अगले दशक में चांद पर विकसित होगी मानव सभ्यता, NASA ने पेश किया प्लान
अगले दशक में चांद पर विकसित होगी मानव सभ्यता, NASA ने पेश किया प्लान
नासा ने अगले दशक में चंद्रमा पर मानव सभ्यता विकसित करने और मंगल ग्रह पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाला यान भेजने की योजना प्रस्तुत की है। इस महत्वाकांक्षी ...और पढ़ें

नासा का प्लान
नासा ने अगले दशक में चंद्रमा पर बेस बनाने की योजना पेश की।
2028 तक मंगल ग्रह पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाला यान भेजेगा।
आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत 2028 में चांद पर उतरने का लक्ष्य।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नासा ने मंगलवार को चंद्रमा पर एक बेस बनाने की योजना का खाका पेश किया है। इसके तहत अगले दशक में चंद्रमा पर एक बेस बनाने के साथ मंगल ग्रह पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाला अंतरिक्ष यान भेजा जाएगा। नासा ने पृथ्वी के बाहर किसी दूसरे ग्रह पर मानव सभ्यता के विकास के लिहाज से इसे बेहद अहम कदम बताया है।
इंसानी बस्तियों की शुरुआत नासा के नए प्रशासक जेरेड आइजैकमान ने कहा कि अगले दशक में हम पृथ्वी के बाहर दूसरी दुनिया पर अपनी पहली स्थायी बस्ती बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि यह मिशन लोगों को उसी तरह प्रेरित करेगा जैसे 50 साल पहले अपोलो मिशन ने किया था।
जेरेड आइजैकमान का कहना है कि अब समय आ गया है जब हम ऐसा कुछ करें, जिससे लोग बड़े सपनों पर भरोसा कर सकें।
चीन से मुकाबला नासा का लक्ष्य
2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चांद पर उतारना है। वहीं चीन भी 2030 तक चांद पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना पर काम कर रहा है। आइजैकमान ने चीन को एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया है।
आर्टेमिस प्रोग्राम में बदलाव
नासा ने अपने आर्टेमिस प्रोग्राम में कुछ बदलाव किए हैं। आर्टेमिस 3 (2027) मिशन अब चांद पर उतरने के बजाए पृथ्वी की कक्षा में ही रहेगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के लैंडर्स के साथ जुड़ने का अभ्यास करेंगे। अगर सब ठीक रहा, तो 2028 में दो बार चांद पर उतरने की कोशिश की जाएगी।
मून बेस बनाने के तीन चरण
चांद पर बेस बनाने का काम रातों-रात नहीं होगा, इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है।
पहला चरण: छोटे रोबोटिक लैंडर और गाडि़यां भेजी जाएंगी जो सतह पर प्रयोग करेंगी।
दूसरा चरण: ऐसी बुनियादी संरचना बनाई जाएगी जहां अंतरिक्ष यात्री समय-समय पर जाकर रुक सकें।
तीसरा चरण: एक स्थायी ढांचा तैयार होगा जहां इंसान हमेशा के लिए रह सकेंगे।
इसमें रहने के घर, गाडि़यां और बिजली के लिए परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी शामिल हो सकते हैं। 20 अरब डालर का खर्च इस पूरे प्रोजेक्ट पर अगले सात सालों में लगभग 20 अरब डालर खर्च होने का अनुमान है।
मंगल ग्रह की तैयारी
नासा 2028 के अंत तक मंगल ग्रह के लिए एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाला अंतरिक्ष यान एसआर-1 फ्रीडम भेजने की योजना बना रहा है। यह यान मंगल पर तीन रोबोटिक हेलीकाप्टर ले जाएगा। ये हेलीकाप्टर वहां भविष्य में इंसानों के उतरने के लिए पानी की खोज करेंगे।
नासा ने अगले दशक में चंद्रमा पर मानव सभ्यता विकसित करने और मंगल ग्रह पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाला यान भेजने की योजना प्रस्तुत की है। इस महत्वाकांक्षी ...और पढ़ें

नासा का प्लान
नासा ने अगले दशक में चंद्रमा पर बेस बनाने की योजना पेश की।
2028 तक मंगल ग्रह पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाला यान भेजेगा।
आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत 2028 में चांद पर उतरने का लक्ष्य।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नासा ने मंगलवार को चंद्रमा पर एक बेस बनाने की योजना का खाका पेश किया है। इसके तहत अगले दशक में चंद्रमा पर एक बेस बनाने के साथ मंगल ग्रह पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाला अंतरिक्ष यान भेजा जाएगा। नासा ने पृथ्वी के बाहर किसी दूसरे ग्रह पर मानव सभ्यता के विकास के लिहाज से इसे बेहद अहम कदम बताया है।
इंसानी बस्तियों की शुरुआत नासा के नए प्रशासक जेरेड आइजैकमान ने कहा कि अगले दशक में हम पृथ्वी के बाहर दूसरी दुनिया पर अपनी पहली स्थायी बस्ती बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि यह मिशन लोगों को उसी तरह प्रेरित करेगा जैसे 50 साल पहले अपोलो मिशन ने किया था।
जेरेड आइजैकमान का कहना है कि अब समय आ गया है जब हम ऐसा कुछ करें, जिससे लोग बड़े सपनों पर भरोसा कर सकें।
चीन से मुकाबला नासा का लक्ष्य
2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चांद पर उतारना है। वहीं चीन भी 2030 तक चांद पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने की योजना पर काम कर रहा है। आइजैकमान ने चीन को एक बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताया है।
आर्टेमिस प्रोग्राम में बदलाव
नासा ने अपने आर्टेमिस प्रोग्राम में कुछ बदलाव किए हैं। आर्टेमिस 3 (2027) मिशन अब चांद पर उतरने के बजाए पृथ्वी की कक्षा में ही रहेगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के लैंडर्स के साथ जुड़ने का अभ्यास करेंगे। अगर सब ठीक रहा, तो 2028 में दो बार चांद पर उतरने की कोशिश की जाएगी।
मून बेस बनाने के तीन चरण
चांद पर बेस बनाने का काम रातों-रात नहीं होगा, इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है।
पहला चरण: छोटे रोबोटिक लैंडर और गाडि़यां भेजी जाएंगी जो सतह पर प्रयोग करेंगी।
दूसरा चरण: ऐसी बुनियादी संरचना बनाई जाएगी जहां अंतरिक्ष यात्री समय-समय पर जाकर रुक सकें।
तीसरा चरण: एक स्थायी ढांचा तैयार होगा जहां इंसान हमेशा के लिए रह सकेंगे।
इसमें रहने के घर, गाडि़यां और बिजली के लिए परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी शामिल हो सकते हैं। 20 अरब डालर का खर्च इस पूरे प्रोजेक्ट पर अगले सात सालों में लगभग 20 अरब डालर खर्च होने का अनुमान है।
मंगल ग्रह की तैयारी
नासा 2028 के अंत तक मंगल ग्रह के लिए एक परमाणु ऊर्जा से चलने वाला अंतरिक्ष यान एसआर-1 फ्रीडम भेजने की योजना बना रहा है। यह यान मंगल पर तीन रोबोटिक हेलीकाप्टर ले जाएगा। ये हेलीकाप्टर वहां भविष्य में इंसानों के उतरने के लिए पानी की खोज करेंगे।
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