अगले वर्ष संभव है ब्याज दरों में कटौती, वर्ष 2024 में कर्ज के सस्ता होने की संभावना
अगले वर्ष संभव है ब्याज दरों में कटौती, वर्ष 2024 में कर्ज के सस्ता होने की संभावना
रेपो रेट से ही होम लोन आटो लोन व दूसरे बैंकिंग लोन की दरों को तय करने के लिए आधार बनाया जाता है। जब रेपो रेट बढ़ाए जाते हैं तो उक्त लोन महंगे हो जाते हैं और जब इनमें कटौती की जाती है तो ये सस्ते हो जाते हैं। पिछले साल महंगाई को देखते हुए आरबीआइ ने रेपो रेट को चार फीसद से बढ़ा कर 6.50 फीसद कर दिया था।
पिछले साल आरबीआइ ने रेपो रेट को चार फीसद बढ़ाया था।
महंगाई की स्थिति भले ही बहुत कुछ अंकुश में नहीं हो लेकिन अभी तक के हालात बता रहे हैं कि इसकी स्थिति बहुत खराब भी नहीं होने वाली है। ऐसे में कर्ज के सस्ता होने की संभावना अगले वर्ष 2024 में बनी हुई है।
क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डी.के जोशी का कहना है कि जनवरी से मार्च, 2024 की तिमाही में रेपो रेट में कटौती की संभावना है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि खाद्य उत्पादों में महंगाई की जो स्थिति बनी है उससे दूसरे क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़े।
रेपो रेट में हो सकती है कटौती
जोशी का अनुमान है कि अगले वर्ष की शुरुआत में रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती हो सकती है। एयूएम कैप्टिल के नेशनल हेड (वेल्थ) महेश अग्रवाल नहीं मानते हैं कि रेपो रेट में चालू वित्त वर्ष में कटौती हो सकती है। लेकिन अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में रेपो रेट में कटौती हो सकती है। उनका कहना है कि आरबीआइ गवर्नर ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है जो उम्मीदों के मुताबिक है।
पिछले साल बढ़ा था रेपो रेट
सनद रहे कि रेपो रेट से ही होम लोन, आटो लोन व दूसरे बैंकिंग लोन की दरों को तय करने के लिए आधार बनाया जाता है। जब रेपो रेट बढ़ाए जाते हैं तो उक्त लोन महंगे हो जाते हैं और जब इनमें कटौती की जाती है तो ये सस्ते हो जाते हैं। पिछले साल महंगाई को देखते हुए आरबीआइ ने रेपो रेट को चार फीसद से बढ़ा कर 6.50 फीसद कर दिया था।
रेपो रेट से ही होम लोन आटो लोन व दूसरे बैंकिंग लोन की दरों को तय करने के लिए आधार बनाया जाता है। जब रेपो रेट बढ़ाए जाते हैं तो उक्त लोन महंगे हो जाते हैं और जब इनमें कटौती की जाती है तो ये सस्ते हो जाते हैं। पिछले साल महंगाई को देखते हुए आरबीआइ ने रेपो रेट को चार फीसद से बढ़ा कर 6.50 फीसद कर दिया था।
पिछले साल आरबीआइ ने रेपो रेट को चार फीसद बढ़ाया था।महंगाई की स्थिति भले ही बहुत कुछ अंकुश में नहीं हो लेकिन अभी तक के हालात बता रहे हैं कि इसकी स्थिति बहुत खराब भी नहीं होने वाली है। ऐसे में कर्ज के सस्ता होने की संभावना अगले वर्ष 2024 में बनी हुई है।
क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डी.के जोशी का कहना है कि जनवरी से मार्च, 2024 की तिमाही में रेपो रेट में कटौती की संभावना है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि खाद्य उत्पादों में महंगाई की जो स्थिति बनी है उससे दूसरे क्षेत्र पर कोई असर नहीं पड़े।
रेपो रेट में हो सकती है कटौती
जोशी का अनुमान है कि अगले वर्ष की शुरुआत में रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती हो सकती है। एयूएम कैप्टिल के नेशनल हेड (वेल्थ) महेश अग्रवाल नहीं मानते हैं कि रेपो रेट में चालू वित्त वर्ष में कटौती हो सकती है। लेकिन अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में रेपो रेट में कटौती हो सकती है। उनका कहना है कि आरबीआइ गवर्नर ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है जो उम्मीदों के मुताबिक है।
पिछले साल बढ़ा था रेपो रेट
सनद रहे कि रेपो रेट से ही होम लोन, आटो लोन व दूसरे बैंकिंग लोन की दरों को तय करने के लिए आधार बनाया जाता है। जब रेपो रेट बढ़ाए जाते हैं तो उक्त लोन महंगे हो जाते हैं और जब इनमें कटौती की जाती है तो ये सस्ते हो जाते हैं। पिछले साल महंगाई को देखते हुए आरबीआइ ने रेपो रेट को चार फीसद से बढ़ा कर 6.50 फीसद कर दिया था।
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