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एजेंटिक AI का दौर, स्मार्टफोन एप्स की छुट्टी, बदल जाएगा इंटरनेट इस्तेमाल का अंदाज!

एजेंटिक AI का दौर, स्मार्टफोन एप्स की छुट्टी, बदल जाएगा इंटरनेट इस्तेमाल का अंदाज!

मेटा द्वारा हाल ही में पेश पहले पर्सनल एआइ एजेंट 'मेटा म्यूज' के साथ कन्वर्सेशनल एआइ की दुनिया अब नया ...और पढ़ें








एजेंटिक AI संभालेगा आपके सारे काम। Photo- Gemini AI.



टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। स्मार्टफोन में आप एप खोलते हैं, मेन्यू में जाकर जानकारियां दर्ज करते हैं और फिर एप के जरिये आपका काम पूरा हो जाता है, चाहे कैब बुक करनी हो, ग्रॉसरी ऑर्डर करना हो, पैसे का लेनदेन हो या फिर टिकट बुक करना हो, इन सभी कामों के लिए कमोबेश हम ऐसा ही वर्षों से करते आ रहे हैं। आप कल्पना कीजिए अलग-अलग एप्स पर जाने के बजाय आपका सारा काम किसी एक खास एप पर जाने से पूरा हो जाए, तो कितनी सहजता बढ़ेगी और समय की कितनी बचत होगी। बीते दिनों मेटा ने अपना पर्सनल एआइ एजेंट 'म्यूज' लांच किया है, जो कुछ इसी तरह काम करता है। यह सिर्फ सवालों के जवाब ही नहीं देता, बल्कि असल में काम भी करता है। अन्य कंपनियां भी एजेंटिक AI सेंगमेंट में दाखिल हो रही हैं। इससे तय है कि आने वाले समय में केवल यूजर अनुभव ही नहीं, बल्कि इंटरनेट की व्यवस्था भी बदल जाएगी।


दरअसल, डिजिटलीकरण ने लोगों को जानकारियों तक पहुंच दी। फिर आया सर्च इंजन, जिसने जवाब खोजने में मदद की, रिकमेंडेशन सिस्टम ने नए विकल्प दिखाए और कन्वर्सेशनल AI ने मशीन के साथ बातचीत को सहज बनाया। अब एजेंटिक एप्स इसमें एक और कड़ी जोड़ते हैं- यूजर की इच्छा को वास्तविक कार्रवाई में बदलने की क्षमता।

कैसे सामान्य AI से अलग हैं एजेंटिक एप्स:

मान लें, आप पर्सनल AI एजेंट को कमांड देते हैं कि फैमिली डिनर के लिए आसपास कोई अच्छा और किफायती रेस्त्रां ढूंढ़ो और यह जानकारी मेरे परिवार के लोगों को भी भेज दो। जहां एक सामान्य एप रेस्त्रां की सूची दिखाकर रुक जाएगा, वहीं एक सक्षम AI एजेंट उपयुक्त रेस्टोरेंट खोजने के साथ कीमतों और उपलब्धता की भी जानकारी देगा, विकल्पों की सूची तैयार करेगा और मैसेज का ड्राफ्ट भी बना देगा। कहने पर वह रिजर्वेशन कर देगा। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एआइ सही जवाब दे सकता है या नहीं। असल सवाल यह है कि क्या AI सही काम भी कर सकता है? आने वाले समय में यह डाक्टर का अप्वाइंटमेंट दिलाने से लेकर साफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन पर छूट भी दिलवाने में भी आपकी मदद करेगा। एजेंटिक एप की खूबी यही है कि सोचने-समझने के साथ कार्रवाई भी कर सकता है। वह दूसरे टूल्स का इस्तेमाल करने, अलग-अलग सर्विसेज से जुड़ने और आपकी प्राथमिकताओं को ध्यान में भी सक्षम है। यहां तक कि परिस्थितियां बदलने पर अपनी योजना में बदलाव भी कर सकता है।



अदृश्य होता इंटरफेस:

