पहल ने बदली सूरत: मृत्यु भोज के पैसों से राजस्थान के 830 सरकारी स्कूलों की बदल गई तस्वीर, संवर गया बच्चों का भविष्य
पहल ने बदली सूरत: मृत्यु भोज के पैसों से राजस्थान के 830 सरकारी स्कूलों की बदल गई तस्वीर, संवर गया बच्चों का भविष्य
राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में किसानों ने चार साल में 37.49 करोड़ रुपये एकत्र कर शिक्षा विभाग को सौंपा है। इस राशि से सरकारी स्कूलों में नए कमरे, शौ ...और पढ़ें

मृत्यु भोज के पैसों से राजस्थान के 830 सरकारी स्कूलों की बदल गई तस्वीर (फोटो- AI Generated)
HIGHLIGHTS
सरकारी स्कूलों में नए कमरे, शौचालय, फर्नीचर, कंप्यूटर लैब और खेल सुविधाएं विकसित की गईं
ग्रामीणों ने पैसा एकत्र करने के लिए मृत्यु भोज जैसी प्रथा बंद करने का फैसला किया था
जयपुर। राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में किसानों ने चार साल में 37.49 करोड़ रुपये एकत्र कर शिक्षा विभाग को सौंपा है। इस राशि से सरकारी स्कूलों में नए कमरे, शौचालय, फर्नीचर, कंप्यूटर लैब और खेल सुविधाएं विकसित की गईं।
ग्रामीणों ने पैसा एकत्र करने के लिए मृत्यु भोज जैसी प्रथा बंद करने का फैसला किया था। साथ ही कई किसानों ने सरसों की तूड़ी ( पशुओं का चारा) बेचकर भी पैसा एकत्र किया। कई परिवार ऐसे भी हैं जो प्रतिवर्ष अपनी बचत में से एक हिस्सा स्कूलों के विकास पर खर्च करते हैं।
कलक्टर कानाराम ने बताया कि जिला प्रशासन ने करीब चार साल पहले ''उड़ान योजना'' प्रारंभ की थी। इस योजना के तहत किसानों ने अपनी मर्जी से सौ रुपये से लेकर लाखों तक का योगदान किया।
देखते ही देखते यह सहयोग राशि चार साल में 37.49 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई। इस धन से 830 से ज्यादा स्कूल जो कभी उपेक्षित थे, वे अब बच्चों के सपनों के केंद्र बन गए। जिला प्रशासन ऐसे किसानों का भामाशाह सम्मान समारोह से सम्मानित करता।
राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में किसानों ने चार साल में 37.49 करोड़ रुपये एकत्र कर शिक्षा विभाग को सौंपा है। इस राशि से सरकारी स्कूलों में नए कमरे, शौ ...और पढ़ें

मृत्यु भोज के पैसों से राजस्थान के 830 सरकारी स्कूलों की बदल गई तस्वीर (फोटो- AI Generated)
HIGHLIGHTS
सरकारी स्कूलों में नए कमरे, शौचालय, फर्नीचर, कंप्यूटर लैब और खेल सुविधाएं विकसित की गईं
ग्रामीणों ने पैसा एकत्र करने के लिए मृत्यु भोज जैसी प्रथा बंद करने का फैसला किया था
जयपुर। राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में किसानों ने चार साल में 37.49 करोड़ रुपये एकत्र कर शिक्षा विभाग को सौंपा है। इस राशि से सरकारी स्कूलों में नए कमरे, शौचालय, फर्नीचर, कंप्यूटर लैब और खेल सुविधाएं विकसित की गईं।
ग्रामीणों ने पैसा एकत्र करने के लिए मृत्यु भोज जैसी प्रथा बंद करने का फैसला किया था। साथ ही कई किसानों ने सरसों की तूड़ी ( पशुओं का चारा) बेचकर भी पैसा एकत्र किया। कई परिवार ऐसे भी हैं जो प्रतिवर्ष अपनी बचत में से एक हिस्सा स्कूलों के विकास पर खर्च करते हैं।
कलक्टर कानाराम ने बताया कि जिला प्रशासन ने करीब चार साल पहले ''उड़ान योजना'' प्रारंभ की थी। इस योजना के तहत किसानों ने अपनी मर्जी से सौ रुपये से लेकर लाखों तक का योगदान किया।
देखते ही देखते यह सहयोग राशि चार साल में 37.49 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई। इस धन से 830 से ज्यादा स्कूल जो कभी उपेक्षित थे, वे अब बच्चों के सपनों के केंद्र बन गए। जिला प्रशासन ऐसे किसानों का भामाशाह सम्मान समारोह से सम्मानित करता।
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