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6 साल में 19 फिल्में, पति के लिए छोड़ा करियर, बेटियों की खातिर की बगावत; 60's की सेंसेशन थीं कपूर खानदान की 'बहू'

6 साल में 19 फिल्में, पति के लिए छोड़ा करियर, बेटियों की खातिर की बगावत; 60's की सेंसेशन थीं कपूर खानदान की 'बहू'


हिंदी सिनेमा में 60 के दशक में एक ऐसी हीरोइन आई जिसने महज 6 साल में 19 फिल्में दीं और ज्यादातर हिट रहीं, लेकिन शादी के बाद उस हीरोइन की जिंदगी बिल्कुल ...और पढ़ें






हिंदी सिनेमा में सबसे मजबूत परिवार और बड़ा परिवार किसी को माना जाता है तो वो है कपूर परिवार। वो परिवार जिसकी जड़ें मानों हिंदी सिनेमा की शुरुआत से हैं। इस परिवार का सिनेमा में बेहद खास योगदान रहा है और आज हम आपको एक इसी परिवार की एक बहू की कहानी बताएंगे जिसे कपूर खानदान की बहू बनना भारी पड़ा था।

फिल्मों में ऐसे ऐसे आईं बबीता कपूर

यूं तो कपूर परिवार में हमेशा से पुरुषों का दबदबा रहा, लेकिन कपूर फैमिली की लीडिंग लेडीज ने भी सिनेमा में अपनी अलग छाप छोड़ी है। करीना कपूर (Kareena Kapoor) और करिश्मा कपूर की मम्मी बबीता कपूर (Babita Kapoor) एक वक्त पर टॉप एक्ट्रेस हुआ करती थीं। लेकिन रणधीर कपूर से शादी के बाद उन्हें खूब मुश्किलें झेलनी पड़ीं। ये कहानी हम आपको आगे बताएंगे पर पहले आप ये जान लीजिए कि बबीता शिवदासानी आखिर सिनेमा में आईं कैसे। बबीता का जन्म 20 अप्रैल 1947 को कराची में हुआ था।




आजादी से ठीक कुछ दिन पहले जन्मी बबीता का असली नाम बबीता शिवदासानी है। हालांकि आजादी के बाद बबीता का परिवार मुंबई आकर बस गया। बबीता का नाता सिंधी परिवार से रहा और उनके पिता हरि शिवदासानी खुद सिनेमा का हिस्सा रहे, ऐसे में उन्हें फिल्मी माहौल बचपन से ही मिला। बबीता की मां एक ब्रिटिश मूल की महिला थीं।

ऐसे में शिक्षा और पढ़ाई का माहौल भी अच्छा रहा। वहीं अभिनेत्री साधना उनकी चचेरी बहन (कजिन) थीं। बबीता को फिल्मों में ब्रेक निर्माता जीपी सिप्पी ने दिया। दरअसल उन्होंने जब पहली बार बबीता को देखा तो उस दौरान एक फिल्म बना रहे थे, जिसमें उन्होंने बबीता को लिया। आखिरकार फिल्म 'दस लाख' से बबीता ने सिनेमा में कदम रखा।



कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में किया काम।

फिल्म दस लाख में बबीता ने एक साधारण की लड़की का किरदार निभाया, जिससे वो दर्शकों के बीच भी अच्छी पहचान बनाकर गईं। इसके बाद बबीता राजेश खन्ना के साथ फिल्म राज में नजर आईं। फिल्म तो ज्यादा नहीं चली लेकिन बबीता के किरदार की तारीफ हुई। फिर बबीता के करियर में हिट का स्वाद लेकर आई फिल्म फर्ज।


इस फिल्म में जितेंद्र उनके हीरो थे। फिल्म का गाना 'मस्त बहारों का मैं आशिक' खूब चला। इस फिल्म से बबीता रातोंरात स्टार बन गईं। इसके बाद उन्होंने 'हसीना मान जाएगी' में दिखीं और यह फिल्म भी हिट रही। फिल्म में वो अपने चाचा सुसुर शशि कपूर की हीरोइन बनीं थीं। इसके बाद 1969 में आई फिल्म 'एक श्रीमान एक श्रीमती' से उन्होंने दर्शकों का दिल ही जीत लिया।




इन फिल्मों के बाद हर तरफ बबीता की बात होने लगी। इसके बाद वह कई हिट फिल्मों में दिखीं। बबीता ने अपने छोटे से करियर महज 6 साल के करियर में लगभग 19 फिल्में कीं और उनमें से ज्यादातर हिट रहीं।

रणधीर से शादी के बाद बदली जिंदगी

बबीता हरी शिवदासानी से बबीता कपूर बनने का उनका सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने बॉलीवुड में बबीता के छोटे करियर होने की वजह उनकी मोहब्बत भी रही हैं। वह जब अपने करियर की ऊंचाईयों पर थीं तो उन्हें अभिनेता रणधीर कपूर से प्यार हो गया था। साल 1971 बबीता की जिंदगी के लिए काफी टर्निंग प्वॉइंट रहा।




इस साल वह अभिनेता रणधीर कपूर के साथ फिल्म 'कल आज और कल' में नजर आई थीं। इस फिल्म के सेट से ही बबीता और रणधीर की लव स्टोरी शुरू हुई थी। रणधीर कपूर से शादी करने से पहले बबीता इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा बन चुकी थीं, लेकिन शादी के लिए उन्हें फिल्मी पर्दे से दूर होना पड़ा। कपूर खानदान की परंपरा के अनुसार उनके परिवार की बहू या बेटी फिल्मों में काम नहीं करती। इसलिए रणधीर और बबीता की शादी के लिए कपूर परिवार तैयार नहीं था।



फिल्में छोड़ीं और ससुराल भी छोड़ा

अपने प्यार को पाने के लिए बबीता ने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला कर लिया था और साल 1971 में राजकपूर के बड़े बेटे रणधीर के साथ सात फेरे ले लिए थे। हालांकि, बबीता और रणधीर कपूर की यह शादी ज्यादा लंबी नहीं चली सकी और दोनों ने एक-दूसरे से अलग होने का फैसला कर लिया था।


शादी के बाद रणधीर का करियर ढलान पर आ गया। वो शराब के नशे में रहने लगे, यहां तक कि उन्हें आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा। उनके पास पत्नी के खर्च उठाने और बेटियों की फीस भरने तक के पैसे नहीं रहे। इसके बाद साल 1987 में बबीता अपनी दोनों बेटियों करिश्मा और करीना को लेकर अपने पति रणधीर से अलग रहने लगीं।




अपने पति से अलग होने के बाद अकेले ही बबीता ने अपने दोनों बच्चों की परवरिश की। खासकर करिश्मा की परवरिश और उन्हें इंडस्ट्री में स्थापित करने में उन्होंने काफी मेहनत की। हालांकि कुछ सालों बाद रणबीर कपूर और बबीता के बीच चीजें बेहतर हुईं तो दोनों फिर से अक्सर साथ में देखा जाता है।




बबीता ने भले ही कम फिल्मों में काम किया, लेकिन वो सिनेमा की ग्लैमर्स हीरोइन्स में से एक रहीं और कम वक्त में बड़ी पहचान बनाकर चली गईं। बबीता के बाद उनके सपनों को उनकी बेटियों ने पूरा किया और करीना-करिश्मा हिंदी सिनेमा की टॉप एक्ट्रेसेस में शुमार रही हैं। वहीं रणधीर के साथ भी रिश्ते ठीक हैं और अब दोनों साथ ही रहते हैं।
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