झारखंड सरकार की वजह से अटकी पारसनाथ-गिरिडीह रेल परियोजना', केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का लोकसभा में बयान
झारखंड सरकार की वजह से अटकी पारसनाथ-गिरिडीह रेल परियोजना', केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का लोकसभा में बयान
झारखंड की पारसनाथ-मधुबन-गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना ठप पड़ी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राज्य सरकार की हिस्सेदारी की राशि जमा न होने के ...और पढ़ें

संवाददाता, बोकारो। झारखंड की महत्वपूर्ण मानी जाने वाली पारसनाथ–मधुबन–गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना फिलहाल ठप पड़ी है।
गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राज्य सरकार की हिस्सेदारी की राशि जमा नहीं होने के कारण इस परियोजना पर आगे काम नहीं बढ़ सका है।
यह परियोजना (Parsnath-Giridih Rail Project) केंद्र और राज्य सरकार के बीच समान लागत साझेदारी के आधार पर स्वीकृत की गई थी। रेल मंत्रालय के अनुसार इस रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2018-19 में लगभग 903 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई थी।
पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण
परियोजना के तहत पारसनाथ से मधुबन होते हुए गिरिडीह तक नई रेल लाइन बिछाने की योजना है। रेलवे की ओर से परियोजना में राज्य सरकार के हिस्से की राशि जमा करने के लिए झारखंड सरकार से कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक राज्य सरकार की ओर से राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इसके कारण परियोजना की प्रगति आगे नहीं बढ़ पाई है। यह रेल परियोजना धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पारसनाथ और मधुबन जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल हैं, जहां हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
रेल लाइन बनने से गिरिडीह और आसपास के क्षेत्रों का सीधा रेल संपर्क मजबूत होता तथा तीर्थयात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आवागमन में काफी सुविधा मिलती।
अन्य योजनाओं पर चल रहा काम
रेल मंत्री ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से परियोजना की हिस्सेदारी मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
फिलहाल यह परियोजना राज्य सरकार के अंशदान के इंतजार में लंबित है। रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि झारखंड में रेल ढांचा मजबूत करने के लिए कई अन्य योजनाओं पर भी काम चल रहा है।
राज्य में नई रेल लाइन, दोहरीकरण और अतिरिक्त रेल मार्ग से जुड़ी कई परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इन योजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में रेल यातायात की क्षमता बढ़ेगी और औद्योगिक तथा आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा।
झारखंड की पारसनाथ-मधुबन-गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना ठप पड़ी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राज्य सरकार की हिस्सेदारी की राशि जमा न होने के ...और पढ़ें

संवाददाता, बोकारो। झारखंड की महत्वपूर्ण मानी जाने वाली पारसनाथ–मधुबन–गिरिडीह नई रेल लाइन परियोजना फिलहाल ठप पड़ी है।
गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि राज्य सरकार की हिस्सेदारी की राशि जमा नहीं होने के कारण इस परियोजना पर आगे काम नहीं बढ़ सका है।
यह परियोजना (Parsnath-Giridih Rail Project) केंद्र और राज्य सरकार के बीच समान लागत साझेदारी के आधार पर स्वीकृत की गई थी। रेल मंत्रालय के अनुसार इस रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2018-19 में लगभग 903 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई थी।
पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण
परियोजना के तहत पारसनाथ से मधुबन होते हुए गिरिडीह तक नई रेल लाइन बिछाने की योजना है। रेलवे की ओर से परियोजना में राज्य सरकार के हिस्से की राशि जमा करने के लिए झारखंड सरकार से कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक राज्य सरकार की ओर से राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इसके कारण परियोजना की प्रगति आगे नहीं बढ़ पाई है। यह रेल परियोजना धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पारसनाथ और मधुबन जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल हैं, जहां हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
रेल लाइन बनने से गिरिडीह और आसपास के क्षेत्रों का सीधा रेल संपर्क मजबूत होता तथा तीर्थयात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आवागमन में काफी सुविधा मिलती।
अन्य योजनाओं पर चल रहा काम
रेल मंत्री ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से परियोजना की हिस्सेदारी मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
फिलहाल यह परियोजना राज्य सरकार के अंशदान के इंतजार में लंबित है। रेल मंत्रालय ने यह भी बताया कि झारखंड में रेल ढांचा मजबूत करने के लिए कई अन्य योजनाओं पर भी काम चल रहा है।
राज्य में नई रेल लाइन, दोहरीकरण और अतिरिक्त रेल मार्ग से जुड़ी कई परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इन योजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में रेल यातायात की क्षमता बढ़ेगी और औद्योगिक तथा आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा।
Labels
Desh
Post A Comment
No comments :