चार साल से अधूरा है तिफरा फ्लाई ओवर का काम; जवाब देने हरकत में आया प्रशासन
बिलासपुर को राजधानी रायपुर से जोड़ने वाली तिफरा फ्लाई ओवरब्रिज का काम चार साल बीत जाने के बाद भी अधूरा है। जिसके कारण शहरवासियों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इधर, हाईकोर्ट ने भी एतराज जताते हुए शासन व जिला प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगा है। 14 दिसंबर को इस मामले में सुनवाई होनी है। लिहाजा, जवाब देने के पहले शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने अफसरों को निर्माण कार्य में तेजी लाने की हिदायत दी। शहर में बढ़ते यातायात दबाव से मुक्ति दिलाने के लिए तिफरा में फ्लाईओवर निर्माण के लिए 2017 में काम शुरू किया गया था। जिसे मार्च 2019 में पूरा हो जाना था। लेकिन शहर के लोगों को समय पर कोई सुविधा मिल जाए इसकी चिंता जिला प्रशासन को नहीं है। यही वजह है कि चार साल बाद भी तिफरा फ्लाईओवर का काम पूरा नहीं हो सका है
हाईकोर्ट में सड़कों की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमित्रों ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में अधूरे तिफरा ओवरब्रिज का भी उल्लेख किया है। साथ ही बताया है कि ओवरब्रिज शुरू होने के बाद शहरवासियों को काफी हद तक राहत मिलेगी। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान तिफरा ओवरब्रिज के संबंध में महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा को स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है।
इस मामले की 14 दिसंबर को सुनवाई होनी है। यही वजह है कि बीते दिनों महाधिवक्ता ने ओवरब्रिज का निरीक्षण किया। हाईकोर्ट में जवाब देने से कलेकटर डॉ. सारांश मित्तर भी हरकत में आ गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को तिफरा फ्लाई ओवरब्रिज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नगरीय प्रशासन विभाग के साथ ही रेलवे के हिस्से के काम की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि रेलवे के हिस्से का काम चल रहा है और अंतिम चरण में है। इसके बाद दोनों ओर डामरीकरण किया जाएगा।
31 जनवरी तक का पूरा करने दिलाया भरोसा
निरीक्षण के दौरान अफसरों ने कलेक्टर डॉ. मित्तर को बताया कि रेलवे का काम पूरा होने के बाद दोनों ओर डामरीकरण किया जाएगा। अफसरों ने उन्हें 31 जनवरी तक काम पूरा करने का भरोसा दिलाया है।
65 से 70 करोड़ रुपए पहुंच गई है लागत
बताया जा रहा है कि इस फ्लाईओवर के निर्माण में रेलवे का रोड़ा था। रेलवे के हिस्से का काम पूरा होने के बाद ओवरब्रिज के निर्माण में तेजी आने की बात कही जा रही है। फ्लाईओवर निर्माण में हुई लेटलतीफी के चलते इसकी लागत भी बढ़ गई है। साल 2017 में शुरू हुए इस काम की लागत 65 करोड़ रुपए थी, जो बढ़कर 70 करोड़ रुपए पहुंच गई है।

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