'कोड नेम अब्दुल' पर तनिषा मुखर्जी बोलीं- फिल्म के जरिए मैंने पहली बार एक मुस्लिम लड़की का रोल निभाया है
10 दिसंबर को रिलीज होने जा रही फिल्म 'कोड नेम अब्दुल' में तनिषा मुखर्जी लीड रोल निभा रही हैं। हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान तनिषा ने अपने कैरेक्टर की खासियत सहित, एग्स फ्रीजिंग आदि के बारे में बात की और बताया कि उन्होंने इस फिल्म के जरिए पहली बार एक मुस्लिम लड़की का रोल निभाया है।
आपके किरदार रॉ एजेंट की खासियत क्या है?फिल्म में मैं सलमा का किरदार निभा रही हूं। इसकी खासियत यह है कि यह बहुत इनोसेंट है। मेरे लिए इस रोल को प्ले करना काफी इंटरेस्टिंग रहा। यह एक स्ट्रांग डिक्टेटिव की तरह का रोल है। इस फिल्म के जरिए मैंने पहली बार एक मुस्लिम लड़की का किरदार निभाया है। वो बहुत ट्रेडिशनल मुस्लिम लड़की है। सलमा मेन कैरेक्टर तारिक की सिस्टर इन लॉ है। इस फिल्म में दिखाया जाएगा कि सलमा को लोग कैसे किडनैप करते हैं और उससे इंफॉर्मेशन निकालने के लिए कैसे टॉर्चर करते हैं। यह बहुत ही इंटरेस्टिंग कैरेक्टर है।कुछ समय से आप पर्दे और स्क्रीन से दूर हैं। इसकी वजह क्या है?
जी नहीं, मैं पर्दे से दूर नहीं रही हूं। मुझे लगता है कि हमारी फिल्म की रिलीज डेट में वक्त लगता है, जबकि हम तो काम करते रहते हैं। अभी दो साल से कोविड-19 आ गया। ऐसा नहीं है कि मैंने काम नहीं किया है। लेकिन यह जो गैप आया है, वो रिलीज डेट टलने की वजह से आया है। मैंने आखिरी फिल्म 'अन्ना' की थी, जो स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। इसके बाद मैंने एक शॉर्ट फिल्म की, जो डिजिटल पर रिलीज हुई। इस बीच मैंने बहुत सारा काम किया है। उसमें से अब 'कोड नेम अब्दुल' आ रही है। लोगों को फिल्में रिलीज करने में देर लग रही है, पर ऐसा नहीं है कि मैं प्रोजेक्ट्स नहीं कर रही हूं। अभी तो ओटीटी प्लैटफॉर्म की वजह से इंडस्ट्री में काम बहुत ज्यादा हो गया है।
आपने एग्स फ्रीजिंग का बहुत बड़ा फैसला लिया। इस पर घरवालों का क्या कहना था?
हां, यह बहुत बड़ा फैसला था, पर यह मेरा अपना फैसला था। एक औरत का अपने शरीर पर हक होता है और उस हक को मैंने पूरी तरह निभाया। मेरे इस फैसले में मेरी मां तनुजा और मेरी बहन काजोल मेरे साथ थीं। इसमें फैमिली सपोर्ट सिस्टम बन जाता है। मेरा सपोर्ट सिस्टम बहुत अच्छा है और मैं इंडिपेंडेंट हूं। हमारी फैमिली में हमेशा से ही बहुत स्ट्रांग वुमेन रही हैं। हम सब बहुत स्ट्रांग माइंडेड और इंडिपेंडेंट वुमेन हैं। किसी भी चीज के लिए मैं वही करती हूं, जो मुझे सही लगता है।
हमने सुना था कि आपको एग्स फ्रीजिंग के साइड इफेक्ट भी हुए और आपकी आंखों में आंसू आ गए। क्या यह सच है?
नहीं, यह बिल्कुल सच नहीं है। मेरी आंखों में कोई आंसू नहीं आए थे। मुझे लगता है कि इसे थोड़ा ड्रामेटाइज किया गया है। यह एक नॉर्मल प्रोसिजर था। मेरी डॉक्टर बहुत काबिल हैं और इस प्रोसेस में मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। यह सब बहुत सिंपल और इजी था। इसके मुझे कोई साइड इफेक्ट नहीं हुए। सच कहूं तो इसे कर के मेरे मन को बहुत शांति मिली। देखिए, इसे यंग लोगों को करने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह अपनी पर्सनल च्वाइस पर निर्भर करता है। अगर आप प्लास्टिक सर्जरी करा सकते हो, तो यह क्यों नहीं करा सकते?
अच्छा, पहली बार जब आपने सलमा के कैरेक्टर को देखा, तब आपको कैसा लगा?
पहली बार मेंने जब अपना चहरा खून से लथपथ और बिखरे बालों में नॉन-ग्लैमरस कैरेक्टर को देखा तब में शॉक्ड रह गई थी। इसे जिन लोगों ने देखा है, उनको बहुत अच्छा लगा है। मुझे लोगों से बहुत अच्छा रिस्पांस मिला है। मुझे ऐसे देखकर सबका यही कहना था कि यह बहुत इंटरेस्टिंग लुक है।
बचपन में अगर आप कभी मां के साथ सेट पर गईं हों, तो वहां का यादगार अनुभव क्या रहा?
फिल्म 'लव 86' में नीलम कोठारी और गोविंदा के साथ मां काम कर रही थीं। इसकी शूटिंग मढआईलैंड में चल रही थी। मैं नीलम जी की बहुत बड़ी फैन हूं, तो मैं उन्हें देखने के लिए सेट पर गई थी। मुझे याद है कि उस फिल्म में एक सफेद कुत्ता था। मैं उसके साथ खेलने के लिए उसके पीछे-पीछे भाग रही थी। उसके पीछे भागते-भागते मैं गिर गई। मेरे सिर पर गहरी चोट लग गई और काफी खून बहने लगा। यह देख कर तो मां काफी परेशान हो गईं और उसी वक्त पूरी शूटिंग बंद हो गई। फिर मेरी नानी शहर से आईं और वो मुझे मढ आईलैंड से लेकर जसलोक हॉस्पिटल ले गईं इलाज करवाने के लिए।
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