'जो मदारी बंदर...', 37 साल में Anupam Kher के मुंह से नहीं निकले ये दो शब्द, घमंड करने पर मारा एक्टर्स को ताना!
'जो मदारी बंदर...', 37 साल में Anupam Kher के मुंह से नहीं निकले ये दो शब्द, घमंड करने पर मारा एक्टर्स को ताना!
अपने पूरे करियर में 550 से ज्यादा फिल्में कर चुके अनुपम खेर ने हाल ही में अपनी मार्केटिंग करने पर ...और पढ़ें
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अनुपम खेर ने एक्टर्स की मार्केटिंग पर दी राय/ फोटो-इंस्टाग्राम
HIGHLIGHTS
अनुपम खेर ने कलाकारों के लिए मार्केटिंग को बताया जरूरी
उन्होंने कहा कि सभी किसी न किसी तरह करते हैं मार्केटिंग
नकारात्मक शब्दों से बचने और अहंकार छोड़ने की दी सलाह
एंटरटेनमेंट ब्यूरो, मुंबई। अच्छी कला के साथ अगर कलाकार को अपनी मार्केटिंग भी अच्छी तरह से करनी आ जाए तो उसके लिए फिल्म इंडस्ट्री में सफलता की राहें आसान हो जाती हैं। हिंदी सिनेमा में 550 से ज्यादा फिल्में कर चुके अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) भी कलाकारों के लिए अपनी मार्केटिंग जरूरी मानते हैं।
अनुपम खेर बोले-'सब मार्केटिंग करते हैं'
उनका कहना है, अक्सर यह कलाकारों के साथ देखा जाता है कि वे सोचते हैं कि मुझे अपनी मार्केटिंग नहीं करनी चाहिए। हालांकि, किसी न किसी तरीके से सभी अपनी मार्केटिंग करते हैं। हर कोई काम मांगता है, बस काम मांगने का अंदाज अलग होता है। बहुत साल पहले जब मैं फिल्म सारांश की शूटिंग कर रहा था, उसी समय महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) साहब ने कहा था कि जो मदारी बंदर लेकर चलता है, वो भी डमरू बजाता है। नहीं तो लोग खेल देखने लिए इकट्ठा नहीं होते हैं।
अनुपम खेर ने आगे कहा, "अपनी मार्केटिंग और काम मांगने में समस्या ही क्या है। मैंने देखा है कि ऐसे में अक्सर हमारा अहंकार आड़े आता है। आज भी मुझे जो भी फिल्मकार मिलता है, मैं सभी से कहता हूं कि यार मेरे साथ काम कब कर रहे हो?"
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दो शब्द लगते हैं नकारात्मक
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे एक्टर ने आगे कहा, "मैंने दो शब्दों का इस्तेमाल पिछले 36-37 वर्ष में सोच समझकर नहीं किया है। पहला है मूड नहीं है और दूसरा है कि बोर हो गया हूं। आप मेरे शब्दों, मेरी बातों में कभी ये शब्द नहीं पाएंगे। ये दोनों शब्द मुझे बहुत नकारात्मक लगते हैं। अपनी मार्केटिंग करना बहुत जरूरी है। आजकल के दौर में तो ट्रोल्स भी ट्रोल करके अपनी मार्केटिंग करते रहते हैं।"

अनुपम खेर के करियर की बात करें उन्होंने अपने चार दशक के लंबे करियर में 550 से अधिक फिल्मों में काम किया है। जिसमें हिंदी के अलावा अंतराष्ट्रीय फिल्में भी शामिल हैं। दिल्ली से NSD की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1984 में फिल्म सारांश से बॉलीवुड में कदम रखा था। वह अपने करियर में पिता से लेकर खलनायक तक की भूमिका निभा चुके हैं।
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