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होर्मुज संकट: कब-कब बाधित हुआ विश्व का सबसे अहम तेल मार्ग? ईरान का दबाव और दुनिया की बढ़ी चिंता

होर्मुज संकट: कब-कब बाधित हुआ विश्व का सबसे अहम तेल मार्ग? ईरान का दबाव और दुनिया की बढ़ी चिंता

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बन गया है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग ...और पढ़ें



ईरान का दबाव और दुनिया की चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम (फाइल फोटो)


ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को हथियार बनाकर तेल आपूर्ति रोकी।


ईरान-इराक युद्ध में भी इस मार्ग पर जहाजों पर हमले हुए।


परमाणु प्रतिबंधों और अमेरिकी वापसी से भी तनाव बढ़ा।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर भू-राजनीतिक संघर्ष के निशाने पर है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हुए इस मार्ग पर यातायात लगभग रोक दिया है, जिससे दुनियाभर में तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है।


ईरान की दक्षिणी सीमा पर स्थित जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। यह पहली बार नहीं है जब इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है।

हालांकि ईरान ने प्रतिबंधों और अन्य तनावों के बावजूद जलडमरूमध्य को बंद करने की बार-बार धमकी तो दी, लेकिन पूरी तरह से यातायात रोकने से बचता रहा। आइए जानते हैं कि कब-कब होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बाधित या खतरे में पड़ा है।
ईरान-इराक 'टैंकर युद्ध'

ईरान और इराक के बीच चले आठ साल लंबे युद्ध (1981-1988) के दौरान दोनों पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में और उसके आसपास के टैंकरों और अन्य जहाजों पर हमला किया। हालांकि जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद नहीं हुआ। युद्ध के दौरान, अमेरिकी जहाजों ने कुवैती तेल टैंकरों को ईरानी हमलों से बचाने के लिए सुरक्षा दी, फिर भी खतरे के कारण यातायात प्रभावित हुआ।
प्रतिबंधों के दौरान ईरान ने दी थी होर्मुज बंद करने की धमकी2011 के अंत और 2012 की शुरुआत में, ईरान परमाणु विकास कार्यक्रम के चलते पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी, लेकिन ईरान ने अपनी कुछ धमकियों से पीछे हटते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया।


फिर भी अस्थिरता और आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। ब्रेंट क्रूड (अंतरराष्ट्रीय मानक) दिसंबर 2011 और 2012 के अधिकांश समय में 100 अमेरिकी डालर से ऊपर चली गईं। मार्च 2012 में कीमतें 126 अमेरिकी डालर प्रति बैरल से अधिक के शिखर पर पहुंच गईं।

2018 में परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने के बाद धमकियां और बढ़ गईं

मई 2018 में, अपने पहले कार्यकाल के दौरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया और प्रतिबंधों को फिर से लागू करना शुरू कर दिया। इसके जवाब में, तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी। लेकिन फिर भी, ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया।

2019-2025: जहाजों पर हमले

अमेरिकी नौसेना ने 2019 में जलडमरूमध्य के पास जहाजों पर माइन हमलों के लिए ईरान को दोषी ठहराया, जिससे टैंकरों को नुकसान पहुंचा, साथ ही 2021 में इजरायल से जुड़े तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के लिए भी ईरान को जिम्मेदार ठहराया।


तेहरान ने उस समय संलिप्तता से इन्कार किया था। तनाव के चलते बीमा दरें बढ़ गईं। इस बीच ईरान ने जलमार्ग में कुछ जहाजों को जब्त कर लिया, जिनमें कई विदेशी तेल टैंकर भी शामिल थे। फिर भी जलडमरूमध्य खुला रहा।

जून 2025: इजरायल और ईरान के बीच 12-दिन का युद्ध

पिछले साल इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित बंद होने की आशंकाएं भी बढ़ गईं, लेकिन ईरान ने जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया।
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