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39 साल पहले अगरबत्ती और रुई से बने थे Ramayan के वीएफएक्स, रामानंद सागर ने लगाया था कमाल का जुगाड़

39 साल पहले अगरबत्ती और रुई से बने थे Ramayan के वीएफएक्स, रामानंद सागर ने लगाया था कमाल का जुगाड़


4000 करोड़ में बन रही रणबीर कपूर की रामायण काफी चर्चा में है इस बीच 39 साल पहले रामानंद सागर की रामायण के बारे में जानें दिलचस्प बातें- ...और पढ़ें




इतने कम बजट में बनी थी रामायण


अगरबत्ती और रुई से बने थे वीएफएक्स


39 साल पहले बनी रामायण का था जबरदस्त क्रेज


एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण का टीजर रिलीज किया गया। जिसे देखकर दर्शकों को 1987 की टेलीविजन सीरीज रामायण की याद आ गई। हालांकि रणबीर कपूर की रामायण को 4000 करोड़ के भारी भरकम बजट किया जा रहा है लेकिन उस वक्त रामायण सीरीज को काफी बजट में बनाया गया था।


इतना ही नहीं उस वक्त युद्ध और अन्य एक्शन सीक्वेंस में नजर आए वीएफएक्स किसी टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि जुगाड़ से बनाए गए थे।


कितना था रामायण का बजट?

रामानंद सागर की मशहूर 1987 की 'रामायण' (Ramayan) को, अपने 78 एपिसोड के पूरे रन के लिए, लगभग ₹7 करोड़ से ₹9 करोड़ के कुल बजट में बनाया गया था; इसमें हर एपिसोड पर अनुमानित प्रोडक्शन लागत ₹9 लाख थी। अपने समय का सबसे महंगा टीवी शो होने के बावजूद आज के माइथोलॉजिकल प्रोजेक्ट की तुलना में इसका बजट बहुत ही मामूली था।



अगरबत्ती और रुई से बनाए गए वीएफएक्स

वहीं युद्ध सीक्वेंस में नजर आए वीएफएक्स को किसी कम्प्यूटर या टेक्नोलॉजी से नहीं बनाया गया बल्कि तब वीएफएक्स को जुगाड़ से बनाया गया था। उस समय आधुनिक CGI और कंप्यूटर न होने के बावजूद, टीम ने अगरबत्ती के धुएं, बादलों के लिए रुई और शुरुआती 'क्रोमा की' तकनीक जैसे अनोखे और व्यावहारिक तरीकों का इस्तेमाल करके जबरदस्त स्पेशल इफेक्ट तैयार किए थे।




अगरबत्ती: सुबह के दृश्यों में धुंध, कोहरा और वातावरण में हल्की धुंध (haze) दिखाने के लिए इस्तेमाल की जाती थी।

कपास और ग्लास पेंटिंग: रात के दृश्यों के लिए या बादलों जैसा प्रभाव दिखाने के लिए सेट पर कपास रखी जाती थी; अक्सर, किसी दूसरी दुनिया जैसा बैकग्राउंड बनाने के लिए इसका इस्तेमाल ग्लास पेंटिंग के साथ किया जाता था।


मिनिएचर मॉडल (Miniature Models): पहाड़ों और स्वर्गीय लोकों को दिखाने के लिए 10-15 फीट ऊंचे स्केल मॉडल का इस्तेमाल किया जाता था।

SEG 2000 मशीन: उस समय में लॉन्च हुई एक मशीन (SEG 2000) का इस्तेमाल युद्ध के दृश्यों में दिव्य हथियारों, आग और तीरों का प्रभाव दिखाने के लिए किया जाता था।

प्लास्टर ऑफ पेरिस: कुंभकर्ण की मृत्यु जैसे दृश्यों के लिए कृत्रिम अंग बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता था।


रामायण के बारे में

इस शो को रामानंद सागर (Ramanand Sagar) ने बनाया, लिखा और निर्देशित किया था। यह मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच DD National पर प्रसारित हुआ था। इस टीवी सीरीज में अरुण गोविल ने श्रीराम, दीपिका चिखलिया ने सीता मां, सुनील लाहिरी ने लक्ष्मण, दारा सिंह ने हनुमान जी और अरविंद त्रिवेदी ने रावण का किरदार निभाया था।
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