महात्मा गांधी को पसंद थी जिनकी आवाज... सिनेमा की 'आधुनिक मीरा' ने क्यों ठुकराया था बॉलीवुड?
महात्मा गांधी को पसंद थी जिनकी आवाज... सिनेमा की 'आधुनिक मीरा' ने क्यों ठुकराया था बॉलीवुड?
सिनेमा की वो 'आधुनिक मीरा' जिनकी आवाज के साथ देश में आजादी की पहली सुबह हुई। महात्मा गांधी को भी उनकी आवाज पसंद थी। जानिए उस गायिका के बारे में... ...और पढ़ें

किसे पता था कि 20 अप्रैल 1920 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में जन्मी एक लड़की अपनी मधुर आवाज से 'आधुनिक भारत की मीरा' कहलाएंगी। जिनकी आवाज का जादू सिर्फ आम लोगों तक नहीं, बल्कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को भी मंत्रमुग्ध कर देगा।
करीब 300 से ज्यादा गानों को आवाज देने वालीं यह गायिका का अपना एक सिद्धांत था और वह था, फिल्मों में न गाने का। जी हां, 30 और 40 के दशक में जिनके गानों के बिना लोगों की सुबह नहीं होती थी, उन्होंने कभी भी बॉलीवुड की ओर रुख नहीं किया।
आधुनिक मीरा कही जाती थीं जूथिका
यह गायिका कोई और नहीं बल्कि 'आधुनिक मीरा' कही जाने वालीं जूथिका रॉय (Juthika Roy) थीं। गायिका को उनके भक्ति संगीत के लिए जाना जाता है। उन्होंने 30 और 40 के दशक में पूरे देश में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। सबसे ज्यादा उन्हें मीरा के भजनों से पहचान मिली।

आजादी के बाद गूंजी थी जूथिका की आवाज
जूथिका रॉय ने आजादी से पहले भी गीत गाए और आजादी के बाद भी। भारत में हर घर की सुबह जूथिका के रेडियो पर बजने वाले गानों से होती थी। कहा जाता है कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत की आजादी का जश्न मनाया गया, तब जवाहर लाल नेहरू और अन्य नेताओं के भाषणों के बाद रेडियो पर जूथिका के देशप्रेम वाले गीत बजाए गए थे।
जेल में गीत सुनते थे महात्मा गांधी
जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी जूथिका रॉय के गानों के प्रशंसक थे। महात्मा गांधी तो जेल में जूथिका के गाने सुनते थे। कहा जाता है कि जब गांधीजी पुणे की जेल में थे तब वो हर सुबह प्रार्थना सभा की शुरूआत जूथिका रॉय के गाने बजाकर करते थे।

बॉलीवुड से क्यों दूर रहीं गायिका?
जूथिका रॉय ने कभी बॉलीवुड फिल्मों के लिए गाना नहीं गाया। हालांकि, उन्होंने दो बंगाली फिल्मों 'धुली' और 'रतनदीप' में गाने गाए थे। मगर उसके बाद वह फिल्मी गानों से दूर रहीं। गायिका का मानना था कि उनकी आवार ईश्वरीय भक्ति के लिए है, न कि फिल्मी परदे के नाच-गाने के लिए। आज भले ही जूथिका इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज भक्ति गीतों से अमर हो गई।
सिनेमा की वो 'आधुनिक मीरा' जिनकी आवाज के साथ देश में आजादी की पहली सुबह हुई। महात्मा गांधी को भी उनकी आवाज पसंद थी। जानिए उस गायिका के बारे में... ...और पढ़ें

किसे पता था कि 20 अप्रैल 1920 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में जन्मी एक लड़की अपनी मधुर आवाज से 'आधुनिक भारत की मीरा' कहलाएंगी। जिनकी आवाज का जादू सिर्फ आम लोगों तक नहीं, बल्कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को भी मंत्रमुग्ध कर देगा।
करीब 300 से ज्यादा गानों को आवाज देने वालीं यह गायिका का अपना एक सिद्धांत था और वह था, फिल्मों में न गाने का। जी हां, 30 और 40 के दशक में जिनके गानों के बिना लोगों की सुबह नहीं होती थी, उन्होंने कभी भी बॉलीवुड की ओर रुख नहीं किया।
आधुनिक मीरा कही जाती थीं जूथिका
यह गायिका कोई और नहीं बल्कि 'आधुनिक मीरा' कही जाने वालीं जूथिका रॉय (Juthika Roy) थीं। गायिका को उनके भक्ति संगीत के लिए जाना जाता है। उन्होंने 30 और 40 के दशक में पूरे देश में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। सबसे ज्यादा उन्हें मीरा के भजनों से पहचान मिली।
आजादी के बाद गूंजी थी जूथिका की आवाज
जूथिका रॉय ने आजादी से पहले भी गीत गाए और आजादी के बाद भी। भारत में हर घर की सुबह जूथिका के रेडियो पर बजने वाले गानों से होती थी। कहा जाता है कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत की आजादी का जश्न मनाया गया, तब जवाहर लाल नेहरू और अन्य नेताओं के भाषणों के बाद रेडियो पर जूथिका के देशप्रेम वाले गीत बजाए गए थे।
जेल में गीत सुनते थे महात्मा गांधी
जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी जूथिका रॉय के गानों के प्रशंसक थे। महात्मा गांधी तो जेल में जूथिका के गाने सुनते थे। कहा जाता है कि जब गांधीजी पुणे की जेल में थे तब वो हर सुबह प्रार्थना सभा की शुरूआत जूथिका रॉय के गाने बजाकर करते थे।
बॉलीवुड से क्यों दूर रहीं गायिका?
जूथिका रॉय ने कभी बॉलीवुड फिल्मों के लिए गाना नहीं गाया। हालांकि, उन्होंने दो बंगाली फिल्मों 'धुली' और 'रतनदीप' में गाने गाए थे। मगर उसके बाद वह फिल्मी गानों से दूर रहीं। गायिका का मानना था कि उनकी आवार ईश्वरीय भक्ति के लिए है, न कि फिल्मी परदे के नाच-गाने के लिए। आज भले ही जूथिका इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज भक्ति गीतों से अमर हो गई।
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