सिंगिंग रियलिटी शो में Shankar Mahadevan की वापसी, बतौर जज सिखाएंगे संगीत के 'गुरु मंत्र'
सिंगिंग रियलिटी शो में Shankar Mahadevan की वापसी, बतौर जज सिखाएंगे संगीत के 'गुरु मंत्र'
गायक और संगीतकार शंकर महादेवन एक बार फिर से सिंगिंग रियलिटी टीवी शो में जज की भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे।
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गायक शंकर महादेवन (फोटो क्रेडिट- एक्स)
सिंगिंग रियलिटी शो का बने हिस्सा
जज की भूमिका में नजर आएंगे महादेवन
आज के दौर के संगीत पर बोले शंकर महादेवन
दीपेश पांडेय, मुंबई: हिंदी सिनेमा के गायक और संगीतकार शंकर महादेवन सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए गुरु को जीपीएस की तरह मानते हैं। हाल ही में शुरू हुए सिंगिंग रियलिटी शो सारेगामापा के नए सीजन सारेगामापा: हिंदुस्तान का संगीतस्थान में वह एक बार फिर जज की भूमिका निभा रहे हैं।
जहां उन्हें प्रतिभागियों द्वारा महागुरु की उपाधि मिली है। शंकर के दोनों बेटे सिद्धांत और शिवम भी संगीत की दुनिया में सक्रिय हैं। उनसे वर्तमान दौर के संगीत और उनके सफर पर बातचीत :
बतौर जज प्रतिभागियों के लिए आपके क्या पैमाने रहेंगे? क्या इसके लिए भी समय के साथ अपडेट होना पड़ता है?
हम जज नहीं करेंगे, हम प्रोत्साहित करेंगे। हम प्रतिभागियों का साथ देंगे और साथ लेकर चलेंगे। इस इंडस्ट्री में थोड़ा ज्यादा अनुभव होने के नाते, हम अपना तजुर्बा उनके साथ साझा करके उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं।
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बाकी, मुझे नहीं लगता है कि बतौर जज कुछ अपडेट करने की आवश्यकता है। मैं जो हूं, वो हूं। हां, शो अपडेट होते रहना चाहिए। हमारा शो प्रोडक्शन वैल्यू से लेकर साज बजाने वाले संगीतकार, प्रतिभागी, कोरस हर मामले में अपडेट हुआ है।
पहले सीखने के लिए सिर्फ गुरु होते थे। आज लोगों के पास जानकारी के स्रोत बहुत हैं, फिर कैसे तय करें कि क्या सही है?
कौन से माध्यम से मिली किस जानकारी पर ज्यादा ध्यान दें, वो बताने के लिए गुरु होना चाहिए। ताकी कोई गलत संगीत सुनकर उससे प्रभावित न हो। उसे कहीं अपने लिए बेंचमार्क न बना लें। अच्छे और खराब संगीत की समझ के लिए गुरु चाहिए।

मेरी संगीत अकेडमी 97 देशों में है, उसमें सिखाने वाले कम से कम 100 गुरु हैं और हजारों बच्चे सीख रहे हैं। जिस तरह से जीपीएस सिस्टम आपका मार्गदर्शन कर सही दिशा में ले जाता है, गुरु भी कलाकार के लिए जीपीएस सिस्टम की तरह है।
रील्स और शार्ट्स जैसे छोटे वीडियो का दौर चल रहा है। इसका संगीत पर कितना प्रभाव देखते हैं?
यह सच्चाई है कि आज के दौर में यही चल रहा है। हालांकि, मेरे लिए यह कोई बेंचमार्क नहीं है। मैं चाहता हूं, लोग पूरे गाने सुने उनका आनंद लें, लेकिन उसके लिए गाने भी उसी तरह के बनने चाहिए। उदाहरण के लिए लोग कल हो ना हो या दिल चाहता है फिल्मों के गाने रील्स में नहीं सुनते हैं, वो पूरा गाना ही सुनते हैं।
ये ट्रेंड है, जहां हर चीजें बहुत तेजी से चल रही है। हालांकि, इसके बीच अच्छा गाना जब रिलीज होता है, तो लोग बैठकर पूरा गाना सुनते हैं।
सही समय पर सही निर्णय लेना जरूरी माना जाता है। कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने के बाद संगीत की दुनिया में आने का निर्णय आपने कैसे लिया?
