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चांद पर SpaceX के रॉकेट की क्रैश लैंडिंग, NASA ने जारी की 60 फीट चौड़े गड्ढे की तस्वीरें

चांद पर SpaceX के रॉकेट की क्रैश लैंडिंग, NASA ने जारी की 60 फीट चौड़े गड्ढे की तस्वीरें


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चंद्रमा पर SpaceX रॉकेट के टकराने से बने 60 फीट चौड़े नए क्रेटर की तस्वीरें जारी की हैं। ।








NASA ने SpaceX रॉकेट से बने चांद के क्रेटर की तस्वीरें जारी कीं।


यह क्रेटर लगभग 60 फीट चौड़ा और 10 फीट से कम गहरा है।


LRO ने तस्वीरें लीं, क्रैश साइट खोजने में वैश्विक सहयोग मिला।


डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चंद्रमा की सतह पर बने एक नए विशाल गड्ढे (क्रेटर) की तस्वीरें जारी की हैं। यह गड्ढा इस महीने की शुरुआत में SpaceX रॉकेट के चंद्रमा से टकराने के कारण बना था।


NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने 11 और 12 अगस्त के बीच ये तस्वीरें लीं, जिनमें 5 अगस्त को SpaceX Falcon 9 के ऊपरी हिस्से के टकराने के बाद बने निशान दिखाई दे रहे हैं।
60 फीट चौड़ा और 10 फीट से कम गहरा

NASA के वैज्ञानिकों ने परछाई की लंबाई के आधार पर अनुमान लगाया है कि यह गड्ढा लगभग 60 फीट चौड़ा और 10 फीट से कम गहरा है। इस रॉकेट को जनवरी 2025 में फायरफ्लाई एयरोस्पेस के ब्लू घोस्ट 1 लूनर लैंडर के साथ लॉन्च किया गया था, जिसने चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी।


तस्वीर खींचना था बेहद मुश्किल काम

NASA ने बताया कि 60 मील की ऊंचाई से गुजर रहे ऑर्बिटर के लिए यह तस्वीर लेना बेहद चुनौतीपूर्ण था। अंतरिक्ष यान को सही एंगल पर झुकाने के साथ-साथ सही समय का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण था।


एजेंसी के अनुसार, यदि कैमरा 10 सेकंड भी जल्दी या देर से फोटो लेता, तो टारगेट सेंटर से 10 मील दूर निकल जाता।
तस्वीरों से मिले कई वैज्ञानिक संकेत

अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों में गड्ढे के चारों तरफ चमकदार और गहरे रंग की धारियां नजर आ रही हैं। गहरे रंग की धारियां सतह के नीचे 1.5 फीट गहराई से उछली धूल और चट्टानों की हैं, जो सौर हवाओं और कॉस्मिक किरणों से प्रभावित हुई थीं।


वहीं, गड्ढे के किनारों पर मौजूद चमकदार धारियां जमीन के अंदर से निकली नई सामग्री को दर्शाती हैं।
वैश्विक सहयोग से मिला क्रैश साइट का पता

इस क्रैश साइट का सटीक पता लगाना एक वैश्विक प्रयास था। NASA के सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज ने रॉकेट के रास्ते का सटीक अनुमान लगाकर डेटा दक्षिण कोरियाई अंतरिक्ष एजेंसी को सौंपा।


इसके बाद, कोरिया के दानूरी (KPLO) ऑर्बिटर ने 6 अगस्त को पहली तस्वीरें लीं और उनके कोऑर्डिनेट्स NASA के साथ साझा किए, जिससे LRO को यह सटीक तस्वीर लेने में सफलता मिली।
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