ईरान में खामेनेई की मौत के बाद क्या चाहते हैं नेतन्याहू, हमास और ईरान के बाद क्या तुर्किए पर है इजरायल की नजर?
ईरान में खामेनेई की मौत के बाद क्या चाहते हैं नेतन्याहू, हमास और ईरान के बाद क्या तुर्किए पर है इजरायल की नजर?
खामेनेई की मौत के बाद नेतन्याहू ने ईरानियों से विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल ईरान राज्य के पतन में रुचि रखता है। ...और पढ़ें
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरानी के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फारसी भाषा में ईरानी जनता को सीधे संबोधित किया।
उन्होंने कहा, "सड़कों पर उतरिए, लाखों की संख्या में निकलिए, इस डर के शासन को उखाड़ फेंकने का काम पूरा कीजिए। आपके जीवन को कड़वा बनाने वाले इस तानाशाही को खत्म कीजिए।"
नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी लोगों की पीड़ा और बलिदान व्यर्थ नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, "जिस मदद की आप इच्छा कर रहे थे, वह मदद अब आ गई है।"
इजरायली प्रधानमंत्री जिस मदद का जिक्र कर रहे थे वह अमेरिका-इजरायल की हवाई हमलों के संदर्भ में था। इन हमलों में अब तक ईरान में 555 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

खामेनेई की मौत के बाद अब क्या चाहता है इजरायल?
इजरायल लंबे समय से ईरान में आंतरिक रूप से शासन परिवर्तन लाने की नीति पर काम कर रहा है और अब यह युद्ध उसी का चरम बिंदु माना जा रहा है। जानकारों के मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन अब इजरायल के प्रमुख लक्ष्य है। वहीं कई जानकार मानते हैं कि इजरायल चाहता है कि ईरान की सत्ता में अमेरिका और इजरायल की कठपुतली सरकार हो।

तुर्किए है 'नया ईरान'?
इजरायल के पूर्व सरकारी सलाहकार डैनियल लेवी ने कतरी समाचार अलजजीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि इजरायल के युद्ध लक्ष्यों में सार्वजनिक रूप से अस्पष्टता है। उनका मानना है कि इजरायल को सुचारू शासन परिवर्तन में कोई दिलचस्पी नहीं है।
लेवी ने कहा, "ज्यादातर इजरायली नेता इसे परियों की कहानी मानते हैं, हालांकि नेतन्याहू और उनके सहयोगी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करेंगे। इजरायल शासन और राज्य के पतन में दिलचस्पी रखता है। वे चाहते हैं कि ईरान अंदर से ध्वस्त हो जाए और अगर इसका असर इराक, खाड़ी देशों और पूरे क्षेत्र पर पड़े, तो भी ठीक है।"
उन्होंने कहा कि इससे इजरायल और उसके सहयोगियों को क्षेत्र में खुली छूट मिल जाएगी, फिलिस्तीनियों पर हमले जारी रखने और शायद तुर्किए के खिलाफ कार्रवाई करने की आजादी मिलेगी। इजरायल में हाल में तुर्किए विरोधी बयानबाजी बढ़ी है, जहां कुछ नेता तुर्किए को 'नया ईरान' कह रहे हैं।"
खामेनेई की मौत के बाद नेतन्याहू ने ईरानियों से विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल ईरान राज्य के पतन में रुचि रखता है। ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरानी के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फारसी भाषा में ईरानी जनता को सीधे संबोधित किया।
उन्होंने कहा, "सड़कों पर उतरिए, लाखों की संख्या में निकलिए, इस डर के शासन को उखाड़ फेंकने का काम पूरा कीजिए। आपके जीवन को कड़वा बनाने वाले इस तानाशाही को खत्म कीजिए।"
नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी लोगों की पीड़ा और बलिदान व्यर्थ नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, "जिस मदद की आप इच्छा कर रहे थे, वह मदद अब आ गई है।"
इजरायली प्रधानमंत्री जिस मदद का जिक्र कर रहे थे वह अमेरिका-इजरायल की हवाई हमलों के संदर्भ में था। इन हमलों में अब तक ईरान में 555 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

खामेनेई की मौत के बाद अब क्या चाहता है इजरायल?
इजरायल लंबे समय से ईरान में आंतरिक रूप से शासन परिवर्तन लाने की नीति पर काम कर रहा है और अब यह युद्ध उसी का चरम बिंदु माना जा रहा है। जानकारों के मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन अब इजरायल के प्रमुख लक्ष्य है। वहीं कई जानकार मानते हैं कि इजरायल चाहता है कि ईरान की सत्ता में अमेरिका और इजरायल की कठपुतली सरकार हो।

तुर्किए है 'नया ईरान'?
इजरायल के पूर्व सरकारी सलाहकार डैनियल लेवी ने कतरी समाचार अलजजीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि इजरायल के युद्ध लक्ष्यों में सार्वजनिक रूप से अस्पष्टता है। उनका मानना है कि इजरायल को सुचारू शासन परिवर्तन में कोई दिलचस्पी नहीं है।
लेवी ने कहा, "ज्यादातर इजरायली नेता इसे परियों की कहानी मानते हैं, हालांकि नेतन्याहू और उनके सहयोगी इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करेंगे। इजरायल शासन और राज्य के पतन में दिलचस्पी रखता है। वे चाहते हैं कि ईरान अंदर से ध्वस्त हो जाए और अगर इसका असर इराक, खाड़ी देशों और पूरे क्षेत्र पर पड़े, तो भी ठीक है।"
उन्होंने कहा कि इससे इजरायल और उसके सहयोगियों को क्षेत्र में खुली छूट मिल जाएगी, फिलिस्तीनियों पर हमले जारी रखने और शायद तुर्किए के खिलाफ कार्रवाई करने की आजादी मिलेगी। इजरायल में हाल में तुर्किए विरोधी बयानबाजी बढ़ी है, जहां कुछ नेता तुर्किए को 'नया ईरान' कह रहे हैं।"
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