इसके लिए पहले आपको स्वयं पर भरोसा होना चाहिए, जोखिम लेने की क्षमता होनी चाहिए और असीम धैर्य होना चाहिए। जब मैं संगीत की दुनिया में आया तो मैंने गुणवत्ता से कभी कोई समझौता नहीं किया।
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मैंने कभी बी ग्रेड संगीत नहीं बनाया, इंडस्ट्री में गुडविल तैयार किया। मैं औसत दर्जे के काम पर विश्वास नहीं करता हूं। मछली की तरह हमेशा धारा के विपरीत चला हूं। हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की है, जिसमें कभी मेरे गाने कभी फ्लाप हुए तो कभी हिट।
अभिनेता और फिल्मकार फरहान खान के साथ आपका काफी लंबा जुड़ाव रहा। हाल ही में दिल चाहता है ने भी 25 साल पूरे किए?
फरहान के साथ मेरा रिश्ता 30 वर्षों से भी पुराना है। बतौर निर्देशक उनका सबसे पहला काम ब्रीथलेस... मेरे साथ ही था। उसके बाद बतौर निर्देशक जब वो अपनी पहली फिल्म (दिल चाहता है) बना रहे थे, तो वो 24 साल के थे। हमने उस फिल्म में भी बिना किसी तनाव या भार के एक टीम की तरह काम किया।
जब उसके गाने रिलीज हुए, पहले तो वह लोगों को समझ में ही नहीं आए। लोगों ने कहा कि यह कुछ अलग ही लग रहा है। हमें तो अलग ही लगना था। एक बार जब वह लोगों की जुबां पर चढ़े तो उतरना मुश्किल हो गया।
आपने अपने बेटों के साथ भी स्टेज पर परफार्म किया है। उनके लिए सख्त या नर्म, किस तरह के पिता है?
अपने बच्चों के लिए मैं सख्त नहीं, एकदम सत्य पिता हूं। मेरे बच्चे तो मेरे लिए दोस्त की तरह हैं। अब हम एक टीम की तरह काम करते हैं। अब सिर्फ वो मुझसे नहीं, बल्कि मैं भी उनसे बहुत कुछ सीखता हूं, क्योंकि वो आज की पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
वो हमें बताते हैं कि फलां कलाकार या फलां गाने को सुनिए, आजकल ये चल रहा है। भगवान का इससे बड़ा आशीर्वाद और क्या हो सकता है कि मुझे अपने दोनों बच्चों के साथ स्टेज पर खड़े रहकर परफार्म मौका मिला।
गायक और संगीतकार शंकर महादेवन एक बार फिर से सिंगिंग रियलिटी टीवी शो में जज की भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे।
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गायक शंकर महादेवन (फोटो क्रेडिट- एक्स)
सिंगिंग रियलिटी शो का बने हिस्सा
जज की भूमिका में नजर आएंगे महादेवन
आज के दौर के संगीत पर बोले शंकर महादेवन
दीपेश पांडेय, मुंबई: हिंदी सिनेमा के गायक और संगीतकार शंकर महादेवन सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए गुरु को जीपीएस की तरह मानते हैं। हाल ही में शुरू हुए सिंगिंग रियलिटी शो सारेगामापा के नए सीजन सारेगामापा: हिंदुस्तान का संगीतस्थान में वह एक बार फिर जज की भूमिका निभा रहे हैं।
जहां उन्हें प्रतिभागियों द्वारा महागुरु की उपाधि मिली है। शंकर के दोनों बेटे सिद्धांत और शिवम भी संगीत की दुनिया में सक्रिय हैं। उनसे वर्तमान दौर के संगीत और उनके सफर पर बातचीत :
बतौर जज प्रतिभागियों के लिए आपके क्या पैमाने रहेंगे? क्या इसके लिए भी समय के साथ अपडेट होना पड़ता है?
हम जज नहीं करेंगे, हम प्रोत्साहित करेंगे। हम प्रतिभागियों का साथ देंगे और साथ लेकर चलेंगे। इस इंडस्ट्री में थोड़ा ज्यादा अनुभव होने के नाते, हम अपना तजुर्बा उनके साथ साझा करके उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं।
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बाकी, मुझे नहीं लगता है कि बतौर जज कुछ अपडेट करने की आवश्यकता है। मैं जो हूं, वो हूं। हां, शो अपडेट होते रहना चाहिए। हमारा शो प्रोडक्शन वैल्यू से लेकर साज बजाने वाले संगीतकार, प्रतिभागी, कोरस हर मामले में अपडेट हुआ है।
पहले सीखने के लिए सिर्फ गुरु होते थे। आज लोगों के पास जानकारी के स्रोत बहुत हैं, फिर कैसे तय करें कि क्या सही है?
