जमशेदपुर में इलाज बना जानलेवा! पथरी का ऑपरेशन कराने गए मरीज की मौत
जमशेदपुर में इलाज बना जानलेवा! पथरी का ऑपरेशन कराने गए मरीज की मौत
जमशेदपुर के सीतारामडेरा में डॉ. डीके मिश्रा के नर्सिंग होम में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने ...और पढ़ें

जमशेदपुर। शहर के सीतारामडेरा थाना अंतर्गत बाराद्वारी स्थित डॉ. डीके मिश्रा के नर्सिंग होम में एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि, बाद में अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच आपसी बातचीत और आर्थिक मुआवजे पर सहमति बनने के बाद मामला शांत हुआ।
जानें क्या है पूरा मामला
पोटका प्रखंड के आसनबनी कालापत्थर निवासी पोरेस भगत को आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी स्टोन (पथरी) के ऑपरेशन के लिए 12 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को उनका ऑपरेशन किया गया।
मृतक के साले वीरेन भगत के अनुसार, शनिवार दोपहर भोजन के बाद पोरेस का पेट फूलने लगा और उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
पुलिस की मध्यस्थता और मुआवजा
हंगामे की सूचना मिलते ही सीतारामडेरा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने डॉक्टर और परिजनों के बीच वार्ता कराई।
मानवीय आधार पर नर्सिंग होम की ओर से दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा के बाद परिजन शांत हुए और बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर चले गए।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) का पक्ष
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए IMA जमशेदपुर के सचिव डॉ. सौरव चौधरी ने स्पष्ट किया कि मरीज की सर्जरी सफल रही थी और ऑपरेशन के बाद स्थिति संतोषजनक थी। उन्होंने बताया कि मरीज पहले से ही उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से पीड़ित था।
डॉ. चौधरी के अनुसार शनिवार रात अचानक मरीज को सीने में तेज दर्द और पसीना आने की शिकायत हुई। संभावना है कि उच्च रक्तचाप के कारण उन्हें मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हार्ट अटैक) आया हो। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अनावश्यक तूल न देने की अपील
IMA ने स्पष्ट किया कि मृतक के परिजनों, विशेषकर उनके पुत्र के अनुरोध पर और मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए अंतिम संस्कार व अन्य खर्चों के लिए आर्थिक मदद प्रदान की गई है। इस मामले में कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की गई है और इसे आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है।
आईएमए ने आम जनता और मीडिया से अपील की है कि इस दुखद चिकित्सकीय घटना को अनावश्यक तूल न दिया जाए और चिकित्सा समुदाय की छवि को प्रभावित करने का प्रयास न करें।
जमशेदपुर के सीतारामडेरा में डॉ. डीके मिश्रा के नर्सिंग होम में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस ने ...और पढ़ें

जमशेदपुर। शहर के सीतारामडेरा थाना अंतर्गत बाराद्वारी स्थित डॉ. डीके मिश्रा के नर्सिंग होम में एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। हालांकि, बाद में अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच आपसी बातचीत और आर्थिक मुआवजे पर सहमति बनने के बाद मामला शांत हुआ।
जानें क्या है पूरा मामला
पोटका प्रखंड के आसनबनी कालापत्थर निवासी पोरेस भगत को आयुष्मान भारत योजना के तहत किडनी स्टोन (पथरी) के ऑपरेशन के लिए 12 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को उनका ऑपरेशन किया गया।
मृतक के साले वीरेन भगत के अनुसार, शनिवार दोपहर भोजन के बाद पोरेस का पेट फूलने लगा और उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
पुलिस की मध्यस्थता और मुआवजा
हंगामे की सूचना मिलते ही सीतारामडेरा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने डॉक्टर और परिजनों के बीच वार्ता कराई।
मानवीय आधार पर नर्सिंग होम की ओर से दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा के बाद परिजन शांत हुए और बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर चले गए।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) का पक्ष
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए IMA जमशेदपुर के सचिव डॉ. सौरव चौधरी ने स्पष्ट किया कि मरीज की सर्जरी सफल रही थी और ऑपरेशन के बाद स्थिति संतोषजनक थी। उन्होंने बताया कि मरीज पहले से ही उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से पीड़ित था।
डॉ. चौधरी के अनुसार शनिवार रात अचानक मरीज को सीने में तेज दर्द और पसीना आने की शिकायत हुई। संभावना है कि उच्च रक्तचाप के कारण उन्हें मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हार्ट अटैक) आया हो। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अनावश्यक तूल न देने की अपील
IMA ने स्पष्ट किया कि मृतक के परिजनों, विशेषकर उनके पुत्र के अनुरोध पर और मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए अंतिम संस्कार व अन्य खर्चों के लिए आर्थिक मदद प्रदान की गई है। इस मामले में कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की गई है और इसे आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है।
आईएमए ने आम जनता और मीडिया से अपील की है कि इस दुखद चिकित्सकीय घटना को अनावश्यक तूल न दिया जाए और चिकित्सा समुदाय की छवि को प्रभावित करने का प्रयास न करें।
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