जस्टिस नागरत्ना ने महिलाओं को तुरंत कानूनी सहायता देने की वकालत की
जस्टिस नागरत्ना ने महिलाओं को तुरंत कानूनी सहायता देने की वकालत की
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने महिलाओं को किसी घटना के तुरंत बाद कानूनी मदद देने की आवश्यकता पर जोर दिया। ...और पढ़ें

जस्टिस नागरत्ना ने महिलाओं के लिए तत्काल कानूनी सहायता की वकालत की (फोटो- PTI)
महिलाओं को घटना के तुरंत बाद कानूनी मदद मिले।
पुलिस स्टेशनों और अस्पतालों में तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध हो।
पैरालीगल वालंटियर कम समय में उपलब्ध हों।
पीटीआई, बेंगलुरु। सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने शनिवार को किसी घटना के तुरंत बाद महिलाओं को कानूनी मदद देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
साथ ही, उन्होंने कर्नाटक में हाल ही में हुए उन बदलावों की ओर भी ध्यान दिलाया, जिनसे पहली नियमित अपील पर हाई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र कम हो गया है।
जस्टिस नागरत्ना ने "महिलाओं के लिए न्याय" विषय पर राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा कर्नाटक हाई कोर्ट और कर्नाटक न्यायिक अकादमी के सहयोग से आयोजित दक्षिण क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि किसी घटना के तुरंत बाद पुलिस स्टेशनों या अस्पतालों में कानूनी सहायता दी जानी चाहिए। कहा कि एक बेहतर ढांचा बनाया जाना चाहिए, ताकि राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (तालुका स्तर तक) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, गांवों के सरकारी अस्पतालों और पुलिस स्टेशनों के बीच बेहतर तालमेल बन सके।
कानूनी सहायता की प्रभावशीलता पर एक अध्ययन किया जाना चाहिए, जो केवल लाभार्थियों की संख्या पर नहीं, बल्कि परिणामों के संदर्भ में हो। पैरालीगल वालंटियर को कम समय की सूचना पर उपलब्ध रहना चाहिए, ताकि महिलाओं को तुरंत मदद मिल सके।
राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 और मार्च 2026 के बीच 4,14,795 महिलाओं ने कानूनी सहायता ली और इस आंकड़े को उन्होंने सराहनीय बताया।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने महिलाओं को किसी घटना के तुरंत बाद कानूनी मदद देने की आवश्यकता पर जोर दिया। ...और पढ़ें

जस्टिस नागरत्ना ने महिलाओं के लिए तत्काल कानूनी सहायता की वकालत की (फोटो- PTI)
महिलाओं को घटना के तुरंत बाद कानूनी मदद मिले।
पुलिस स्टेशनों और अस्पतालों में तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध हो।
पैरालीगल वालंटियर कम समय में उपलब्ध हों।
पीटीआई, बेंगलुरु। सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने शनिवार को किसी घटना के तुरंत बाद महिलाओं को कानूनी मदद देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
साथ ही, उन्होंने कर्नाटक में हाल ही में हुए उन बदलावों की ओर भी ध्यान दिलाया, जिनसे पहली नियमित अपील पर हाई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र कम हो गया है।
जस्टिस नागरत्ना ने "महिलाओं के लिए न्याय" विषय पर राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा कर्नाटक हाई कोर्ट और कर्नाटक न्यायिक अकादमी के सहयोग से आयोजित दक्षिण क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि किसी घटना के तुरंत बाद पुलिस स्टेशनों या अस्पतालों में कानूनी सहायता दी जानी चाहिए। कहा कि एक बेहतर ढांचा बनाया जाना चाहिए, ताकि राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (तालुका स्तर तक) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, गांवों के सरकारी अस्पतालों और पुलिस स्टेशनों के बीच बेहतर तालमेल बन सके।
कानूनी सहायता की प्रभावशीलता पर एक अध्ययन किया जाना चाहिए, जो केवल लाभार्थियों की संख्या पर नहीं, बल्कि परिणामों के संदर्भ में हो। पैरालीगल वालंटियर को कम समय की सूचना पर उपलब्ध रहना चाहिए, ताकि महिलाओं को तुरंत मदद मिल सके।
राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 और मार्च 2026 के बीच 4,14,795 महिलाओं ने कानूनी सहायता ली और इस आंकड़े को उन्होंने सराहनीय बताया।
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