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'आप नहीं करेंगे तो हम आदेश देंगे', पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को अल्टीमेटम

'आप नहीं करेंगे तो हम आदेश देंगे', पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को अल्टीमेटम


सुप्रीम कोर्ट ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल लगाने के मामले में केंद्र सरकार और FSSAI को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ...और पढ़ें








सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और FSSAI को दिया सख्त निर्देश (फाइल रफोटो)


सुप्रीम कोर्ट ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल लगाने का अल्टीमेटम दिया


कोर्ट ने केंद्र और FSSAI से पूछा, क्या वे कॉर्पोरेट दबाव में हैं


नागरिकों की सेहत के लिए दो सप्ताह में फैसला लेने को कहा



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उच्च मात्रा में चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर सामने की तरफ चेतावनी लेबल लगाने के लिए अल्टीमेटम जारी किया।


न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर आप नहीं कर सकते, तो हम आदेश पारित करेंगे।
याचिकाकर्ता ने क्या दिया तर्क?

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने खाद्य निकाय के इस तर्क की ओर ध्यान दिलाया कि उद्योग लेबलिंग के विचार का विरोध कर रहा था। याचिकाकर्ता ने खाद्य पैकेटों पर चेतावनी लेबल लगाने के उद्योग के विरोध का हवाला देते हुए, एफएसएसएआई ने अतिरिक्त चीनी, संतृप्त वसा और नमक की अनुशंसित दैनिक आवश्यकता की सारणीबद्ध घोषणा का सुझाव दिया है।

जिसके बाद न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने एफएसएसएआई को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और खाद्य नियामक की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि क्या ये प्राधिकरण कॉरपोरेट जगत के दबाव के आगे झुक रहे हैं?


नागरिकों से जुड़ा मामला

कोर्ट ने साफ किया कि यह मामला देश के नागरिकों और विशेषकर बच्चों की सेहत से जुड़ा है, इसलिए इस पर फैसला उद्योगों के विरोध से नहीं बल्कि जनहित से संचालित होना चाहिए।

पीठ ने केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) बृजेंद्र चाहर से सवाल किया कि अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है और सरकार ने इस संबंध में अब तक क्या कदम उठाए हैं। क्या सरकार खुद ऐसा करेगी, या हमें आदेश जारी करना होगा?
यदि आप ऐसा नहीं कर सकते, तो हम करेंगे...

इस दौरान एएसजी बृजेंद्र चाहर ने अदालत से सरकार की प्रस्तावित कार्ययोजना को स्पष्ट करने की अनुमति देने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार को ठीक वही करना होगा जो अदालत ने निर्देश दिया है। कोर्ट ने फिर अपने आदेश को दोहराते हुए कहा, "यदि आप ऐसा नहीं कर सकते, तो हम आदेश पारित करेंगे।"


एएसजी ने तर्क दिया कि विकसित देशों में खाद्य पदार्थों में आमतौर पर नमक, चीनी और वसा का स्तर कम होता है, इसलिए उन्हीं मानकों को सीधे पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों पर लागू करना अनुचित होगा।
क्या भारत को एक अविकसित देश बने रहना चाहिए?

इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस तर्क को खारिज करते हुए पूछा, "क्या भारत को एक अविकसित देश बने रहना चाहिए? क्या भारत के लिए विकसित देशों द्वारा अपनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय पैकेजिंग मानकों का पालन करना मुश्किल है।"


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ठ किया कि चेतावनी लेबल का उद्देश्य किसी उत्पाद की बिक्री को रोकना नहीं है, बल्कि उपभोक्ता को यह सूचित करना है कि वे क्या उपभोग कर रहे हैं। हालांकि, निर्माताओं को यह प्रणाली नापसंद हो सकती है क्योंकि यह उनके व्यवसाय को प्रभावित कर सकती है, लेकिन चेतावनी के बावजूद, अंतिम निर्णय उपभोक्ता पर निर्भर करेगा कि वह उत्पाद खरीदे या नहीं
कोर्ट ने दिया 2 सप्ताह का समय

अदालत ने केंद्र को लेबलिंग प्रस्ताव का पालन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और चेतावनी दी कि अगली बार फैसला सुनाया जाएगा।
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