'धोबी' से निकला Sholay के 'गब्बर सिंह' का ये आइकॉनिक डायलॉग, खूब हुई थी ऑडियो रिकॉर्ड्स की बिक्री
'धोबी' से निकला Sholay के 'गब्बर सिंह' का ये आइकॉनिक डायलॉग, खूब हुई थी ऑडियो रिकॉर्ड्स की बिक्री
शोले (Sholay) में 'गब्बर सिंह' यानी अमजद खान (Amjad Khan) के सभी डायलॉग्स आइकॉनिक रहे। एक डायलॉग तो 'धोबी' से इंस्पायर था। ...और पढ़ें

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। शोले फिल्म में गब्बर का किरदार निभाने वाले अमजद खान (Amjad Khan) से एक बार उनके पिता जयंत ने कहा था- 'तुम खास (लोगों) के नकल करोगे तो पहचाने जाओगे, अगर नकल ही करनी है तो आम (लोगों) के करो'।
पिता की कही यह बात अमजद खान ने अपने जहन में इस तरह बसा लिया कि उन्होंने आसपास के लोगों को ऑब्जर्व करना सीख लिया। एक बार वह एक धोबी से इंस्पायर हुए और उनका एक डायलॉग अपने स्टाइल में बोला जो अब आइकॉनिक बन चुका है।
शोले से रातोंरात स्टार बने थे अमजद खान
इस बात में कोई शक नहीं है कि रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी शोले (Sholay), अमजद खान के करियर की सबसे बड़ी फिल्म थी। इसी फिल्म ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। उन्हें वो गब्बर बना दिया जो सिनेमा में अमर बन गया।

गब्बर के डायलॉग्स...
"कितने आदमी थे?"
"जो डर गया, समझो मर गया।"
"बहुत याराना लगता है।"
"ये हाथ हमको दे दे ठाकुर।"
"तेरा क्या होगा कालिया?"
"अरे ओ सांभा।"
"जब तक तेरे पैर चलेंगे, उसकी सांस चलेगी। तेरे पैर रुक, तो बंदूक चलेगी।"
पिता की सलाह ने बदली राह
यह कुछ ऐसे आइकॉनिक डायलॉग्स रहे, जो 'शोले' के 50 साल पूरे होने के बाद भी भुलाए नहीं जा सकते हैं। मगर इनमें से एक डायलॉग ऐसा था, जो वास्तव में उनके एक धोबी से इंस्पायर्ड था। जी हां, खुद अमजद की पत्नी ने खुलासा किया था।
धोबी से इंस्पायर्ड था ये डायलॉग
रोशमिला भट्टाचार्य की Bollywood's Iconic Villains Bad Men के मुताबिक, अमजद की पत्नी शहला ने यह किस्सा शेयर किया था। उन्होंने कहा था कि एक बार उनके ससुर जयंत ने अपने बेटे (अमजद खान) को सलाह दी थी, 'तुम खास (लोगों) के नकल करोगे तो पहचाने जाओगे, अगर नकल ही करनी है तो आम (लोगों) के करो'। यह शब्द उनके दिल में उतर गए और फिर उन्होंने अपने आसपास के लोगों से प्रेरणा ली।

शहला ने आगे बताया, "हमारे पास एक धोबी था जो अपनी पत्नी को पुकारता था, "'अरे ओ शांति' और इसी से 'अरे ओ सांभा' डायलॉग निकला।" शोले के गानों के साथ-साथ गब्बर सिंह के आइकॉनिक डायलॉग्स के ऑडियो रिकॉर्ड की भी खूब बिक्री हुई थी।
शोले (Sholay) में 'गब्बर सिंह' यानी अमजद खान (Amjad Khan) के सभी डायलॉग्स आइकॉनिक रहे। एक डायलॉग तो 'धोबी' से इंस्पायर था। ...और पढ़ें
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। शोले फिल्म में गब्बर का किरदार निभाने वाले अमजद खान (Amjad Khan) से एक बार उनके पिता जयंत ने कहा था- 'तुम खास (लोगों) के नकल करोगे तो पहचाने जाओगे, अगर नकल ही करनी है तो आम (लोगों) के करो'।
पिता की कही यह बात अमजद खान ने अपने जहन में इस तरह बसा लिया कि उन्होंने आसपास के लोगों को ऑब्जर्व करना सीख लिया। एक बार वह एक धोबी से इंस्पायर हुए और उनका एक डायलॉग अपने स्टाइल में बोला जो अब आइकॉनिक बन चुका है।
शोले से रातोंरात स्टार बने थे अमजद खान
इस बात में कोई शक नहीं है कि रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी शोले (Sholay), अमजद खान के करियर की सबसे बड़ी फिल्म थी। इसी फिल्म ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। उन्हें वो गब्बर बना दिया जो सिनेमा में अमर बन गया।
गब्बर के डायलॉग्स...
"कितने आदमी थे?"
"जो डर गया, समझो मर गया।"
"बहुत याराना लगता है।"
"ये हाथ हमको दे दे ठाकुर।"
"तेरा क्या होगा कालिया?"
"अरे ओ सांभा।"
"जब तक तेरे पैर चलेंगे, उसकी सांस चलेगी। तेरे पैर रुक, तो बंदूक चलेगी।"
पिता की सलाह ने बदली राह
यह कुछ ऐसे आइकॉनिक डायलॉग्स रहे, जो 'शोले' के 50 साल पूरे होने के बाद भी भुलाए नहीं जा सकते हैं। मगर इनमें से एक डायलॉग ऐसा था, जो वास्तव में उनके एक धोबी से इंस्पायर्ड था। जी हां, खुद अमजद की पत्नी ने खुलासा किया था।
धोबी से इंस्पायर्ड था ये डायलॉग
रोशमिला भट्टाचार्य की Bollywood's Iconic Villains Bad Men के मुताबिक, अमजद की पत्नी शहला ने यह किस्सा शेयर किया था। उन्होंने कहा था कि एक बार उनके ससुर जयंत ने अपने बेटे (अमजद खान) को सलाह दी थी, 'तुम खास (लोगों) के नकल करोगे तो पहचाने जाओगे, अगर नकल ही करनी है तो आम (लोगों) के करो'। यह शब्द उनके दिल में उतर गए और फिर उन्होंने अपने आसपास के लोगों से प्रेरणा ली।
शहला ने आगे बताया, "हमारे पास एक धोबी था जो अपनी पत्नी को पुकारता था, "'अरे ओ शांति' और इसी से 'अरे ओ सांभा' डायलॉग निकला।" शोले के गानों के साथ-साथ गब्बर सिंह के आइकॉनिक डायलॉग्स के ऑडियो रिकॉर्ड की भी खूब बिक्री हुई थी।
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Mirchmasala
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