Apps में साइन-अप करना होगा और भी आसान! Google ने शुरू की एक खास फीचर की टेस्टिंग
Apps में साइन-अप करना होगा और भी आसान! Google ने शुरू की एक खास फीचर की टेस्टिंग
Google जल्द ही Android पर एप साइन-अप के तरीके में बदलाव कर सकता है। इससे OTP और ईमेल लिंक्स जैसे ट्रेडिशनल वेरिफिकेशन मैथड्स पर निर्भरता कम हो जाएगी। ...और पढ़ें

कोड के लिए एप्स बदलने के बजाय, यूजर्स को स्क्रीन पर एक नेटिव प्रॉम्प्ट दिखाई देगा। Photo- UnSplash.
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। Google जल्द ही Android पर एप साइन-अप के तरीके को बदल सकता है, जिससे OTP और ईमेल लिंक्स जैसे ट्रेडिशनल वेरिफिकेशन मैथड्स पर निर्भरता कम हो जाएगी। कंपनी एक ऐसे सिस्टम की टेस्टिंग कर रही है जो ईमेल वेरिफिकेशन को डिवाइस-लेवल प्रोसेस में बदल देता है, जिससे यूजर्स के लिए अकाउंट बनाना काफी आसान हो सकता है। ये बदलाव सुरक्षा को बरकरार रखते हुए ऑनबोर्डिंग को सरल बनाने पर फोकस करता है। अगर ये बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो इससे एप्स के यूजर ऑथेंटिकेशन का तरीका बदल सकता है और साइन-अप के दौरान बार-बार एप्स स्विच करने की जरूरत कम हो जाएगी।
Android पर Verified Email कैसे खत्म कर सकता है OTP कोड्स
Android Developers वेबसाइट के डॉक्यूमेंटेशन के मुताबिक, Google अपने 'Credential Manager' के जरिए Verified Email सिस्टम पेश कर रहा है। ये फीचर एप्स को डिवाइस पर स्टोर एक सुरक्षित क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करके यूजर के ईमेल एड्रेस को तुरंत कंफर्म करने की सुविधा देता है, जिससे OTP या ईमेल-बेस्ड वेरिफिकेशन लिंक्स की जरूरत खत्म हो जाती है।

यूजर्स को कोड लेने के लिए एप्स स्विच करने के बजाय, Verified Email फीचर स्क्रीन पर एक नेटिव प्रॉम्प्ट दिखाएगा। ये प्रॉम्प्ट साफ तौर पर दिखाता है कि एप किस जानकारी की रिक्वेस्ट कर रहा है, जैसे कि एक वेरिफाइड ईमेल एड्रेस। यूजर्स एक सिंगल टैप के साथ रिक्वेस्ट को अप्रूव कर सकते हैं और एप छोड़े बिना आगे बढ़ सकते हैं।
Verified Email सिस्टम डिवाइस पर पहले से मौजूद एक क्रिप्टोग्राफिकली वेरिफाइड क्रेडेंशियल पर निर्भर करता है, जो सुरक्षा बनाए रखते हुए प्रोसेस को फास्ट करने में मदद करता है। Google का कहना है कि एप्स यूजर की स्पष्ट सहमति के बिना किसी भी जानकारी को एक्सेस नहीं कर सकते और प्रॉम्प्ट में अप्रूवल से पहले डेटा शेयरिंग की पूरी डिटेल दी जाती है।
साइन-अप के अलावा, Verified Email फीचर अकाउंट रिकवरी और दूसरे सेंसिटिव एक्शन्स को भी सरल बना सकता है। यूजर्स रिकवरी ईमेल ढूंढे बिना अपने अकाउंट्स को वापस एक्सेस कर सकते हैं और जब यूजर्स अकाउंट डिटेल्स अपडेट करते हैं या ट्रांजेक्शन कंफर्म करते हैं, तो एप्स क्विक वेरिफिकेशन चेक ट्रिगर कर सकते हैं।
Google डेवलपर्स को ये भी सलाह देता है कि अगर सिस्टम अपेक्षित क्रेडेंशियल हासिल नहीं कर पाता है, तो वे मैनुअल ईमेल एंट्री या OTP-बेस्ड वेरिफिकेशन जैसे फॉलबैक ऑप्शन शामिल करें। ये सुझाव दिया गया है कि वेरिफिकेशन के बाद यूजर्स को 'पासकी' (passkeys) बनाने के लिए मोटिवेट किया जाए ताकि भविष्य में साइन-इन और भी आसान और सुरक्षित हो सके। फिलहाल, ये फीचर पर्सनल Google अकाउंट्स को सपोर्ट करता है और उन डिवाइसेस पर काम करता है जो Android 9 या उसके बाद के वर्जन्स पर चल रहे हैं। इसका बड़े पैमाने पर अपनाया जाना इस बात पर निर्भर करेगा कि डेवलपर्स कितनी जल्दी इसे अपने एप्स में इंटीग्रेट करते हैं।
Google जल्द ही Android पर एप साइन-अप के तरीके में बदलाव कर सकता है। इससे OTP और ईमेल लिंक्स जैसे ट्रेडिशनल वेरिफिकेशन मैथड्स पर निर्भरता कम हो जाएगी। ...और पढ़ें

