31 गजलों, 9 ठुमरी और 15 गानों से सजी है बॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्म, 90 सालों से नहीं टूटा रिकॉर्ड
31 गजलों, 9 ठुमरी और 15 गानों से सजी है बॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्म, 90 सालों से नहीं टूटा रिकॉर्ड
94 साल पहले आई इस हिस्टोरिकल फिल्म के नाम सबसे ज्यादा गाने होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। फिल्म में हर एक कैरेक्टर की एंट्री एक गाने के साथ होती है।

94 साल पहले रिलीज हुई थी ये फिल्म
HIGHLIGHTS
94 साल पहले रिलीज हुई थी ये फिल्म
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है इसका नाम
9 दशकों से नहीं टूटा हिस्टोरिकल रिकॉर्ड
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। जब भारत में सिनेमा आया तो यह एक बड़ी क्रांति थी, पहली मूक फिल्म हरिश्चंद्र से लेकर पहली बोलती फिल्म आलमआरा को दर्शकों ने काफी सराहा। इस बीच और भी कई फिल्म आई जिन्होंने सिनेमा में कई रिकॉर्ड्स बनाए। एक ऐसी ही फिल्म आलमआरा के आसपास रिलीज हुई जिसके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हुआ और इसे आज तक 90 सालों बाद भी कोई नहीं तोड़ पाया है।
94 साल पहले आई फिल्म में सबसे ज्यादा 72 गाने
साल 1932 में रिलीज हुई इस फिल्म में सबसे ज्यादा गाने होने का अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। इस फिल्म ने संगीत के मामले में ऐसा इतिहास रचा कि इसे 94 सालों बाद भी कोई फिल्ममेकर नहीं तोड़ पाया है। ऑफिशियल तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इस फिल्म का नाम दर्ज है और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसमें 72 गाने हैं।
हम बात कर रहे हैं 94 साल पहले रिलीज हुई फिल्म इंद्रसभा (Indrasabha) की, जिसमें 31 गजलें, 9 ठुमरी, 4 होली के गीत, 15 गाने, 2 चौबोला और 5 छंद शामिल हैं।
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हर किरदार की एंट्री एक गाने के साथ
इस फिल्म की एक और खास बात ये है कि इसकी कहानी एक कविता के रूप में आगे बढ़ती है और गर छोटे और बड़े किरदारों की एंट्री एक नए गाने के साथ होती है। इतना ही नहीं यह फिल्म उस दौर की सबसे लंबे रनटाइम वाली फिल्मों में से एक थी। इसका रन टाइम 3 घंटे 31 मिनट था।

फिल्म के बारे में इंद्रसभा का निर्देशन जमाहेदजी जहांगीरजी मदन ने किया था और उस दौर के सुपरस्टार्स मास्टर निसार और जहानारा कज्जन ने फिल्म में अहम भूमिकाएं निभाईं थी। इनके साथ अब्दुल रहमान काबुली और मुख्तार बेगम भी फिल्म का हिस्सा थे।
'बंगाल की नाइटिंगेल' का था अहम किरदार
बता दें जहानारा कज्जन उस दौर की एक बेहतरीन शास्त्रीय गायिका भी थीं इसीलिए उन्हें इस ऐतिहासिक म्यूजिक फिल्म के लिए चुना गया था। उन्हें 'बंगाल की नाइटिंगेल' कहा जाता था। फिल्म के सभी गानों को संगीत देने का काम म्यूजिक डायरेक्टर नागरदास नायक ने किया था।
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क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी एक राजा और अप्सरा के रोमांस की है जिसमें राजा अपनी प्रजा से काफी प्यार करता है और आगे बढ़कर हर परिस्थिति में मदद करता है। इसी बीच इंद्रसभा की अप्सरा उसकी परीक्षा लेने का मन बनाती है लेकिन इस कश्मकश में वह राजा को दिल दे बैठती है।
94 साल पहले आई इस हिस्टोरिकल फिल्म के नाम सबसे ज्यादा गाने होने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। फिल्म में हर एक कैरेक्टर की एंट्री एक गाने के साथ होती है।

94 साल पहले रिलीज हुई थी ये फिल्म
HIGHLIGHTS
94 साल पहले रिलीज हुई थी ये फिल्म
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है इसका नाम
9 दशकों से नहीं टूटा हिस्टोरिकल रिकॉर्ड
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। जब भारत में सिनेमा आया तो यह एक बड़ी क्रांति थी, पहली मूक फिल्म हरिश्चंद्र से लेकर पहली बोलती फिल्म आलमआरा को दर्शकों ने काफी सराहा। इस बीच और भी कई फिल्म आई जिन्होंने सिनेमा में कई रिकॉर्ड्स बनाए। एक ऐसी ही फिल्म आलमआरा के आसपास रिलीज हुई जिसके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हुआ और इसे आज तक 90 सालों बाद भी कोई नहीं तोड़ पाया है।
94 साल पहले आई फिल्म में सबसे ज्यादा 72 गाने
साल 1932 में रिलीज हुई इस फिल्म में सबसे ज्यादा गाने होने का अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। इस फिल्म ने संगीत के मामले में ऐसा इतिहास रचा कि इसे 94 सालों बाद भी कोई फिल्ममेकर नहीं तोड़ पाया है। ऑफिशियल तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इस फिल्म का नाम दर्ज है और आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इसमें 72 गाने हैं।
हम बात कर रहे हैं 94 साल पहले रिलीज हुई फिल्म इंद्रसभा (Indrasabha) की, जिसमें 31 गजलें, 9 ठुमरी, 4 होली के गीत, 15 गाने, 2 चौबोला और 5 छंद शामिल हैं।
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हर किरदार की एंट्री एक गाने के साथ
इस फिल्म की एक और खास बात ये है कि इसकी कहानी एक कविता के रूप में आगे बढ़ती है और गर छोटे और बड़े किरदारों की एंट्री एक नए गाने के साथ होती है। इतना ही नहीं यह फिल्म उस दौर की सबसे लंबे रनटाइम वाली फिल्मों में से एक थी। इसका रन टाइम 3 घंटे 31 मिनट था।

फिल्म के बारे में इंद्रसभा का निर्देशन जमाहेदजी जहांगीरजी मदन ने किया था और उस दौर के सुपरस्टार्स मास्टर निसार और जहानारा कज्जन ने फिल्म में अहम भूमिकाएं निभाईं थी। इनके साथ अब्दुल रहमान काबुली और मुख्तार बेगम भी फिल्म का हिस्सा थे।
'बंगाल की नाइटिंगेल' का था अहम किरदार
बता दें जहानारा कज्जन उस दौर की एक बेहतरीन शास्त्रीय गायिका भी थीं इसीलिए उन्हें इस ऐतिहासिक म्यूजिक फिल्म के लिए चुना गया था। उन्हें 'बंगाल की नाइटिंगेल' कहा जाता था। फिल्म के सभी गानों को संगीत देने का काम म्यूजिक डायरेक्टर नागरदास नायक ने किया था।
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क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी एक राजा और अप्सरा के रोमांस की है जिसमें राजा अपनी प्रजा से काफी प्यार करता है और आगे बढ़कर हर परिस्थिति में मदद करता है। इसी बीच इंद्रसभा की अप्सरा उसकी परीक्षा लेने का मन बनाती है लेकिन इस कश्मकश में वह राजा को दिल दे बैठती है।
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Mirchmasala
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