लांच के शुरुआती हफ्ते में ही लाखों लोगों ने 'म्यूज' के डाउनलोड कर लिया। इसका आकर्षण बढ़ रहा है। हालांकि, अभी भारतीय यूजर्स को इसके लिए इंतजार करना होगा। हाल ही में OpenAI ने भी अपने नए एआइ एजेंट की घोषणा की है। यह इंटरनेट के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। एंथ्रोपिक ने 'क्लाउड डुएट' पेश किया है, जो प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। एजेंटिक एप आपके जीमेल, कैलेंडर, स्लैक और काम से जुड़े हजारों अन्य प्रोडक्टिविटी एप्स को कनेक्ट कर सकते हैं। 'डुएट' के 'प्रोएक्टिव' होने का मतलब यह है कि हर बार इसे निर्देश देने की जरूरत नहीं पड़ेगी, यह आपके काम को खुद ही समझ लेता है।
पर्सनलाइजेशन का नया तरीका :

पर्सनलाइजेशन लंबे समय से डिजिटल प्लेटफार्मों की एक प्रमुख विशेषता रही है। स्ट्रीमिंग सेवाएं फिल्में सुझाती हैं, शॉपिंग एप्स प्रोडक्ट्स की सिफारिश करते हैं और इंटरनेट मीडिया यूजर की गतिविधियों के आधार पर कंटेंट दिखाते हैं। एजेंटिक AI इस अनुभव को एक कदम आगे ले जा सकता है। यह सिर्फ यह अनुमान लगाने तक सीमित नहीं रहेगा कि यूजर को क्या पसंद आ सकता है, बल्कि उसके लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद कर सकता है। इससे आपको महसूस होगा कि आप व्यक्तिगत डिजिटल असिस्टेंट के साथ काम कर रहे हैं।
बदल जाएगा इंटरनेट:

इंटरनेट उन इंसानों के लिए बनाया गया था, जिनके पास समय और धैर्य की कमी होती है। AI के साथ ऐसी कोई सीमा नहीं है। हो सकता है कि आपको टिकट या अप्वाइंटमेंट बुक करने के लिए रोबोट्स से मुकाबला करना पड़े। छोटे व्यवसायों को मशीनी दिमाग के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है। AI विज्ञापन नहीं देखते, ऐसे में जो वेबसाइटें विज्ञापनों पर निर्भर हैं, उनका भविष्य नई मुसीबतों में घिर सकता है। आप इन AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो हो सकता है कि वे आपको धोखा भी दे दें। AI पहले ही ऑनलाइन बिजनेस को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। गूगल और चैटबाट्स अब सीधे सवालों के जवाब दे देते हैं। नतीजतन, लोग वेबसाइटों पर कम जा रहे हैं। रोबोट न तो विज्ञापनों पर क्लिक करते हैं और न ही सब्सक्रिप्शन खरीदते हैं, जिससे इंटरनेट पर मौजूद कई कंपनियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। ये AI एजेंट इस समस्या को और भी गंभीर बना देंगे। एक विश्लेषण से पता चला है कि जून 2026 तक बाट्स से आने वाले वेब ट्रैफिक में 124 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कुछ वेबसाइटें और सेवाएं चरमराने लगी हैं, क्योंकि वे इतने भारी डिजिटल लोड को संभालने के लिए नहीं बनी थीं।



निजता में सेंध का खतरा:

आप दशकों से निजी और पेशेवर कार्यों के लिए ईमेल पर निर्भर हो चुके हैं। जीमेल अकाउंट से लोग कई सर्विसेज के लिए लागइन करते हैं। ज्यादातर लोग इसमें मेडिकल रिपोर्ट, कांट्रैक्ट और कानूनी दस्तावेज, परिवार के साथ हुई बातचीत और ढेरों वित्तीय जानकारियां सुरक्षित रखते हैं। किसी भी अन्य डिजिटल सेवा की तुलना में ईमेल लोगों के लिए डिजिटल तिजोरी की तरह काम करता है। अगर मेटा या ऐसी किसी अन्य कंपनी के पास इसका एक्सेस चला जाए, तो आप AI की मनमानी को रोक नहीं पाएंगे। मेटा प्राइवेसी को लेकर कुछ स्पष्ट वादे तो करता है, पर वादा हमेशा आपके हित में ही रहेगा, इसकी गारंटी कौन लेगा।
अन्य एप्स भी हैं विकल्प

चैटजीपीटी वर्क: इसका एजेंटिक मोड 'वर्क' कहलाता है। यह इस्तेमाल करने में आसान है। एक्सपीडिया, कैनवा, उबर, स्पॉटिफाइ आदि के साथ सीधे इंटीग्रेशन की सुविधा के साथ यह उपयोगी साबित हो सकता है।

