Live TV

राज्य

[States][twocolumns]

देश

[Desh][list]

राजनीति

[Politics][list]

AI में वर्ल्ड पॉवर बन सकता है भारत', CUJ के कुलपति ने कहा-झारखंड में असीम संभावनाएं

AI में वर्ल्ड पॉवर बन सकता है भारत', CUJ के कुलपति ने कहा-झारखंड में असीम संभावनाएं


सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने कहा कि भारत AI में विश्व शक्ति बन सकता है। दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के ...और पढ़ें





सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के कुलपति (कार्यवाहक) प्रो. सारंग मेधेकर। फोटो जागरण

 फरवरी माह में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक परिदृश्य में आगामी दिनों बदलाव देखने को मिलेगा। इस आयोजन के बाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में भी AI से संबंधित कोर्स और गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।


दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम ने वैश्विक चर्चा को महज सुरक्षा संबंधी चिंताओं से हटाकर जनसंख्या स्तर पर AI के व्यावहारिक तैनाती तर्क (डीप्लायमेंट लाजिक) की ओर मोड़ दिया।

उक्त बातें सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के कुलपति (कार्यवाहक) प्रो. सारंग मेधेकर ने दैनिक जागरण के वरीय संवाददाता कुमार गौरव से विशेष बातचीत के क्रम में कही।

बता दें कि प्रो. मेधेकर एक भौतिक विज्ञानी हैं एवं अकादमिक क्षेत्र में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी पहचान है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में आयोजित AI समिट का समापन AI के प्रभाव पर नई दिल्ली घोषणापत्र के साथ हुआ, जिस पर अमेरिका, चीन और फ्रांस सहित 88 देशों ने हस्ताक्षर किए। पेश है AI व यूनिवर्सिटी से जुड़ी बातों के अंश...

सवाल : दिल्ली में आयोजित AI समिट का प्रभाव सीयूजे में कितना देखने को मिलेगा?

कुलपति : बेशक, यह आयोजन वैश्विक स्तर पर हुआ है लेकिन इसका असर शैक्षणिक जगत पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। सीयूजे में भी आगामी दिनों AI और मशीन लर्निंग का व्यापक असर देखने को मिलेगा।


पूर्व में AI के नकारात्मक पहलुओं को ही सामने लाया जाता था लेकिन यह पहला अवसर है कि पूरे विश्व को भारत ने AI के बारे सकारात्मक सोचने को विवश किया है।
सवाल : इस दिशा में सीयूजे में क्या कोई कार्ययोजना तैयार की गई है?

कुलपति : सीयूजे में क्वांटम फिजिक्स के सहारे AI और मशीन लर्निंग को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए जल्द ही कार्ययोजना तैयार कर अमल में लाने का प्रयास किया जाएगा।

सवाल : इससे इतर आगामी दिनों और क्या-क्या गतिविधियां यहां संचालित होंगी?

कुलपति : सीयूजे को रिसर्च इंटेंसिव यूनिवर्सिटी के तौर पर डेवलप किया जाएगा। ताकि इसकी वैश्विक पहचान बन सके। सभी फैकल्टी को निर्देश भी दिया गया है कि वे रिसर्च वर्क की ओर उन्मुख हों और अपने शोधार्थियों को भी प्रेरित करते रहें।

सवाल : इसके कितने दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेंगे?

कुलपति : किसी भी यूनिवर्सिटी की असल पहचान उसके रिसर्च वर्क से ही होती है। आमतौर पर हम शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित रहते हैं लेकिन जब उम्दा रिसर्च वर्क सामने आता है तो इसका फलक बड़ा होता है और वैश्विक पहचान बनती है। इसके बाद शोध परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कई फंड भी मिलते हैं।

सवाल : झारखंड के परिप्रेक्ष्य में देखें तो AI आधारित तकनीक का किन-किन क्षेत्रों में प्रयोग किया जा सकता है?

कुलपति : झारखंड में AI प्रयोग की अपार संभावनाएं हैं। यहां यदि उद्योगों का जाल बिछा है तो कृषि योग्य भूमि भी है। साथ ही कई नामी गिरामी शैक्षणिक संस्थान भी हैं। इन क्षेत्रों में AI का व्यापक प्रयोग किया जा सकता है। परंपरागत रूप से भारत के खनिज संपदा के केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त झारखंड राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्रांति की बहुआयामी क्षमताएं हैं।


92 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि वर्षा पर निर्भर होने के कारण, AI -संचालित सटीक खेती जल उपयोग को अनुकूलित कर सकती है और फसल संबंधी रोगों की भविष्यवाणी कर सकती है, जिससे संभावित रूप से पैदावार में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।


इस्पात और खनन के केंद्र के रूप में, AI का उपयोग भारी मशीनरी में पूर्वानुमानित रख-रखाव और भूमिगत खानों में सुरक्षा प्रोटोकाल को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
सवाल : AI आधारित गतिविधियां शुरू करने के बाद कितना लाभ मिलेगा।

कुलपति : आधार और यूपीआइ ने हमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) की एक मजबूत नींव पहले ही प्रदान कर दी है। भाषिनी जैसे प्लेटफार्म में AI को एकीकृत करके, 1.4 अरब लोगों के लिए भाषा की बाधाएं दूर हो रही हैं।


वैश्विक बड़ी टेक कंपनियों (बिग टेक) पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, भारत स्वयं की क्षमता निर्माण को बढ़ावा दे रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि AI माडल स्थानीय डेटा पर प्रशिक्षित हों और क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहलुओं को प्रतिबिंबित करें।

सवाल : क्या स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा।

कुलपति : बेशक, सीयूजे में AI आधारित गतिविधियां आयोजित करने के साथ साथ रिसर्च वर्क को बढ़ावा मिल रहा है। स्टार्टअप, स्वास्थ्य सेवा और कृषि क्षेत्र में उच्च प्रभाव वाले, कम लागत वाले AI समाधान विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सवाल : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का झारखंड में कितना अवसर देखते हैं।

कुलपति : झारखंड जैसे राज्यों के लिए, AI युग एक दुर्लभ छलांग लगाने का अवसर प्रदान करता है, जिसमें अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों को नवीन समझदार प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर, झारखंड, भारत के औद्योगिक अतीत के इंजन रूम से उसके डिजिटल भविष्य में एक महत्वपूर्ण केंद्र में परिवर्तित हो सकता है।

सवाल : सीयूजे से जुड़े कई मुद्दे इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर वायरल है, क्या कहेंगे।

कुलपति : इस पर विशेष हम कुछ कह नहीं सकते लेकिन इतना तय है कि सीयूजे को लंग्स ऑफ रांची बनाने की योजना है। हमने अपने इंजीनियर को कैंपस के उन क्षेत्रों को चिन्हित करने का निर्देश दिया है, जहां बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जा सके। हम फलदार पौधों को प्रमुखता देंगे ताकि यहां पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को एक हरा-भरा और सौहार्दपूर्ण माहौल मिल सके।

सवाल : कब तक ये कार्ययोजना धरातल पर उतरेंगी।

कुलपति : इसी मानसून सत्र से इसे अमल में लाया जाएगा। हमने वन विभाग से संपर्क साधने का प्रयास किया है। बातचीत का दौर चल रहा है और हर हाल में सीयूजे कैंपस को ग्रीन कैंपस बनाया जाएगा।
Post A Comment
  • Facebook Comment using Facebook
  • Disqus Comment using Disqus

No comments :


मिर्च मसाला

[Mirchmasala][threecolumns]

विदेश

[Videsh][twocolumns]

बिज़नेस

[Business][list]

स्पोर्ट्स

[Sports][bsummary]