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संजू सैमसन बने असली 'गेम चेंजर', भारत को तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने में रहा बड़ा हाथ

संजू सैमसन बने असली 'गेम चेंजर', भारत को तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने में रहा बड़ा हाथ



T20 World Cup: संजू सैमसन भारत को तीसरी बार टी-20 विश्व कप चैंपियन बनाने में सबसे बड़े गेमचेंजर साबित हुए। शुरुआती मैचों में बाहर रहने के बावजूद, उन्ह ...और पढ़ें





अहमदाबाद। क्रिकेट यूं तो एक टीम गेम है, लेकिन भारत को तीसरी बार टी-20 विश्व कप चैंपियन बनाने के लिए अगर किसी एक खिलाड़ी को श्रेय दिया जाए तो वो होंगे संजू सैमसन। शुरुआती मैचों में बाहर रहने के बावजूद संजू ने लगातार तीन मैचों में अद्भुत पारियां खेलीं और टूर्नामेंट में टीम के लिए सबसे बड़े ‘गेमचेंजर’ बनकर उभरे।


वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में 97 रन की नाबाद पारी, सेमीफाइनल में इंग्लैंड के विरुद्ध 89 रन की पारी अगर संजू के बल्ले से न आतीं तो शायद ही भारतीय टीम फाइनल में पहुंचती और फाइनल में संजू ने फिर 89 रनों की पारी खेलकर टीम को 255 रन के विशाल लक्ष्य तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
Sanju Samson रहे भारत की जीत के 'मास्टरमाइंड'

भारतीय क्रिकेट में संजू सैमसन को हमेशा से एक बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी माना गया है, लेकिन उनका करियर उतार-चढ़ाव और इंतजार से भरा रहा। लंबे समय तक टीम इंडिया के अंदर-बाहर होते रहने के बाद आखिरकार वह उस मुकाम पर पहुंचे हैं। संजू सैमसन की बल्लेबाजी शैली हमेशा से खास रही है। रोहित शर्मा की तरह वह भी बेहतरीन टाइमिंग के साथ लंबे छक्के लगाने की क्षमता रखते हैं।

संजू सैमसन का दमदार कमबैक

महज 17 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण करने वाले संजू शुरुआत में खास प्रदर्शन नहीं कर सके, लेकिन अगले ही सीजन में उन्होंने दो शतक और एक अर्धशतक लगाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके बाद राजस्थान रायल्स ने उन्हें आईपीएल में मौका दिया। उस समय टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने उन्हें भविष्य का भारतीय स्टार बताया था। आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन के बाद संजू को 2015 में जिंबाब्वे दौरे पर भारतीय टीम में मौका मिला, लेकिन उनका पदार्पण खास नहीं रहा।


इसके बाद उन्हें टीम में वापसी के लिए कई साल इंतजार करना पड़ा। घरेलू क्रिकेट और आइपीएल में लगातार प्रदर्शन के बावजूद वह लंबे समय तक टीम में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए। 2024 टी20 विश्व कप में भी वह टीम का हिस्सा तो थे, लेकिन ज्यादातर समय बेंच पर ही बैठे रहे।


इसके बाद जब उन्हें खेलने का मौका मिला तो उन्होंने सिर्फ पांच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में तीन शतक जड़कर अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। फिर भी टीम संयोजन के कारण उन्हें लगातार मौके नहीं मिल पाए। हाल ही में जब अभिषेक शर्मा की खराब फार्म और टीम की हार के बाद उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिला, तो संजू ने उसे दोनों हाथों से भुनाया। उनकी मैच जिताऊ पारी ने भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
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