परप्लेक्सिटी कंप्यूटर: यह AI एजेंट के साथ साथ यह एक 'आर्केस्ट्रेटर' की तरह काम करता है। इसका एक फायदा यह भी है कि आप किसी एक इकोसिस्टम में बंधे नहीं रहते, आप मार्केट में मौजूद किसी भी बेहतरीन मॉडल का इस्तेमाल कर सकते हैं। आपको फाइनल रिजल्ट देने से पहले, यह हमेशा अपने काम को दोबारा चेक करता है। इसका अपना ब्राउजर 'कॉमेट' भी है। किसी सर्विस के लिए वेब ब्राउज कर सकता है। हालांकि, इसे प्रयोग करने के लिए यूजर्स को महंगे प्लान का भुगतान करना पड़ता है।


जेमिनी स्पार्क: गूगल का एजेंटिक AI अन्य सभी टूल्स की तरह ही काम करता है। गूगल का प्रोडक्ट होने के नाते यह वर्कस्पेस एप्स के लिए बेहद अनुकूलित है और इन सेवाओं से जानकारी प्राप्त करने और उनमें कार्रवाई करने के लिए इंटीग्रेटेड है। यदि आप जीमेल, गूगल डाक्स, शीट्स, कीप आदि का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो स्पार्क आपके लिए एकदम उपयुक्त है।


सिरी एआइ: हर किसी को अपने रोजमर्रा के कामों के लिए किसी प्रोफेशनल एआइ एजेंट की जरूरत नहीं होती। नया सिरी एआइ ऐसे लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। यह क्लाउड कोवर्क या चैटजीपीटी वर्क जितना स्वतंत्र और पावरफुल नहीं है, लेकिन यह आपके ज्यादातर जरूरी कामों कर सकता है। सिरी पहले से ही आइफोन और मैक के साथ जुड़ा हुआ है, इसलिए इसके पास आपके बारे में काफी निजी जानकारी होती है, जबकि अन्य एआइ टूल्स को सब कुछ शुरू से सीखना पड़ता है। डाटा के मामले में एपल को आम तौर पर अधिक भरोसेमंद माना जाता है।
क्लाउड कोवर्क:

एंथ्रोपिक का 'क्लाउड' पूरी तरह से प्रोफेशनल काम के लिए है, इसका 'एजेंटिक' टूल 'कोवर्क' भी इसी काम में माहिर है। यह उन प्रोफेशनल्स के लिए है, जिन्हें गहन 'नॉलेज वर्क' जैसे रिसर्च या कई अलग-अलग स्रोतों से जानकारी इकट्ठा करना होता है। इसका उपयोग लंबे कानूनी दस्तावेजों को पढ़ने जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है।
पर्सनल AI का हो समझदारी भरा प्रयोग

तुषार धवन, पार्टनर, प्लस91लैब्स


पर्सनल AI एजेंट यूजर और तकनीक के बीच के रिश्ते को बदल रहे हैं। ये रोजमर्रा के कामों में लगने वाली मेहनत को कम कर सकते हैं, प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकते हैं और डिजिटल अनुभवों को अधिक पर्सनलाइज्ड बना सकते हैं। हालांकि, इनकी सीमाओं को समझना उतना ही जरूरी है। एक ऐसा AI एजेंट, जिसकी पहुंच आपके निजी ईमेल, वित्तीय जानकारी या अन्य जुड़े हुए एप्स तक हो, वह उपयोगी तो है, लेकिन परमिशन को ठीक से मैनेज नहीं होने, निर्देशों को गलत तरीके से समझने या सुरक्षा उपाय फेल होने पर इससे जोखिम भी पैदा हो सकता है। AI के सुझाव गलत भी हो सकते हैं। पर्सनल AI एजेंटों का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं, इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि उन्हें हम कितनी पहुंच और कितनी आजादी दे रहे हैं? यूजर्स के पास यह स्पष्टता और नियंत्रण होना चाहिए कि ये एजेंट क्या कर सकते हैं। डेवलपर्स को शुरुआत से ही इनमें प्राइवेसी, पारदर्शिता और मानवीय निगरानी की व्यवस्था करनी चाहिए। अंततः पर्सनल AI की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि ये एजेंट कितने समझदारी से काम करते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करेगी कि वे हमारी ओर से कितने सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से काम करते हैं।
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