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वकीलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में जैन मुनि सुधा सागर जी महाराज को रांची कोर्ट का समन, 9 सितंबर को रखेंगे पक्ष

वकीलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में जैन मुनि सुधा सागर जी महाराज को रांची कोर्ट का समन, 9 सितंबर को रखेंगे पक्ष

रांची की अदालत ने वकीलों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में जैन मुनि सुधा सागर जी महाराज के खिलाफ मानहानि का संज्ञान लिया है। अदालत ने बीएनएस की धारा 356(2) के तहत समन जारी कर नौ सितंबर को पक्ष रखने का आदेश दिया है।








वकीलों पर टिप्पणी मामला जैन मुनि सुधा सागर को कोर्ट का समन।


रांची कोर्ट ने जैन मुनि सुधा सागर के खिलाफ संज्ञान लिया।


वकीलों पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, मानहानि का मामला।


बीएनएस धारा 356(2) के तहत समन, अगली सुनवाई 9 सितंबर।



राज्य ब्यूरो, रांची। रांची के न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने अधिवक्ताओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में बुधवार को जैन मुनि सुधा सागर जी महाराज के खिलाफ मानहानि के आरोप में प्रथमदृष्टया संज्ञान लिया है।

अदालत ने बीएनएस की धारा 356(2) के तहत समन जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए नौ सितंबर की तिथि निर्धारित की है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता प्रखर हरित ने आरोप लगाया था कि 31 अक्टूबर 2024 को मध्य प्रदेश में धार्मिक आयोजन के दौरान जैन मुनि सुधा सागर जी महाराज ने वकीलों के संबंध में टिप्पणी की थी।


आरोप है कि उन्होंने वकीलों को विवाद पैदा करने वाला, विभाजन कराने वाला और सत्य-असत्य की परवाह किए बिना अपने मुवक्किल के पक्ष में मुकदमा लड़ने वाला बताया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह किसी एक वकील पर की गई टिप्पणी नहीं थी, बल्कि पूरे अधिवक्ता समुदाय की पेशेवर प्रतिष्ठा पर असर डालने वाली टिप्पणी थी।


शिकायत में दावा किया गया कि सार्वजनिक प्रसारण के कारण कथित बयान बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचा और इससे वकीलों के प्रति नकारात्मक धारणा पैदा हुई। अदालत ने शिकायतकर्ता के शपथ बयान, जांच गवाह के बयान और पेन ड्राइव में उपलब्ध कथित आडियो-वीडियो सामग्री पर विचार किया।


अदालत ने कहा कि प्रथमदृष्टया टिप्पणियां अधिवक्ताओं के पेशेवर वर्ग के संबंध में हैं और इससे दूसरों की नजर में उनके बौद्धिक व पेशेवर चरित्र को नुकसान पहुंचने की संभावना है।

अदालत ने यह भी कहा कि मानहानि के अपवाद लागू होते हैं या नहीं, इसका निर्णय साक्ष्य के आधार पर आगे किया जाएगा। प्रस्तावित आरोपित को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए।
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