सीआईडी के निशाने पर परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल, आगे और गिरफ्तारियां
सीआईडी के निशाने पर परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल, आगे और गिरफ्तारियां
सीआईडी जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों से पूछताछ कर रही है, जिसमें मुख्य फोकस परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल पर ...और पढ़ें

रिमांड के दूसरे दिन शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर जानकारी लेती रही सीआईडी।
जेपीएससी अनियमितता मामले में पांच आरोपी सीआईडी रिमांड पर।
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल पर सीआईडी का फोकस।
शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की जांच, भविष्य में और गिरफ्तारियां।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के मामले सीआईडी की छानबीन जारी है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों से पुलिस रिमांड पर पूछताछ का आज तीसरा दिन है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीआईडी की टीम आरोपितों, जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, टीडीपीएल के कर्मी उस्मान, एबाद और मार्केटिंग आफिसर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की।
सीआईडी का पूरा फोकस परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) पर है। सीआईडी गिरफ्तार आरोपियों से यह जानने की कोशिश कर रही है कि उक्त कंपनी को परीक्षा संचालन के लिए जो कार्य आवंटित किए गए, उसके लिए निर्धारित एसओपी का अनुपालन किया गया या नहीं।
सीआईडी ने इस मामले में आरोपितों के खिलाफ कड़ी कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जिससे स्पष्ट है कि एजेंसी इसे गंभीरता से देख रही हैं। आरोपितों से सभी पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है और उनके बयान को दर्ज किया जा रहा है।
इन आरोपियों के विरुद्ध सीआईडी ने बीएनएस की धारा 316(2) और 316(5) के अंतर्गत आपराधिक न्यासभंग (दी गई जिम्मेदारी का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल), धारा 318(2) के तहत धोखाधड़ी, वहीं धारा 338, 336(3) और 340(2) के तहत जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनके उपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा धारा 61(2) के तहत आपराधिक षड्यंत्र का मामला भी जोड़ा गया है, जो इस पूरे नेटवर्क के संगठित रूप से संचालित होने की ओर इशारा करता है। सीआइडी की टीम इस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के दौरान निर्णय स्तर पर किस-किस की भूमिका रही और क्या इसमें शीर्ष अधिकारियों की सीधी या परोक्ष संलिप्तता थी या नहीं।
जब्त किए गए डिजिटल डेटा जैसे कंप्यूटर हार्ड डिस्क, ई-मेल रिकॉर्ड, फाइल मूवमेंट और आंतरिक संचार की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी स्तर पर नियमों को दरकिनार कर फायदे पहुंचाने की कोशिश तो नहीं हुई।
सीआईडी की टीम इस मामले में जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते के आवास, जेपीएससी कार्यालय में उनके कक्ष में भी छापेमारी कर चुकी है और वहां से भी कई अहम दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य को जब्त किया है।
रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां संभव हैं।
सीआईडी जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों से पूछताछ कर रही है, जिसमें मुख्य फोकस परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल पर ...और पढ़ें

रिमांड के दूसरे दिन शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर जानकारी लेती रही सीआईडी।
जेपीएससी अनियमितता मामले में पांच आरोपी सीआईडी रिमांड पर।
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल पर सीआईडी का फोकस।
शीर्ष अधिकारियों की भूमिका की जांच, भविष्य में और गिरफ्तारियां।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के मामले सीआईडी की छानबीन जारी है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों से पुलिस रिमांड पर पूछताछ का आज तीसरा दिन है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीआईडी की टीम आरोपितों, जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, टीडीपीएल के कर्मी उस्मान, एबाद और मार्केटिंग आफिसर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की।
सीआईडी का पूरा फोकस परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) पर है। सीआईडी गिरफ्तार आरोपियों से यह जानने की कोशिश कर रही है कि उक्त कंपनी को परीक्षा संचालन के लिए जो कार्य आवंटित किए गए, उसके लिए निर्धारित एसओपी का अनुपालन किया गया या नहीं।
सीआईडी ने इस मामले में आरोपितों के खिलाफ कड़ी कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जिससे स्पष्ट है कि एजेंसी इसे गंभीरता से देख रही हैं। आरोपितों से सभी पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है और उनके बयान को दर्ज किया जा रहा है।
इन आरोपियों के विरुद्ध सीआईडी ने बीएनएस की धारा 316(2) और 316(5) के अंतर्गत आपराधिक न्यासभंग (दी गई जिम्मेदारी का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल), धारा 318(2) के तहत धोखाधड़ी, वहीं धारा 338, 336(3) और 340(2) के तहत जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उनके उपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा धारा 61(2) के तहत आपराधिक षड्यंत्र का मामला भी जोड़ा गया है, जो इस पूरे नेटवर्क के संगठित रूप से संचालित होने की ओर इशारा करता है। सीआइडी की टीम इस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के दौरान निर्णय स्तर पर किस-किस की भूमिका रही और क्या इसमें शीर्ष अधिकारियों की सीधी या परोक्ष संलिप्तता थी या नहीं।
जब्त किए गए डिजिटल डेटा जैसे कंप्यूटर हार्ड डिस्क, ई-मेल रिकॉर्ड, फाइल मूवमेंट और आंतरिक संचार की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी स्तर पर नियमों को दरकिनार कर फायदे पहुंचाने की कोशिश तो नहीं हुई।
सीआईडी की टीम इस मामले में जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते के आवास, जेपीएससी कार्यालय में उनके कक्ष में भी छापेमारी कर चुकी है और वहां से भी कई अहम दस्तावेज व डिजिटल साक्ष्य को जब्त किया है।
रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां संभव हैं।
Post A Comment
No comments :