कोड के लिए एप्स बदलने के बजाय, यूजर्स को स्क्रीन पर एक नेटिव प्रॉम्प्ट दिखाई देगा। Photo- UnSplash.
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। Google जल्द ही Android पर एप साइन-अप के तरीके को बदल सकता है, जिससे OTP और ईमेल लिंक्स जैसे ट्रेडिशनल वेरिफिकेशन मैथड्स पर निर्भरता कम हो जाएगी। कंपनी एक ऐसे सिस्टम की टेस्टिंग कर रही है जो ईमेल वेरिफिकेशन को डिवाइस-लेवल प्रोसेस में बदल देता है, जिससे यूजर्स के लिए अकाउंट बनाना काफी आसान हो सकता है। ये बदलाव सुरक्षा को बरकरार रखते हुए ऑनबोर्डिंग को सरल बनाने पर फोकस करता है। अगर ये बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो इससे एप्स के यूजर ऑथेंटिकेशन का तरीका बदल सकता है और साइन-अप के दौरान बार-बार एप्स स्विच करने की जरूरत कम हो जाएगी।
Android पर Verified Email कैसे खत्म कर सकता है OTP कोड्स
Android Developers वेबसाइट के डॉक्यूमेंटेशन के मुताबिक, Google अपने 'Credential Manager' के जरिए Verified Email सिस्टम पेश कर रहा है। ये फीचर एप्स को डिवाइस पर स्टोर एक सुरक्षित क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करके यूजर के ईमेल एड्रेस को तुरंत कंफर्म करने की सुविधा देता है, जिससे OTP या ईमेल-बेस्ड वेरिफिकेशन लिंक्स की जरूरत खत्म हो जाती है।
यूजर्स को कोड लेने के लिए एप्स स्विच करने के बजाय, Verified Email फीचर स्क्रीन पर एक नेटिव प्रॉम्प्ट दिखाएगा। ये प्रॉम्प्ट साफ तौर पर दिखाता है कि एप किस जानकारी की रिक्वेस्ट कर रहा है, जैसे कि एक वेरिफाइड ईमेल एड्रेस। यूजर्स एक सिंगल टैप के साथ रिक्वेस्ट को अप्रूव कर सकते हैं और एप छोड़े बिना आगे बढ़ सकते हैं।
Verified Email सिस्टम डिवाइस पर पहले से मौजूद एक क्रिप्टोग्राफिकली वेरिफाइड क्रेडेंशियल पर निर्भर करता है, जो सुरक्षा बनाए रखते हुए प्रोसेस को फास्ट करने में मदद करता है। Google का कहना है कि एप्स यूजर की स्पष्ट सहमति के बिना किसी भी जानकारी को एक्सेस नहीं कर सकते और प्रॉम्प्ट में अप्रूवल से पहले डेटा शेयरिंग की पूरी डिटेल दी जाती है।
साइन-अप के अलावा, Verified Email फीचर अकाउंट रिकवरी और दूसरे सेंसिटिव एक्शन्स को भी सरल बना सकता है। यूजर्स रिकवरी ईमेल ढूंढे बिना अपने अकाउंट्स को वापस एक्सेस कर सकते हैं और जब यूजर्स अकाउंट डिटेल्स अपडेट करते हैं या ट्रांजेक्शन कंफर्म करते हैं, तो एप्स क्विक वेरिफिकेशन चेक ट्रिगर कर सकते हैं।
Google डेवलपर्स को ये भी सलाह देता है कि अगर सिस्टम अपेक्षित क्रेडेंशियल हासिल नहीं कर पाता है, तो वे मैनुअल ईमेल एंट्री या OTP-बेस्ड वेरिफिकेशन जैसे फॉलबैक ऑप्शन शामिल करें। ये सुझाव दिया गया है कि वेरिफिकेशन के बाद यूजर्स को 'पासकी' (passkeys) बनाने के लिए मोटिवेट किया जाए ताकि भविष्य में साइन-इन और भी आसान और सुरक्षित हो सके। फिलहाल, ये फीचर पर्सनल Google अकाउंट्स को सपोर्ट करता है और उन डिवाइसेस पर काम करता है जो Android 9 या उसके बाद के वर्जन्स पर चल रहे हैं। इसका बड़े पैमाने पर अपनाया जाना इस बात पर निर्भर करेगा कि डेवलपर्स कितनी जल्दी इसे अपने एप्स में इंटीग्रेट करते हैं।
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