GPS-लाइट बंद कर बचाई जान; होर्मुज में 45 दिन फंसे रहे कैप्टन मनीष ने सुनाई खौफनाक मंजर की कहानी
GPS-लाइट बंद कर बचाई जान; होर्मुज में 45 दिन फंसे रहे कैप्टन मनीष ने सुनाई खौफनाक मंजर की कहानी
कैप्टन मनीष इराक से दक्षिण कोरिया जा रहे अपने तेल टैंकर के साथ युद्ध छिड़ने पर होर्मुज जलमार्ग में 45 दिनों तक फंसे रहे। उन्होंने जीपीएस और जहाज की ला ...और पढ़ें

जमशेदपुर। इराक के खोर अल जुबैर से जैसे ही कैप्टन मनीष अपने समुद्री तेल टैंकर जहाज से निकला, युद्ध छिड़ गया। ऐसे में मनीष पूरे 45 दिनों तक समुद्री जलमार्ग होर्मुज में जहाज का जीपीएस व लाइट बंद कर डटे रहें।
दैनिक जागरण से बात करते हुए मनीष ने बताया कि उनका जहाज तेल भरकर जैसे ही समुद्र में 10 किलोमीटर आगे बढ़े, उन्हें युद्ध छिड़ने की सूचना मिली। उन्हें तेल का जहाज लेकर इराक से साउथ कोरिया जाना था लेकिन युद्ध के कारण बीच समुद्र में लंगर डालकर रहना पड़ा।
उनके साथ 40 भारतीय नाविक भी थे और उनकी जहाज में 40 हजार टन तेल भरा हुआ था। यदि जहाज पर एक चिंगारी गिरती तो समुद्र में लगभग 50 किलोमीटर तक परिधि में जितने भी उपकरण अथवा जहाज चंद मिनट में खाक हो जाते।
इसलिए जहाज का जीपीएस, इंटरनेट कनेक्शन से लेकर रात में लाइटों को भी बंद कर दिया जाता था। अपने हेडक्वार्टर से वे ई-मेल के माध्यम से संवाद करते थे।
सीजफायर होने के बाद उनके रिलीवर ने उन्हें कार्यमुक्त किया और वे छुट्टी पर शहर पहुंचे हैं। कैप्टन मनीष मानगो के आशियाना अंतरा में अपनी पत्नी, बच्चे, मां व छोटे भाई के साथ रहते हैं।
शहर पहुंचने पर भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह उनके आवास पहुंचे और कैप्टन मनीष को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
आंखों के सामने 30 जहाजों को नष्ट होते देखा
मनीष बताते हैं कि पहले दिन समुद्री सफर के दौरान अचानक से मिसाइल की आवाज, तेज रोशनी व अंगारे दिखने को मिले। वे इतने दिनों में लगभग 30 जहाजों को नष्ट होते हुए देखा।
कुछ पर सीधे हमले हुए तो कुछ पर मिसाइल से तबाह हुए ड्रोन आकर गिरते थे। ऐसे में वे और उनकी पूरी टीम इमरजेंसी अलर्ट पर रहते और आपात स्थिति के लिए तैयार रहते थे ताकि किसी भी घटना से पहले जहाज की वर्तमान स्थिति को बदला जा सके।
तनावमुक्त करने के लिए करते थे योगा
कैप्टन मनीष बताते हैं कि पूरे जहाज और पूरे क्रू मेंबरों की जिम्मेदारी उन पर थी इसलिए युद्ध के हालात के बीच सभी सदस्यों के तनाव को कम करने की जिम्मेदारी भी उन पर थी। तनाव मुक्त रहने के लिए हर दिन फायर ड्रिल के साथ-साथ योग-ध्यान भी होता था।
कैप्टन मनीष इराक से दक्षिण कोरिया जा रहे अपने तेल टैंकर के साथ युद्ध छिड़ने पर होर्मुज जलमार्ग में 45 दिनों तक फंसे रहे। उन्होंने जीपीएस और जहाज की ला ...और पढ़ें

जमशेदपुर। इराक के खोर अल जुबैर से जैसे ही कैप्टन मनीष अपने समुद्री तेल टैंकर जहाज से निकला, युद्ध छिड़ गया। ऐसे में मनीष पूरे 45 दिनों तक समुद्री जलमार्ग होर्मुज में जहाज का जीपीएस व लाइट बंद कर डटे रहें।
दैनिक जागरण से बात करते हुए मनीष ने बताया कि उनका जहाज तेल भरकर जैसे ही समुद्र में 10 किलोमीटर आगे बढ़े, उन्हें युद्ध छिड़ने की सूचना मिली। उन्हें तेल का जहाज लेकर इराक से साउथ कोरिया जाना था लेकिन युद्ध के कारण बीच समुद्र में लंगर डालकर रहना पड़ा।
उनके साथ 40 भारतीय नाविक भी थे और उनकी जहाज में 40 हजार टन तेल भरा हुआ था। यदि जहाज पर एक चिंगारी गिरती तो समुद्र में लगभग 50 किलोमीटर तक परिधि में जितने भी उपकरण अथवा जहाज चंद मिनट में खाक हो जाते।
इसलिए जहाज का जीपीएस, इंटरनेट कनेक्शन से लेकर रात में लाइटों को भी बंद कर दिया जाता था। अपने हेडक्वार्टर से वे ई-मेल के माध्यम से संवाद करते थे।
सीजफायर होने के बाद उनके रिलीवर ने उन्हें कार्यमुक्त किया और वे छुट्टी पर शहर पहुंचे हैं। कैप्टन मनीष मानगो के आशियाना अंतरा में अपनी पत्नी, बच्चे, मां व छोटे भाई के साथ रहते हैं।
शहर पहुंचने पर भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह उनके आवास पहुंचे और कैप्टन मनीष को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
आंखों के सामने 30 जहाजों को नष्ट होते देखा
मनीष बताते हैं कि पहले दिन समुद्री सफर के दौरान अचानक से मिसाइल की आवाज, तेज रोशनी व अंगारे दिखने को मिले। वे इतने दिनों में लगभग 30 जहाजों को नष्ट होते हुए देखा।
कुछ पर सीधे हमले हुए तो कुछ पर मिसाइल से तबाह हुए ड्रोन आकर गिरते थे। ऐसे में वे और उनकी पूरी टीम इमरजेंसी अलर्ट पर रहते और आपात स्थिति के लिए तैयार रहते थे ताकि किसी भी घटना से पहले जहाज की वर्तमान स्थिति को बदला जा सके।
तनावमुक्त करने के लिए करते थे योगा
कैप्टन मनीष बताते हैं कि पूरे जहाज और पूरे क्रू मेंबरों की जिम्मेदारी उन पर थी इसलिए युद्ध के हालात के बीच सभी सदस्यों के तनाव को कम करने की जिम्मेदारी भी उन पर थी। तनाव मुक्त रहने के लिए हर दिन फायर ड्रिल के साथ-साथ योग-ध्यान भी होता था।
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