कौन से माध्यम से मिली किस जानकारी पर ज्यादा ध्यान दें, वो बताने के लिए गुरु होना चाहिए। ताकी कोई गलत संगीत सुनकर उससे प्रभावित न हो। उसे कहीं अपने लिए बेंचमार्क न बना लें। अच्छे और खराब संगीत की समझ के लिए गुरु चाहिए।

मेरी संगीत अकेडमी 97 देशों में है, उसमें सिखाने वाले कम से कम 100 गुरु हैं और हजारों बच्चे सीख रहे हैं। जिस तरह से जीपीएस सिस्टम आपका मार्गदर्शन कर सही दिशा में ले जाता है, गुरु भी कलाकार के लिए जीपीएस सिस्टम की तरह है।
रील्स और शार्ट्स जैसे छोटे वीडियो का दौर चल रहा है। इसका संगीत पर कितना प्रभाव देखते हैं?
यह सच्चाई है कि आज के दौर में यही चल रहा है। हालांकि, मेरे लिए यह कोई बेंचमार्क नहीं है। मैं चाहता हूं, लोग पूरे गाने सुने उनका आनंद लें, लेकिन उसके लिए गाने भी उसी तरह के बनने चाहिए। उदाहरण के लिए लोग कल हो ना हो या दिल चाहता है फिल्मों के गाने रील्स में नहीं सुनते हैं, वो पूरा गाना ही सुनते हैं।
ये ट्रेंड है, जहां हर चीजें बहुत तेजी से चल रही है। हालांकि, इसके बीच अच्छा गाना जब रिलीज होता है, तो लोग बैठकर पूरा गाना सुनते हैं।
सही समय पर सही निर्णय लेना जरूरी माना जाता है। कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने के बाद संगीत की दुनिया में आने का निर्णय आपने कैसे लिया?
इसके लिए पहले आपको स्वयं पर भरोसा होना चाहिए, जोखिम लेने की क्षमता होनी चाहिए और असीम धैर्य होना चाहिए। जब मैं संगीत की दुनिया में आया तो मैंने गुणवत्ता से कभी कोई समझौता नहीं किया।
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मैंने कभी बी ग्रेड संगीत नहीं बनाया, इंडस्ट्री में गुडविल तैयार किया। मैं औसत दर्जे के काम पर विश्वास नहीं करता हूं। मछली की तरह हमेशा धारा के विपरीत चला हूं। हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की है, जिसमें कभी मेरे गाने कभी फ्लाप हुए तो कभी हिट।
अभिनेता और फिल्मकार फरहान खान के साथ आपका काफी लंबा जुड़ाव रहा। हाल ही में दिल चाहता है ने भी 25 साल पूरे किए?
फरहान के साथ मेरा रिश्ता 30 वर्षों से भी पुराना है। बतौर निर्देशक उनका सबसे पहला काम ब्रीथलेस... मेरे साथ ही था। उसके बाद बतौर निर्देशक जब वो अपनी पहली फिल्म (दिल चाहता है) बना रहे थे, तो वो 24 साल के थे। हमने उस फिल्म में भी बिना किसी तनाव या भार के एक टीम की तरह काम किया।
जब उसके गाने रिलीज हुए, पहले तो वह लोगों को समझ में ही नहीं आए। लोगों ने कहा कि यह कुछ अलग ही लग रहा है। हमें तो अलग ही लगना था। एक बार जब वह लोगों की जुबां पर चढ़े तो उतरना मुश्किल हो गया।
आपने अपने बेटों के साथ भी स्टेज पर परफार्म किया है। उनके लिए सख्त या नर्म, किस तरह के पिता है?
अपने बच्चों के लिए मैं सख्त नहीं, एकदम सत्य पिता हूं। मेरे बच्चे तो मेरे लिए दोस्त की तरह हैं। अब हम एक टीम की तरह काम करते हैं। अब सिर्फ वो मुझसे नहीं, बल्कि मैं भी उनसे बहुत कुछ सीखता हूं, क्योंकि वो आज की पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
वो हमें बताते हैं कि फलां कलाकार या फलां गाने को सुनिए, आजकल ये चल रहा है। भगवान का इससे बड़ा आशीर्वाद और क्या हो सकता है कि मुझे अपने दोनों बच्चों के साथ स्टेज पर खड़े रहकर परफार्म मौका मिला।
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Mirchmasala
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