कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की संदिग्ध परिस्थिति में मौत, प्लेगरिज्म के लगे थे आरोप
कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की संदिग्ध परिस्थिति में मौत, प्लेगरिज्म के लगे थे आरोप
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जेसन अर्डे लंदन में अपने घर में मृत पाए गए। वे साहित्यिक चोरी के आरोपों और DEI को बढ़ावा देने के लिए नियुक्ति की आलोचनाओं से जूझ रहे थे, जिससे वे काफी परेशान थे।

कैम्ब्रिज के पूर्व प्रोफेसर जेसन अर्डे की लंदन में संदिग्ध मौत
डिजिटल डेस्क, लंदन। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जेसन अर्डे अपने लंदन स्थित घर में बेसुध हालत में मृत पाए गए। 41 वर्षीय अर्डे को हाल के दिनों में तीखी जन-आलोचना और DEI (विविधता, समानता और समावेश) को बढ़ावा देने के लिए भर्ती किए जाने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा था।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर बाद बैटरसी स्थित उनके घर पर अधिकारियों को बुलाया गया था। पुलिस ने उनकी मौत को अप्रत्याशित माना है।
2023 में बने थे सबसे युवा प्रोफेसर
अर्डे 2023 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे युवा अश्वेत प्रोफेसर बने थे। हालांकि, कैम्ब्रिज द्वारा उनकी नियुक्ति की जांच की घोषणा के बाद उन्होंने 5 अगस्त को सोशियोलॉजी ऑफ एजुकेशन के प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया था।
जेसन अर्डे पर लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी में अपनी PhD थीसिस में साहित्यिक चोरी (प्लेगरिज्म) का आरोप लगा था। फरवरी में हुई आंतरिक जांच में लिवरपूल यूनिवर्सिटी ने पाया था कि साहित्यिक चोरी का आरोप साबित नहीं हुआ।
DEI विचारधारा के तहत नियुक्ति
लेकिन 21 जुलाई को अमेरिकी शोधकर्ता नाथन कोफनास ने एक लेख में दावा किया कि अर्डे के 2015 के शोध-प्रबंध में पुराने काम से काफी समानता थी और उनकी नियुक्ति केवल DEI विचारधारा के तहत हुई थी।
इस्तीफा देते समय अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और सार्वजनिक टिप्पणियों ने उन पर गहरा नकारात्मक असर डाला है।
दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के नस्लीय हमले का शिकार
उनके परिवार ने कहा, गलत जानकारी फैलाने का यह अभियान जेसन के लिए बर्दाश्त से बाहर हो गया था। वे एक बेहद भले इंसान थे। नेशनल एजुकेशन यूनियन के जनरल सेक्रेटरी डैनियल केबेडे ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि अर्डे ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के नस्लीय हमलों के शिकार हुए।
अर्डे के मित्र प्रोफेसर साइमन बैरन-कोहेन ने बताया कि मौत से कुछ घंटे पहले अर्डे ने उनसे बात की थी। बैरन-कोहेन के अनुसार, अर्डे लगातार हो रहे अपमान से इतने दुखी थे कि उन्होंने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था, जबकि उनका यही कहना था कि उन्होंने कोई धोखाधड़ी या झूठ नहीं बोला था
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जेसन अर्डे लंदन में अपने घर में मृत पाए गए। वे साहित्यिक चोरी के आरोपों और DEI को बढ़ावा देने के लिए नियुक्ति की आलोचनाओं से जूझ रहे थे, जिससे वे काफी परेशान थे।

कैम्ब्रिज के पूर्व प्रोफेसर जेसन अर्डे की लंदन में संदिग्ध मौत
डिजिटल डेस्क, लंदन। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जेसन अर्डे अपने लंदन स्थित घर में बेसुध हालत में मृत पाए गए। 41 वर्षीय अर्डे को हाल के दिनों में तीखी जन-आलोचना और DEI (विविधता, समानता और समावेश) को बढ़ावा देने के लिए भर्ती किए जाने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा था।
मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर बाद बैटरसी स्थित उनके घर पर अधिकारियों को बुलाया गया था। पुलिस ने उनकी मौत को अप्रत्याशित माना है।
2023 में बने थे सबसे युवा प्रोफेसर
अर्डे 2023 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे युवा अश्वेत प्रोफेसर बने थे। हालांकि, कैम्ब्रिज द्वारा उनकी नियुक्ति की जांच की घोषणा के बाद उन्होंने 5 अगस्त को सोशियोलॉजी ऑफ एजुकेशन के प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया था।
जेसन अर्डे पर लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी में अपनी PhD थीसिस में साहित्यिक चोरी (प्लेगरिज्म) का आरोप लगा था। फरवरी में हुई आंतरिक जांच में लिवरपूल यूनिवर्सिटी ने पाया था कि साहित्यिक चोरी का आरोप साबित नहीं हुआ।
DEI विचारधारा के तहत नियुक्ति
लेकिन 21 जुलाई को अमेरिकी शोधकर्ता नाथन कोफनास ने एक लेख में दावा किया कि अर्डे के 2015 के शोध-प्रबंध में पुराने काम से काफी समानता थी और उनकी नियुक्ति केवल DEI विचारधारा के तहत हुई थी।
इस्तीफा देते समय अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और सार्वजनिक टिप्पणियों ने उन पर गहरा नकारात्मक असर डाला है।
दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के नस्लीय हमले का शिकार
उनके परिवार ने कहा, गलत जानकारी फैलाने का यह अभियान जेसन के लिए बर्दाश्त से बाहर हो गया था। वे एक बेहद भले इंसान थे। नेशनल एजुकेशन यूनियन के जनरल सेक्रेटरी डैनियल केबेडे ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि अर्डे ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के नस्लीय हमलों के शिकार हुए।
अर्डे के मित्र प्रोफेसर साइमन बैरन-कोहेन ने बताया कि मौत से कुछ घंटे पहले अर्डे ने उनसे बात की थी। बैरन-कोहेन के अनुसार, अर्डे लगातार हो रहे अपमान से इतने दुखी थे कि उन्होंने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था, जबकि उनका यही कहना था कि उन्होंने कोई धोखाधड़ी या झूठ नहीं बोला था
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