाबा' नाम का एक बूढ़ा व्यक्ति घूंघर गांव में रहता है। उसके पास एक जादुई थैली यानी पोटली है जिसमें कई लोक कथाएं और कहानियां हैं।
बाबा की अनोखी बात यह थी कि वह हर कहानी सुनाने के साथ उम्र में छोटा मतलब कि जवान होता जा रहा था। माना जाता था कि जब उसकी सारी कहानियां खत्म हो जाएंगी, तो वह एक बच्चा बन जाएगा।
इसके साथ ही गुलजार साहब के लिखे गाने और बेहतरीन बैकग्राउंड म्यूजिक इस शो की जान थे। हर एपिसोड में संगीत का बहुत बड़ा रोल था, जो बच्चों को एक परियों की कहानी जैसी काल्पनिक दुनिया में ले जाता था। इसका टाइटल सॉन्ग 'आया आया छेनू वाली झुनू का बाबा' हर समय बच्चों की जुबान पर रहता था।
क्या है इसका राम-लीला कनेक्शन?
शो के पॉपुलर गाने 'आया रे बाबा, आया रे बाबा' की धुन इतनी सदाबहार थी कि साल 2013 में संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' के सुपरहिट गाने 'राम चाहे लीला चाहे' में इसी धुन का इस्तेमाल एक खास हिस्से के रूप में किया था।
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Mirchmasala
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