बासुकीनाथ मंदिर में 3 मार्च को बदल जाएंगे पूजा नियम, चंद्रग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?
बासुकीनाथ मंदिर में 3 मार्च को बदल जाएंगे पूजा नियम, चंद्रग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?
तीन मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण बासुकीनाथ मंदिर की पूजा व्यवस्था में बदलाव किया गया है। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। मंदिर के कपाट ...और पढ़ें

ग्रहण काल में जप ध्यान करें, बाद में स्नान दान।
बासुकीनाथ (दुमका)। Chandra Grahan 2026 kab lgega: तीन मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण बासुकीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। मंदिर के सहायक प्रबंधक सुभाष राव ने बताया कि यह ग्रहण एक खण्डग्रास चंद्र ग्रहण है।
यह Chandra Grahan दोपहर 3. 20 मिनट पर शुरू होकर शाम 6. 46 मिनट तक चलेगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की है। निर्णय के अनुसार इस दिन बासुकीनाथ मंदिर के कपाट दोपहर 1 बजे बंद कर दिए जाएंगे और शाम को 7.30 बजे गर्भ गृह के कपाट खोल दिए जाएंगे।
दिन में रुद्राभिषेक एवं रात्रि में श्रृंगार पूजन नहीं की जाएगी। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर गर्भगृह में गंगाजल से साफ सफाई की जाएगी। सुभाष राव ने कहा कि ग्रहण काल के दौरान मंदिर में यात्री, श्रद्धालु, पंडा प पुरोहित अपने इष्ट देव का स्मरण जप, ध्यान करेंगे।
ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें?
मंगलवार को लगने वाले Lunar Eclipse 2026 को लेकर जरमुंडी व बासुकीनाथ में ग्रामीण ग्रहण काल, मोक्ष काल, सूतक काल की समयावधि को लेकर चर्चा करते रहे।
बासुकीनाथ मन्दिर के कुंडली विशेषज्ञ पंडित प्यारेलाल गैरोला, प्रेम बाबा ने बताया कि सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण सूतक लगने के बाद से और सूतक समाप्त होने तक भोजन नहीं करना चाहिए।
मंदबुद्धि, बीमार, वृद्ध बालक पर यह दोष उतना नहीं लगता है। ग्रहण के वक्त पत्ते, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। ग्रहण के वक्त बाल नहीं कटवाना चाहिए। ग्रहण के वक्त सोने से रोग पकड़ता है।
ग्रहण मोक्ष के उपरांत पवित्र सरोवर, तालाब, गंगा नदी अथवा अन्य पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए एवं यथाशक्ति दान, ध्यान का कर्म करना चाहिए। इससे घर में समृद्धि आती है।
ग्रहण के समय बच्चे और मां की करें विशेष देखभाल
सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहण गर्भवती महिलाओं के लिए खराब होते हैं। ग्रहण की अवधि के दौरान बच्चे और मां की विशेष देखभाल की जानी चाहिए। हर गर्भवती महिला को सूर्य व चंद्र ग्रहण के दौरान बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए।
हालांकि किसी भी दावे के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है, लेकिन अगर आप ज्योतिष में विश्वास करते हैं, तो आप खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं।
तीन मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण बासुकीनाथ मंदिर की पूजा व्यवस्था में बदलाव किया गया है। ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। मंदिर के कपाट ...और पढ़ें

ग्रहण काल में जप ध्यान करें, बाद में स्नान दान।
बासुकीनाथ (दुमका)। Chandra Grahan 2026 kab lgega: तीन मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण बासुकीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है। मंदिर के सहायक प्रबंधक सुभाष राव ने बताया कि यह ग्रहण एक खण्डग्रास चंद्र ग्रहण है।
यह Chandra Grahan दोपहर 3. 20 मिनट पर शुरू होकर शाम 6. 46 मिनट तक चलेगा। ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की है। निर्णय के अनुसार इस दिन बासुकीनाथ मंदिर के कपाट दोपहर 1 बजे बंद कर दिए जाएंगे और शाम को 7.30 बजे गर्भ गृह के कपाट खोल दिए जाएंगे।
दिन में रुद्राभिषेक एवं रात्रि में श्रृंगार पूजन नहीं की जाएगी। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर गर्भगृह में गंगाजल से साफ सफाई की जाएगी। सुभाष राव ने कहा कि ग्रहण काल के दौरान मंदिर में यात्री, श्रद्धालु, पंडा प पुरोहित अपने इष्ट देव का स्मरण जप, ध्यान करेंगे।
ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें?
मंगलवार को लगने वाले Lunar Eclipse 2026 को लेकर जरमुंडी व बासुकीनाथ में ग्रामीण ग्रहण काल, मोक्ष काल, सूतक काल की समयावधि को लेकर चर्चा करते रहे।
बासुकीनाथ मन्दिर के कुंडली विशेषज्ञ पंडित प्यारेलाल गैरोला, प्रेम बाबा ने बताया कि सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण सूतक लगने के बाद से और सूतक समाप्त होने तक भोजन नहीं करना चाहिए।
मंदबुद्धि, बीमार, वृद्ध बालक पर यह दोष उतना नहीं लगता है। ग्रहण के वक्त पत्ते, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। ग्रहण के वक्त बाल नहीं कटवाना चाहिए। ग्रहण के वक्त सोने से रोग पकड़ता है।
ग्रहण मोक्ष के उपरांत पवित्र सरोवर, तालाब, गंगा नदी अथवा अन्य पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए एवं यथाशक्ति दान, ध्यान का कर्म करना चाहिए। इससे घर में समृद्धि आती है।
ग्रहण के समय बच्चे और मां की करें विशेष देखभाल
सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहण गर्भवती महिलाओं के लिए खराब होते हैं। ग्रहण की अवधि के दौरान बच्चे और मां की विशेष देखभाल की जानी चाहिए। हर गर्भवती महिला को सूर्य व चंद्र ग्रहण के दौरान बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए।
हालांकि किसी भी दावे के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है, लेकिन अगर आप ज्योतिष में विश्वास करते हैं, तो आप खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं।
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