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झारखंड में ग्रामसभाएं होंगी और शक्तिशाली: खनिज और वनोपज पर अधिकारों के लिए बनेगी नई नियमावली

झारखंड में ग्रामसभाएं होंगी और शक्तिशाली: खनिज और वनोपज पर अधिकारों के लिए बनेगी नई नियमावली


झारखंड सरकार ने खनिज संसाधनों और लघु वनोपज पर ग्रामसभा के अधिकारों को स्पष्ट करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह समिति पंचायती राज अधिनियम ...और पढ़ें





ग्रामसभा अधिकारों पर उच्चस्तरीय समिति का गठन।


खनिज, वनोपज पर ग्रामसभा की भूमिका स्पष्ट होगी।


पंचायती राज अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव।


राज्य ब्यूरो, रांची । झारखंड सरकार ने राज्य के खनिज संसाधनों और लघु वनोपज पर ग्रामसभा के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पंचायती राज अधिनियम के मौजूदा प्रविधानों में संभावित संशोधनों और विसंगतियों को दूर करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।



विधिक स्पष्टता और भ्रम दूर करने पर जोर

यह कमेटी ग्राम सभा और त्रिस्तरीय पंचायतों की भूमिका, शक्तियों और कार्यों का एक नया ड्राफ्ट बिल तैयार करेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों के प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों के कार्यान्वयन को लेकर भविष्य में कोई भ्रम की स्थिति न रहे। कमेटी विशेष रूप से निम्नलिखित विषयों पर अपनी सिफारिशें और विधिक सुझाव देगी:


खनिज संसाधन: ग्रामसभा की सहमति और अधिकारों का स्पष्टीकरण।
लघु वनोपज: वनोत्पादों पर स्थानीय समुदायों का नियंत्रण।
भूमि अधिग्रहण: अधिग्रहण की प्रक्रिया में पंचायतों की भूमिका।
सामाजिक न्याय: ग्रामीण स्तर पर न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित करना।

दिग्गज विशेषज्ञों की टीम और 3 महीने का समय

सेवानिवृत्त न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा को इस कमेटी में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मनोनीत करने का प्रस्ताव है। पंचायती राज निदेशालय के निदेशक और सेवानिवृत्त अधिकारी विनोद किस्पोट्टा इस 10 सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष होंगे।

कमेटी की संरचना:

सरकार ने कमेटी को अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल तैयार करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। कमेटी में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ कानूनी और जनजातीय मामलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:अध्यक्ष: विनोद किस्पोट्टा (निदेशक, पंचायती राज निदेशालय)।
विशेष आमंत्रित सदस्य: रिटायर्ड जज रत्नाकर भेंगरा, प्रोफेसर रामचंद्र उरांव और आदिवासी मामलों की जानकार दयामनी बारला (सूत्रों के अनुसार)।
सदस्य: डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण रिसर्च इंस्टीट्यूट के उपनिदेशक, ग्रामीण विकास व विधि विभाग के प्रतिनिधि, पेसा (PESA) प्रभावित जिलों के दो उप विकास आयुक्त (DDC), रिटायर्ड अधिकारी प्रेमतोष चौबे, सलाहकार सज्जाद मजीद, शैलेंद्र कुमार सिंह, सुधीर कुमार पाल और अधिवक्ता रश्मि कात्यायन।

क्यों जरूरी है यह संशोधन?

झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्य में पेसा (PESA) कानून और पंचायती राज प्रविधानों के बीच अक्सर विधिक पेच फंसते रहे हैं। इस नई कमेटी के सुझावों से तैयार होने वाला ड्राफ्ट बिल न केवल पंचायतों को सशक्त बनाएगा, बल्कि जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय जनता की भागीदारी को कानूनी मजबूती भी प्रदान करेगा।
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