खेलों में बढ़ रहे डोपिंग के मामले, एनएमसी ने जारी किया नोटिस; प्रिस्क्रिप्शन को लेकर डॉक्टरों को दिया सुझाव
खेलों में बढ़ रहे डोपिंग के मामले, एनएमसी ने जारी किया नोटिस; प्रिस्क्रिप्शन को लेकर डॉक्टरों को दिया सुझाव
भारत में खेलों में डोपिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को एथलीट्स का इलाज करते स ...और पढ़ें

देश में डोपिंग का संकट बढ़ता जा रहा है, अब डॉक्टरों को दवा लिखते समय सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। स्टेडियम के वॉशरूम में इस्तेमाल की गई सिरिंजें मिल रही हैं, एथलीट्स डोप टेस्ट में फेल हो रहे हैं और अब रूटीन प्रिस्क्रिप्शन से भी प्रतिबंधित पदार्थ खेल में आ रहे हैं।
भारत में खेलों में डोपिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके चलते नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को एथलीट्स का इलाज करते समय सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
डोपिंग के बढ़ते मामले
एनएमसी ने हाल ही में एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की चिंता के बाद एक्शन लिया गया है। मंत्रालय ने डोपिंग के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करते हुए एनएमसी से कहा था कि डॉक्टरों को वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की प्रतिबंधित सूची से परिचित कराया जाए।
नोटिस में साफ कहा गया है कि डॉक्टरों को ऐसी दवाएं तभी लिखनी चाहिए जब वे मेडिकल रूप से जरूरी हों और उनका पूरा रिकॉर्ड रखा जाए। यह नोटिस फरवरी 2026 में जारी हुआ, जिसमें सभी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और रजिस्टर्ड डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एथलीट्स के इलाज में एंटी-डोपिंग नियमों का पालन करें।
डॉक्टरों को पता हो मुद्दे की संवेदनशीलता
एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों से कहा है कि वे फैकल्टी और प्रैक्टिशनर्स को एंटी-डोपिंग नियमों के बारे में संवेदनशील बनाएं, खासकर एथलीट्स का इलाज करते समय। जिम्मेदार तरीके से दवा लिखने की प्रैक्टिस को बढ़ावा दिया जाए।
इसके अलावा, जहां संभव हो, अंडरग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा और कंटिन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स में बेसिक एंटी-डोपिंग जागरूकता को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद है कि आने वाली पीढ़ी के डॉक्टर इस मुद्दे से अच्छी तरह वाकिफ हों।
2025-2026 में डोपिंग के प्रमुख मामले
इस साल कई एथलीट्स डोप टेस्ट में फेल हुए हैं। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने 2025 में सात भारतीय एथलीट्स को प्रोविजनली सस्पेंड किया था। 5 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के क्रिकेटर राजन कुमार तीन प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई मीट्स में स्टेडियम के वॉशरूम में इस्तेमाल की गई सिरिंजें बिखरी मिली हैं, जो संगठित तरीके से परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली दवाओं के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
भारत में खेलों में डोपिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को एथलीट्स का इलाज करते स ...और पढ़ें

देश में डोपिंग का संकट बढ़ता जा रहा है, अब डॉक्टरों को दवा लिखते समय सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। स्टेडियम के वॉशरूम में इस्तेमाल की गई सिरिंजें मिल रही हैं, एथलीट्स डोप टेस्ट में फेल हो रहे हैं और अब रूटीन प्रिस्क्रिप्शन से भी प्रतिबंधित पदार्थ खेल में आ रहे हैं।
भारत में खेलों में डोपिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके चलते नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को एथलीट्स का इलाज करते समय सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
डोपिंग के बढ़ते मामले
एनएमसी ने हाल ही में एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की चिंता के बाद एक्शन लिया गया है। मंत्रालय ने डोपिंग के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करते हुए एनएमसी से कहा था कि डॉक्टरों को वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) की प्रतिबंधित सूची से परिचित कराया जाए।
नोटिस में साफ कहा गया है कि डॉक्टरों को ऐसी दवाएं तभी लिखनी चाहिए जब वे मेडिकल रूप से जरूरी हों और उनका पूरा रिकॉर्ड रखा जाए। यह नोटिस फरवरी 2026 में जारी हुआ, जिसमें सभी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और रजिस्टर्ड डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एथलीट्स के इलाज में एंटी-डोपिंग नियमों का पालन करें।
डॉक्टरों को पता हो मुद्दे की संवेदनशीलता
एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों से कहा है कि वे फैकल्टी और प्रैक्टिशनर्स को एंटी-डोपिंग नियमों के बारे में संवेदनशील बनाएं, खासकर एथलीट्स का इलाज करते समय। जिम्मेदार तरीके से दवा लिखने की प्रैक्टिस को बढ़ावा दिया जाए।
इसके अलावा, जहां संभव हो, अंडरग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा और कंटिन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स में बेसिक एंटी-डोपिंग जागरूकता को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद है कि आने वाली पीढ़ी के डॉक्टर इस मुद्दे से अच्छी तरह वाकिफ हों।
2025-2026 में डोपिंग के प्रमुख मामले
इस साल कई एथलीट्स डोप टेस्ट में फेल हुए हैं। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) ने 2025 में सात भारतीय एथलीट्स को प्रोविजनली सस्पेंड किया था। 5 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के क्रिकेटर राजन कुमार तीन प्रतिबंधित पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाए गए।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई मीट्स में स्टेडियम के वॉशरूम में इस्तेमाल की गई सिरिंजें बिखरी मिली हैं, जो संगठित तरीके से परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली दवाओं के दुरुपयोग की ओर इशारा करती हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
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