Lata Mangeshkar का 45 साल पुराना गाना, 'अश्लील' बताकर गाने से किया मना; बाद में आशा ने गाया बना सुपरहिट
Lata Mangeshkar का 45 साल पुराना गाना, 'अश्लील' बताकर गाने से किया मना; बाद में आशा ने गाया बना सुपरहिट
लता मंगेशकर अपने सिद्धांतों और साफ-सुथरी गायकी के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने 1961 की फिल्म 'हम दोनों' के लोकप्रिय गीत को गाने से मना कर दिया था, क्यो ...और पढ़ें

नई दिल्ली। लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की सुरीली मखमली आवाज का जादू लोगों के दिलों तक पहुंचता था। वे बहुत ऊंचे सुरों को बिना आवाज टूटे गाती थीं। उन्होंने दिलीप कुमार के कहने पर अपने उर्दू उच्चारण पर बहुत मेहनत की थी और रोमांटिक गानों को बहुत ही कोमलता से गाती थीं।
लता जी ने हिंदी, मराठी, बंगाली सहित कई भाषाओं में 30 हजार से अधिक गाने गाए। इसमें रोमांटिक से लेकर दुखभरे गीत और भजन शामिल हैं। लता मंगेशकर अपने हर गाने को हमेशा परफेक्शन के साथ खत्म करना चाहती थीं फिर चाहें इसके लिए उन्हें कितनी ही बार रीटेक लेना पड़े।
उसूलों की पक्की थीं लता जी
लता मंगेशकर की एक सबसे अच्छी बात ये थी कि वो अपनी सादगी और उसूलों के लिए जानी जाती थीं। संगीत जगत में उनके छह दशकों से अधिक के करियर में ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने अपनी गरिमा और सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय बड़े प्रोजेक्ट्स को मना कर दिया। लता जी ने हमेशा साफ-सुथरी गायकी को प्राथमिकता देती थीं। अगर उन्हें किसी गाने के बोल थोड़े भी भद्दे, अश्लील या 'सस्ते' लगते थे, तो वे उसे गाने से साफ इनकार कर देती थीं। उनका मानना था कि संगीत में एक तरह की पवित्रता होनी चाहिए।
-1775658047973.jpg)
कौन सा है वो शानदार गीत?
आज ऐसा ही एक किस्सा हम आपको बताने वाले हैं जब सिंगर ने एक सुपरहिट गाने को मना कर दिया। हम बात कर रहे हैं साल 1961 में आई फिल्म 'हम दोनों'के पॉपुलर गीत 'अभी ना जाओ छोड़कर' की। गाने के बोल महान कवि साहिर लुधियानवी ने लिखे थे। गाने में एक लाइन है -"अधूरी आस छोड़कर, अधूरी प्यास छोड़कर..."
-1775658133969.jpg)
लता जी को लगा कि ये बोल थोड़े ज्यादा 'रोमांटिक' या 'बोल्ड' हैं और शायद उनकी छवि पर उतने सटीक न बैठें। इस वजह से लता जी ने इसे गाने से इनकार कर दिया। बाद में ये डूएट गाना मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने रिकॉर्ड किया और ये सुपर डुपर हिट हुआ। ये गाना मूल रूप से देवा आनंद और साधना पर फिल्माया गया है।
लता मंगेशकर अपने सिद्धांतों और साफ-सुथरी गायकी के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने 1961 की फिल्म 'हम दोनों' के लोकप्रिय गीत को गाने से मना कर दिया था, क्यो ...और पढ़ें

नई दिल्ली। लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की सुरीली मखमली आवाज का जादू लोगों के दिलों तक पहुंचता था। वे बहुत ऊंचे सुरों को बिना आवाज टूटे गाती थीं। उन्होंने दिलीप कुमार के कहने पर अपने उर्दू उच्चारण पर बहुत मेहनत की थी और रोमांटिक गानों को बहुत ही कोमलता से गाती थीं।
लता जी ने हिंदी, मराठी, बंगाली सहित कई भाषाओं में 30 हजार से अधिक गाने गाए। इसमें रोमांटिक से लेकर दुखभरे गीत और भजन शामिल हैं। लता मंगेशकर अपने हर गाने को हमेशा परफेक्शन के साथ खत्म करना चाहती थीं फिर चाहें इसके लिए उन्हें कितनी ही बार रीटेक लेना पड़े।
उसूलों की पक्की थीं लता जी
लता मंगेशकर की एक सबसे अच्छी बात ये थी कि वो अपनी सादगी और उसूलों के लिए जानी जाती थीं। संगीत जगत में उनके छह दशकों से अधिक के करियर में ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने अपनी गरिमा और सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय बड़े प्रोजेक्ट्स को मना कर दिया। लता जी ने हमेशा साफ-सुथरी गायकी को प्राथमिकता देती थीं। अगर उन्हें किसी गाने के बोल थोड़े भी भद्दे, अश्लील या 'सस्ते' लगते थे, तो वे उसे गाने से साफ इनकार कर देती थीं। उनका मानना था कि संगीत में एक तरह की पवित्रता होनी चाहिए।
-1775658047973.jpg)
कौन सा है वो शानदार गीत?
आज ऐसा ही एक किस्सा हम आपको बताने वाले हैं जब सिंगर ने एक सुपरहिट गाने को मना कर दिया। हम बात कर रहे हैं साल 1961 में आई फिल्म 'हम दोनों'के पॉपुलर गीत 'अभी ना जाओ छोड़कर' की। गाने के बोल महान कवि साहिर लुधियानवी ने लिखे थे। गाने में एक लाइन है -"अधूरी आस छोड़कर, अधूरी प्यास छोड़कर..."
-1775658133969.jpg)
लता जी को लगा कि ये बोल थोड़े ज्यादा 'रोमांटिक' या 'बोल्ड' हैं और शायद उनकी छवि पर उतने सटीक न बैठें। इस वजह से लता जी ने इसे गाने से इनकार कर दिया। बाद में ये डूएट गाना मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने रिकॉर्ड किया और ये सुपर डुपर हिट हुआ। ये गाना मूल रूप से देवा आनंद और साधना पर फिल्माया गया है।
Labels
Mirchmasala
Post A Comment
No comments :