'कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन में ना जाएं छात्र', विजय सरकार ने वापस लिया आदेश
'कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन में ना जाएं छात्र', विजय सरकार ने वापस लिया आदेश
विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने का अपना आदेश 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया।

विजय सरकार ने 24 घंटे पहले जारी किया आदेश, अब वापस ले लिया। (फोटो- एएनआई।)
तमिलनाडु सरकार ने छात्र विरोध पर प्रतिबंध का आदेश वापस लिया।
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय ने 24 घंटे में निर्देश रद्द किया।
मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों के विरोध के अधिकार पर जोर दिया।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने स्कूल और कॉलेज के छात्रों को विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह निर्देश वापस ले लिया।
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय (DCE) द्वारा जारी किए गए ये उपाय वामपंथी पार्टियों और तमिलनाडु कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर किए गए थे। पिछले हफ्ते चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने खुद छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि छात्रों को विरोध करने का मौलिक अधिकार है, भले ही उनकी राय गलत हो सकती है।
'सरकार ने वापस लिया आदेश'
मंगलवार को जारी एक आदेश में कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने बताया कि विभाग के 17 अगस्त के पिछले आदेश को वापस ले लिया गया है। यह आदेश राज्य भर के सभी सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को जारी किया गया था।
स्कूल ठीक करो अभियान के बीच आया था आदेश
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय तमिलनाडु के उच्च शिक्षा विभाग के तहत काम करता है और पूरे राज्य में सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों की देखरेख करता है। इससे पहले विरोध न करने का आदेश ऐसे समय में आया था जब कॉकरोच जनता पार्टी ने 15 अगस्त से अपना स्कूल ठीक करो अभियान शुरू किया था और पूरे भारत में जेन अल्फा के स्कूली छात्र कई मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।
विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने का अपना आदेश 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया।

विजय सरकार ने 24 घंटे पहले जारी किया आदेश, अब वापस ले लिया। (फोटो- एएनआई।)
तमिलनाडु सरकार ने छात्र विरोध पर प्रतिबंध का आदेश वापस लिया।
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय ने 24 घंटे में निर्देश रद्द किया।
मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों के विरोध के अधिकार पर जोर दिया।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने स्कूल और कॉलेज के छात्रों को विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था लेकिन 24 घंटे के भीतर ही यह निर्देश वापस ले लिया।
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय (DCE) द्वारा जारी किए गए ये उपाय वामपंथी पार्टियों और तमिलनाडु कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर किए गए थे। पिछले हफ्ते चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने खुद छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि छात्रों को विरोध करने का मौलिक अधिकार है, भले ही उनकी राय गलत हो सकती है।
'सरकार ने वापस लिया आदेश'
मंगलवार को जारी एक आदेश में कॉलेज शिक्षा की संयुक्त निदेशक सिंथिया सेल्वी पी ने बताया कि विभाग के 17 अगस्त के पिछले आदेश को वापस ले लिया गया है। यह आदेश राज्य भर के सभी सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपलों को जारी किया गया था।
स्कूल ठीक करो अभियान के बीच आया था आदेश
कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय तमिलनाडु के उच्च शिक्षा विभाग के तहत काम करता है और पूरे राज्य में सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों की देखरेख करता है। इससे पहले विरोध न करने का आदेश ऐसे समय में आया था जब कॉकरोच जनता पार्टी ने 15 अगस्त से अपना स्कूल ठीक करो अभियान शुरू किया था और पूरे भारत में जेन अल्फा के स्कूली छात्र कई मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।
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